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श्री पारस अस्पताल: 15 दिन बीते... जांच हो गई, नहीं पता ‘किसी’ कौन था, जानिए डॉ. अरिन्जय जैन ने क्या कहा था?

Thu, 24 Jun 2021 10:30 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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पुलिस के बीच श्री पारस अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अरिंजय जैन, सफेद शर्ट में - फोटो : अमर उजाला
श्री पारस अस्पताल संचालक डॉ. अरिन्जय जैन ने आठ जून को कहा था कि मैं अपने मैनेजर से बात कर रहा था। किसी ने वीडियो बना ली होगी। इस बात को 15 दिन बीत गए, लेकिन सच्चाई से पर्दा नहीं उठ सका। मॉकड्रिल की सच्चाई जग जाहिर करने वाला वो अनजान कौन था। इस सवाल पर अफसर चुप्पी साधे बैठे हैं। 28 अप्रैल को चार वीडियो संचालक कक्ष में बनाए गए। एक कुर्सी पर डॉ. अरिन्जय जैन 26 अप्रैल का वाकया बता रहे हैं। उनके सामने एक व्यक्ति स्टूल पर बैठा है। दूसरा व्यक्ति खड़ा है। जिस धारा प्रवाह अंदाज में डॉ. जैन मॉकड्रिल का किस्सा सुना रहे हैं उससे जाहिर होता है कि वहां बैठे सब लोग खास हैं। कोई बाहरी नहीं। उन्ही में से एक व्यक्ति ने रिकार्डिंग की। प्रशासन ने जांच में डॉ. अरिन्जय को अघोषित क्लीनचिट दी, लेकिन क्या उनके कहे गए शब्दों की जांच की गई। 
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श्री पारस अस्पताल के गेट पर प्रशासन ने चस्पा किया नोटिस - फोटो : अमर उजाला
वीडियो वायरल हुए 15 दिन बीत गए। चार कमेटियों की जांच हो गई। प्रशासन से क्लीनचिट भी मिल गई, लेकिन जिसने वीडियो बनाया उसे नहीं ढूंढ सके। जिसने वीडियो वायरल किए उसका भी पता नहीं चला। जो वीडियो में दिखाई दे रहे हैं, उनसे पूछताछ नहीं हुई। इस मामले में वीडियो से छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया था, न तो उसका पता लगा न ही वीडियो से छेड़छाड़ की फोरेंसिक जांच कराई गई। सबसे बड़ी बात, उन महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया जो हॉस्पिटल संचालक ने वीडियो में कहे हैं। डॉ. अरिन्जय जैन ने वीडियो में कहा था कि 22 मरीज छंट गए, उनके शरीर नीले पड़ गए थे... किसी ने उनका वीडियो बनाया, वो ‘किसी’ अभी तक सामने नहीं लाया गया है।

 
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श्री पारस अस्पताल: सीलिंग की कार्रवाई करने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम - फोटो : अमर उजाला
जांच रिपोर्ट पर सवाल
- जो सिलिंडर भेजे वो गंभीर मरीजों के लिए कितनी देर को पर्याप्त थे।
- अगर ऑक्सीजन पर्याप्त थी तो तीमारदारों से सिलिंडर क्यों मंगाए गए थे।
- 22 गंभीर मरीज थे तो फिर 16 की डेथ ऑडिट ही क्यों कराई गई।
- ऑक्सीजन कमी से मौतें नहीं हुई तो अचानक 16 मौतों क्या वजह रही।
- संचालक के बयानों का मिलान वीडियो में कही बातों से क्यों नहीं किया गया।
- पीड़ितों ने जो बयान दर्ज कराए उन्हें जांच में अहिमियत क्यों नहीं दी गई।
- महामारी में मुकदमा दर्ज होने के बाद भी फिर दोबारा अस्पताल खोलने और फिर कोविड अस्पतालों में शामिल करने की अनुमति किसने दी।

