आगरा के बाह में चंबल की लहरें थमने से शुक्रवार को बाढ़ का पानी करीब 80 सेमी उतर गया। उफान थमने से लोगों ने राहत महसूस की है। हालांकि 20 गांव अभी भी पूरी तरह पानी से घिरे हैं। यहां फसल, खलिहान और तमाम घर तबाह हो चुके हैं। बृहस्पतिवार रात से लेकर शुक्रवार की सुबह तक इन गांवों के लोगों की सांसें अटकी थीं। चंबल नदी 26 साल पुराना रिकॉर्ड (136.60 मीटर) तोड़कर 137.80 मीटर तक पहुंच जाने से तबाही मचा रही थी। इधर, एसडीआरएफ व जल पुलिस की टीमें लोगों की मदद में दूसरे दिन भी जुटी रहीं।
कोटा बैराज से छोडे़ गए 26.50 लाख क्यूसेक पानी की वजह से चंबल नदी में बाढ़ आई। इस बाढ़ से 20 गांवों में काफी नुकसान हुआ है। तमाम घर, खेत, खलिहान डूब जाने से लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। वैसे बाढ़ के पानी से करीब 38 गांव के खेतों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। दूसरे दिन भी ग्रामीणों के चेहरों पर बाढ़ की दहशत दिखी। खेत की फसल और घर के सामान पानी में बर्बाद हो जाने से लोगों की आंखों में आंसू छलक रहे हैं।
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चंबल में बाढ़
- फोटो : अमर उजाला
बाह के 20 गांवों मऊ की मढै़या, गोहरा, रानी पुरा, भटपुरा, गुढ़ा, झरनापुरा, डगोरा, कछियारा, रेहा, उमरेठापुरा, भगवानपुरा, पुरा डाल, पुरा शिवलाल, बीच का पुरा, क्योरी, कुंवर खेडा, धांधू पुरा, सिमराई, जेबरा, जगतपुरा का तहसील मुख्यालय से संपर्क टूटा रहा।
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चंबल में बाढ़
- फोटो : अमर उजाला
6 गांवों गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, गुढ़ा, झरनापुरा, पुरा भगवान में स्टीमर के सहारे बीमार लोगों को इलाज और फंसे लोगों को बाहर निकलने में मदद मिल रही है।
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चंबल में बाढ़
- फोटो : अमर उजाला
एसडीएम रतन वर्मा ने बताया कि एसडीआरएफ और जल पुलिस की मदद से बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम दिनभर चला। चंबल नदी का जलस्तर थम गया है।