चंबल का बीहड़ बाढ़ में डूब गया है। बृहस्पतिवार को आगरा के पिनाहट में बाढ़ ने 26 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। चंबल शाम छह बजे खतरे के निशान से सात मीटर (करीब 21 फुट) ऊपर 137 मीटर पर पहुंच गई। नदी में 26.48 लाख क्यूसेक पानी की आवक है, जिससे शुक्रवार को हालात और बिगड़ने की आशंका है।
इससे पहले 1996 में सर्वाधिक जलस्तर 136.60 मीटर रहा था। जिसके 26 साल बाद बाह, पिनाहट और जैतपुर तीन ब्लॉक में 38 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। बीहड़ में बसे 20 गांव में हालात खराब हैं। रास्तों पर 10 से 20 फुट तक पानी भरा है। घर डूब गए हैं। लोग सामान लेकर छतों पर फंसे हुए हैं। बाढ़ग्रस्त गांव के लोग ऊंचे टीलों पर डेरा डाल रहे हैं। जबकि सैंकड़ों बुजुर्ग, बच्चे व महिलाएं बाढ़ से घिरे गांव में फंसे हुए हैं। चंबल का रौद्र रूप देखकर एक तरफ प्रशासन के हाथ-पांव फूल रहे हैं, दूसरी तरफ राहत व बचाव के इंतजाम धूल चाट रहे हैं।
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गांव गोहरा के घरों में भरा पानी, छतों पर फंसे लोग
- फोटो : अमर उजाला
सर्वाधिक बाढ़ से प्रभावित 20 गांवों मऊ की मढै़या, गोहरा, रानी पुरा, भटपुरा, गुढ़ा, झरना पुरा, डगोरा, कछियारा, रेहा, उमरैठापुरा, भगवान पुरा, पुरा डाल, पुरा शिवलाल, बीच का पुरा, क्योरी, कुंवर खेड़ा, धांधू पुरा, सिमराई, जेबरा, जगतू पुरा में माल का भारी नुकसान है। 6 गांवों गोहरा, रानी पुरा, भटपुरा, गुढ़ा, झरना पुरा, भगवान पुरा गांव में फंसे लोगों को स्टीमर से निकालने की कवायद हो रही है।
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ग्रामीणों को स्टीमर से निकाला जा रहा
- फोटो : अमर उजाला
पर्याप्त स्टीमर नहीं होने से सैंकड़ों लोग बेबस और लाचार हैं। बृहस्पतिवार सुबह कमिश्नर अमित गुप्ता ने पिनाहट में बढ़ते चंबल नदी के जलस्तर का जायजा लिया। उधर, डीएम और एसएसपी ने बाह के झरनापुरा व गोहरा गांव में हालात देखे। एसडीएम रतन वर्मा ने बताया कि बचाव व राहत कार्यों में तेजी के लिए राज्य आपदा नियंत्रण बल (एसडीआरएफ) और जल पुलिस को बुलाया गया है।
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घर में भरा बाढ़ का पानी
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खाली हुआ मऊ की मढै़या गांव
बाढ़ में टापू बना मऊ की मढ़ैया गांव खाली हो गया है। गांव के तीन परिवार पुतईं, बंटू, राजू के परिवारों ने सबसे आखिर में घर छोड़ा। तीनों का कहना है चंबल की बाढ़ ने गांव के आसपास खेत डूबे हैं। पशु बीहड़ में फंसे हैं।
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बाढ़ में डूबा स्कूल
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खेत पर फंसे बुजुर्ग को बचाया
रानी पुरा गांव के 70 साल के अमर सिंह ऊंचाई वाले इलाके के अपने खेत पर फंस गए थे। जानकारी पर प्रधान भूरे सिंह स्टीमर लेकर पहुंचे और उन्हें सुरक्षित निकाला। गांव पहुंचने पर अमर सिंह बोले घुटनों तक बाढ़ का पानी भरने से बचने की उम्मीद छोड़ दी थी।
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ट्यूब से पानी पार करते ग्रामीण
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उमरैठापुरा गांव डूबा, ट्यूब के सहारे बचाई जान
डेढ़ हजार की आबादी वाला उमरेठा पुरा गांव बाढ़ में डूब गया है। बुधवार तक सामान के साथ छतों पर पहुंचे 70 परिवारों को पानी घटने की उम्मीद थी। बृहस्पतिवार की सुबह छतों तक पानी पहुंचा तो लोग छतों उतरकर ट्यूब के सहारे बीहड़ की ओर भागे। रामलक्षिन, अभिलाख, शाहूकार, शौकीराम, भजन लाल, मेघ सिंह, कप्तान सिंह, भगवानदास आदि ने बताया कि पहली बार इतनी बाढ़ देखी है।
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बाढ़ के पानी से निकलती महिला और युवक
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गोहरा : 60 घर डूबे, छतों पर फंसे लोग
दो हजार की आबादी वाला गांव गोहरा बाढ़ के पानी से घिर गया है। 200 घरों में से 60 घर डूब गए हैं। 140 परिवार घर के सामान के साथ छतों पर फंसे हैं। सिलेटी सिंह, कीर्तिराम, प्रभु सिंह, तोफान सिंह, पप्पी देवी, आहूलाल, मूंगाराम ने घर डूबने पर ऊंचे इलाके के पड़ोसियों के घरों में शरण ली है। गोहरा, रानीपुरा, उमरैठा पुरा के प्राइमरी स्कूल भी डूब गए।
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ट्यूब के सहारे छत तक पहुंचे बच्चे
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स्वास्थ्य शिविर में 184 को मिला इलाज
बाढ़ प्रभावित गांवों में बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ गया है। बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने झरनापुरा, पुरा भगवान, गोहरा में बीहड़ के टीले और गांव में शिविर लगाकर 184 बीमारों को दवाएं दीं। वहीं पशुपालन विभाग ने गोहरा, रानी पुरा, भटपुरा, झरनापुरा, भगवान पुरा, सिमराई में शिविर लगाकर 75 मवेशियों का इलाज किया।
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पुरा भगवान में स्टीमर का इंतजार करते युवक
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गुढ़ा में मकान गिरे, कई घर डूबे
गुढ़ा गांव में बाढ़म में धन सिंह, प्रवीन सिंह के मकान पानी में समा गए। राज बहादुर की घर की दीवार ढह गई। घरों में पानी भरने से गिरंद सिंह, हजूरी, बेनीराम, दुलारे, धन सिंह, दूरबीन, जबर सिंह आदि ने बीहड़ के टीले पर डेरा डाल लिया है।
पिनाहट के पंप हाउस में भरा पानी
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रैहा ,बरैंडा, डगोरा और कछियारा के लोग फंसे
थाना मनसुखपुरा क्षेत्र के गांव रैहा, बरैंडा, कछियारा और डगोरा के संपर्क मार्गों में पानी भरने से ये गांव टापू बने हुए हैं। इन गांवों में करीब दो हजार लोग फंसे हैं। रैहा के प्रधान अजय कौशिक ने बताया कि एसडीएम से इन गांव के लोगों की मदद के लिए स्टीमर या नाव की मांग की थी। उन्होंने यह कहकर बात टाल दी कि चार स्टीमर हैं जो अन्य जगह पर चल रहे हैं। अब कोई व्यवस्था नहीं है।