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श्री पारस अस्पताल आगरा - फोटो : अमर उजाला
15 दिन से वायरल चार वीडियो पर अटकी पुलिस की जांच
बाईपास स्थित श्री पारस अस्पताल के मालिक डॉ. अरिंजय जैन पर दर्ज केस की जांच वायरल हुए चार वीडियो पर अटक गई है। 15 दिन बाद भी पुलिस यह पता नहीं कर सकी है कि वीडियो किसने और कब बनाए। इसमें किसी तरह की छेड़छाड़ हुई या नहीं। इन वीडियो को जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लैब भेजा गया है। इनकी रिपोर्ट मिलने के बाद ही पुलिस की जांच आगे बढ़ सकेगी। बाईपास स्थित श्री पारस अस्पताल के मालिक डॉ. अरिंजय जैन के खिलाफ थाना न्यू आगरा में आठ जून को मुकदमा दर्ज कराया गया था। वादी उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरके अग्निहोत्री हैं। इसमें आरोप लगाया गया कि सात जून को सोशल मीडिया पर तथाकथित वीडियो वायरल हुआ। इसमें डॉ. अरिंजय जैन द्वारा ऑक्सीजन गैस मोदी नगर, गाजियाबाद स्थित प्लांट पर न होने और तथाकथित मॉक ड्रिल की बात कही गई है, जबकि जिला प्रशासन ने सभी अस्पतालों को ऑक्सीजन की आपूर्ति कराई थी। डॉ. जैन के बयान से जनमानस में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई, जबकि आगरा में ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता थी। इस मामले में लोकसेवक के आदेश का उल्लंघन, महामारी अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया।
 
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पारस अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
थाना न्यू आगरा के प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र सिंह बालियान के मुताबिक, विवेचना में वायरल हुए चार वीडियो सामने आए। इनकी पुलिस ने जांच की। इसमें डॉक्टर की आवाज सुनी जा सकती है, जबकि एक व्यक्ति नजर आ रहा है। 18 लोगों के बयान दर्ज किए गए। एक संदिग्ध युवक से पूछताछ भी गई। शक है कि उसने वीडियो बनाया। मगर, युवक ने पूछताछ में वीडियो नहीं बनाने की बात कही। उसके मोबाइल में भी वीडियो नहीं मिला। इस पर मोबाइल को जब्त करके फोरेंसिक साइंस लैब भेजा गया है, जिससे डिलीट हुए डाटा को रिकवर किया जा सके। उधर, वीडियो बनाने के बाद किसी तरह की छेड़छाड़ कर वायरल किए गए हैं या नहीं? यह पता करने के लिए फोरेंसिक लैब में वीडियो की सीडी बनाकर भेजी गई है। इसकी रिपोर्ट अभी आना बाकी है। एसएसपी मुनिराज जी ने बताया कि एसपी क्राइम और सीओ हरीपर्वत के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया है। वीडियो किसने बनाया और किसने वायरल किया? यह पता किया जा रहा है। वीडियो में किसी तरह की छेड़छाड़ तो नहीं हुई? इसके बारे में पता करने के लिए फोरेंसिक साइंस लैब से रिपोर्ट मांगी है।
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आगरा फोरेंसिक लैब - फोटो : अमर उजाला
यह हैं जांच के बिंदु
1. वीडियो किसने बनाया?

पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया पर चार वीडियो वायरल हुए। इनमें डॉक्टर की आवाज सुनी जा सकती है। यह हॉस्पिटल के अंदर का ही बताया गया है। यह किसने बनाया। पुलिस जांच कर रही है।

2. वीडियो किसने वायरल किया?
पुलिस की विवेचना में पता चला है कि वीडियो 28 अप्रैल का बताया गया है, जबकि डॉक्टर ने पूछताछ में वीडियो बनने वाले दिन की तारीख नहीं बताई। इतने दिन बाद वीडियो वायरल किसने किया? उस व्यक्ति को कहां से मिला?

