कासगंज निवासी ऑटो चालक की गाजियाबाद पुलिस कस्टडी में मौत हो गई। मंगलवार को शव गांव पहुंचा तो ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया। देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ का जमावड़ा हो गया। सूचना पर एसडीएम सहित पुलिस प्रशासन गांव पहुंचा। किसी तरह ग्रामीणों को समझाकर शांत कराया।
मामला जिले के अमांपुर थाना क्षेत्र के नगला बांस गांव का है। गांव निवासी धर्मपाल ऑटो चलाकर परिवार का पालन पोषण करता था। गाजियाबाद में पुलिस हिरासत में उसकी मौत हो गई। मंगलवार को जब उसका शव उसके पैतृक गांव नगला बांस पहुंचा तो परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश पनप गया। उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया।
परिजनों का कहना है कि पुलिस की पिटाई से धर्मपाल की मौत हुई है। परिजनों ने आर्थिक सहायता, आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और परिवार के सदस्य को नौकरी देने की मांग की। उन्होंने मांग पूरी होने के बाद ही शव का अंतिम संस्कार किए जाने की बात कही। घटना की सूचना मिलने पर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आर्थिक सहायता के साथ नौकरी दिलाने सहित अन्य मांगों को पूरा कराने का भरोसा देकर लोगों को शांत कराया।
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रोते बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
जानकारी के मुताबिक धर्मपाल गाजियाबाद में ऑटो चलाता था। रविवार को ऑटो और साइकिल सवारों में टक्कर हो गई। इसके बाद पुलिस उसे कनावनी चौकी ले गई। रविवार की रात गाजियाबाद के अहिंसा खंड-2 में पुलिस हिरासत में उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने धर्मपाल के साथ मारपीट की। इसके चलते उसकी मौत हुई। मौत की सूचना पर परिवार के साथ गांव के लोग भी गाजियाबाद पहुंच गए थे।
मंगलवार को पोस्टमॉर्टम के बाद ऑटो चालक का शव परिजनों के सुपुर्द किया गया। परिजन शव लेकर पैतृक गांव पहुंचे। इसके बाद आक्रोश फूटा। ऑटो चालक की मौत को लेकर लोगों में रोष की सूचना मिलने पर एसडीएम रितु सिरोही और सीओ अजीत चौहान मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों से वार्ता की।
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एसडीएम ने परिजनों से बात करके शांत कराया।
- फोटो : अमर उजाला
परिजनों ने मांग रखी कि मृतक के आश्रितों को आर्थिक सहायता के लिए मुआवजा दिया जाए, साथ ही विधवा पत्नी को नौकरी। इसके अलावा हिरासत में मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। एसडीएम रितु सिरोही ने उन्हें मुआवजा दिलाने का भरोसा दिया।
उन्होंने आश्रित के आधार कार्ड व अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे और मुआवजे की पत्रावली तैयार कराने का आदेश दिया। लेखपाल को मौके पर बुलाकर कार्रवाई शुरू कराई गई। नगर पंचायत में संविदा पर नौकरी दिलाने का भी एसडीएम ने भरोसा दिलाया। इसके बाद मामला शांत हो सका और ऑटो चालक के शव का अंतिम संस्कार हो सका।
कासगंज। ऑटो चालक की पत्नी पूनम का रो रोकर बुरा हाल था। पूनम को अपने तीनों बच्चों के पोषण की चिंता थी। धर्मपाल की सबसे बड़ी बेटी कामना है जो सात वर्ष की है। दूसरी पुत्री तनु 6 वर्ष की है जबकि बेटा रिषभ तीन वर्ष का है। हर कोई मौके पर बच्चों के पोषण की बात कर रहा था।
गाजियाबाद में दर्ज हो चुका है गैर इरादतन हत्या का मुकदमा
पुलिस हिरासत में ऑटो चालक की मौत होने पर परिजनों और ऑटो चालकों ने गाजियाबाद में आक्रोश व्यक्त करते हुए प्रदर्शन किया। आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। परिजनों की तहरीर पर गाजियाबाद के कनावनी चौकी के प्रभारी सहित तीन सिपाहियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।