फिरोजाबाद के जसराना में मंगलवार की शाम कस्बा पाढ़म में दो मंजिला मकान में लगी भीषण आग के दौरान अलग-अलग नजारे देखने को मिले। जहां कुछ लोग पास में जाने का साहस नहीं जुटा पाए वहीं कुछ लोग वीडियो बनाने के साथ फोटो खींचने में व्यस्त दिखाई दिए। वहीं कुछ युवाओं ने साहस दिखाया और अपनी जान हथेली पर रखकर बचाव कार्य करते नजर आए।
रमन प्रकाश की दुकान पर नौकरी करने वाला स्यौडी निवासी छोटेलाल मकान के अंदर कंबल पहनकर गया, लेकिन अचानक दम घुटने से बेहोश हो गया। बचावकर्मियों ने उसे एंबुलेंस से अस्पताल भेजा। वहीं टीन तोड़ने के कारण भुवनेश गिर गया। इस दौरान उसे चोट लग गई। वहीं फायर कर्मी जितेंद्रपाल भी बेहोश हो गया। साथ में आए बचावकर्मी उसे अंदर से निकालकर बाहर लाए। थोड़ी देर बाद वह सही हो गया।
घटनास्थल पर पुलिस और स्थानीय लोग
- फोटो : अमर उजाला
आग की लपटों के कारण आसपास के मकानों में भी दरारें आ गईं। मकान में रखीं इन्वर्टर की बैटरियां फटने से इलाके में दहशत फैल गई थी। मकान में शाम साढ़े बजे लगी आग पर करीब सवा 10 बजे काबू पाया जा सका।
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घर में लगी थी भीषण आग
- फोटो : अमर उजाला
परिजन को ढांढस बंधाने पहुंचे राजनीतिक दलों के लोग
अग्निकांड के बाद बुधवार की सुबह से कस्बा में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि एवं जनप्रतिनिधि पहुंचे। सांसद चंद्रसेन जादौन, पूर्व विधायक जसराना रामगोपाल उर्फ पप्पू लोधी, पूर्व जिलाध्यक्ष मानवेंद्र प्रताप लोधी, सुमित प्रताप सिंह, जिला पंचायत सदस्य दिनेश यादव पीड़ित परिजन से मिल उनको ढांढस बंधाया। इस दौरान सभी ने कहा कि वो पीड़ित परिवार के साथ हैं।
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घटनास्थल पर पुलिस और दमकल कर्मी
- फोटो : अमर उजाला
जल जाने के कारण बच्चों को भी दी गई मुखाग्नि
आमतौर पर बच्चों की मौत होने पर उन्हें दफनाया जाता है। वहीं उसके अंतिम संस्कार के सभी कार्य पूरे होते हैं। वहीं तेजस्वी (6 माह) पुत्री नितिन कुमार, हर्ष (12) पुत्र मनोज कुमार और भरत (8) पुत्र मनोज कुमार के मामले में ऐसा नहीं हुआ। तीनों के शव काफी हद तक जल चुके थे। जल जाने के कारण रिश्तेदारों एवं ग्रामीणों के कहने पर परिजन ने उनका दाह संस्कार ही किया। बच्चों का दाह संस्कार होते देख हर किसी आंखों से आंसू बह रहे थे। वहीं रमन प्रकाश तो दहाडे़ मारते हुए जमीन पर गिर पड़े।
सनातन परंपरा के अनुसार बच्चे की मृत्यु होने पर पिता को अंत्येष्टि स्थल तक जाना निषेध माना जाता है। लेकिन पाढ़म में हुए अग्निकांड में मृत तीन माह की तेजस्वी के अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया उसके पिता नितिन द्वारा ही पूरी की गई।