3. एडिटिंग तो नहीं की गई?
पुलिस ने चारों वायरल वीडियो को फोरेंसिक साइंस लैब भेजा है। इसमें देखा जाएगा कि वीडियो में किसी तरह की छेड़छाड़ के बाद तो वायरल नहीं किया गया? यह मूल वीडियो की ही कापी है या नहीं?

4. असली वीडियो कहां है?
पुलिस को वायरल वीडियो मिल गए हैं। अब पुलिस के सामने सवाल यह है कि  असली वीडियो किसके पास है। केस में वीडियो बनाने वाला अहम होगा। उसके पास सही वीडियो भी होगा।

अधिवक्ता ने एसएसपी को भेजा प्रार्थना पत्र
अधिवक्ता अनिल प्रकाश रावत ने एसएसपी को प्रार्थना पत्र भेजा है। इसमें कहा कि डॉ. अरिंजय जैन का एक वीडियो सामने आया था। इसमें वो ऑक्सीजन न होने और मॉक ड्रिल की बात कर रहे हैं। इस मामले में मुकदमा दर्ज करके कार्रवाई की मांग की है।


 
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आरटीआई कार्यकर्ता नरेश पारस - फोटो : अमर उजाला
ये पूछे गए सवाल
- पारस अस्पताल सामूहिक नरसंहार पर आपका मत क्या है।
- आपने शासन व प्रशासन स्तर पर इस सदंर्भ में क्या कार्यवाही की
- यदि कार्यवाही की, तो उसकी स्थिति सार्वजनिक की जाए।
- मीडिया व समाचार पत्र में प्रसारित खबरों का क्या संज्ञान लिया।
- क्या आपने 22 मौतों के मामले में हॉस्पिटल का निरीक्षण किया।
- क्या इस मामले में जनता को न्याय दिलाना आपका काम नहीं

राज्य मानवाधिकार में शिकायत दर्ज
श्री पारस अस्पताल की दमघोंटू मॉकड्रिल मामले में पीड़ित अशोक चावला ने बुधवार को राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। इससे पहले सामाजिक कार्यकर्ता नरेश पारस ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। 
 
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श्री पारस अस्पताल से बाहर निकलते मरीज - फोटो : अमर उजाला
ऑक्सीजन की थी कमी, 12 अस्पताल संचालकों ने आईएमए समिति को दी जानकारी
अप्रैल में अस्पतालों में ऑक्सीजन के लिए मारामारी थी। ऑक्सीजन का टोटा होने पर बोर्ड तक टांगे, तीमारदारों को भी मरीजों को लेकर जाने को कहा था। क्या करते, हालात ही ऐसे थे, यह जानकारी आईएमए की जांच कमेटी को कोविड अस्पताल संचालकों ने दी, लेकिन प्रशासन के डर से लिखित में बयान देने से पीछे हट गए हैं। श्री पारस अस्पताल में दमघोंटू मॉकड्रिल की जांच कर रही पांच सदस्यीय समिति की जांच सप्ताहभर आगे तक खिंच सकती है। समिति ने तब के 14 कोविड अस्पताल संचालकों से बात कर हालात जाने हैं, इसमें से दो अस्पतालों ने ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में मिलने की बात कही, बाकी के दस अस्पताल संचालकों ने ऑक्सीजन की भारी कमी के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अप्रैल में तो अस्पताल के बाहर तक मरीज थे, भर्ती वाले अस्पतालों के लिए भी पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं थी, कैसे हालात रहे, यह बयान नहीं किए जा सकते। समिति ने जब उनसे यह लिखित में मांगा तो अस्पताल संचालकों ने हिम्मत जवाब दे गई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह सिर्फ आपकी जानकारी के लिए बताया है, लिखित में या फिर गवाही के तौर पर कुछ नहीं कहेंगे। प्रशासन के खिलाफ खड़े नहीं हो सकते।

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