मुल्कों के बीच सरहद की दीवार लांघकर पंछी, नदिया और पवन के झोंके मनचाहे स्थान पर पहुंच जाते हैं। सर्दी का मौसम आते ही प्रवासी पक्षी एक दिन में करीब 1000 मील से अधिक की दूरी तय करते हुए चंबल सेंक्चुअरी बाह और इटावा रेंज में पहुंचने लगे हैं।
घड़ियाल और इंडियन स्कीमर के घर में गुलाबी सर्दी के साथ पेंटेड स्टॉर्क, ब्लैक हेडेड आईबिस, व्हिसलिंग टील, रुडी शेल्डक, ग्रे हेरॉन आदि पक्षियों ने डेरा जमा लिया है। चंबल की आबोहवा परिंदों को यहां खींचकर लाती है। इनकी अठखेलियां पक्षी प्रेमियों के मन को हर्षित कर रही हैं। बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि इंडियन स्कीमर, रुडी शेल्डक, रिवर टर्न, ब्लैक बेलीड टर्न आदि चिड़ियां यहां प्रजनन कर अपना कुनबा बढ़ा रही हैं।
जलीय सांप को भी निगल लेता है आइबिस
चंबल का रुख करने वाला ब्लैक हेडेड आइबिस (सफेद बुज्जा) जल में पाए जाने वाले सांपों को निगल लेता है। मछली, मेंढक, जलीय कीड़े-मकोडे़ इनका भोजन होते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम थ्रेसकिओर्निस मेलानोसेफेलस है। आइबिस का सिर, गर्दन और पैर काले होते हैं। पंख सफेद होते हैं। चोंच नीचे की ओर मुड़ी होती है। इनकी लंबाई करीब 70 सेंटीमीटर होती है। एक किलो ग्राम से अधिक वजन वाले आइबिस करीब एक मीटर तक पंख फैलाते हैं।