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11 महीने का ही क्यों बनता है रेंट एग्रीमेंट? जानिए मकान मालिक और किरायेदार के जरूरी अधिकार

Tue, 22 Sep 2026 03:08 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Why Rent Agreement Made For 11 Months India: अक्सर जब लोगों का रेंट एग्रिमेंट बनता है तो उनके दिमाग ये सवाल आता है कि आखिर ये रेंट एग्रिमेंट 11 महीने का ही क्यों बनता है, पूरे एक साल या 12 महीने का क्यों नहीं बनता? आइए इस लेख में इसी सवाल का जवाब जानते हैं।
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11 महीने का रेंट एग्रीमेंट क्यों बनता है - फोटो : AI
Difference Between Notarized and Registered Rent Agreement: भारत में जब भी कोई व्यक्ति मकान या दुकान किराये पर लेता है, तो मकान मालिक और किरायेदार के बीच 11 महीने का ही रेंट एग्रीमेंट तैयार किया जाता है। कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि यह समझौता पूरे 12 महीने या एक साल का क्यों नहीं होता। दरअसल, इसके पीछे मुख्य वजह भारतीय पंजीकरण अधिनियम (Registration Act, 1908) का एक विशेष कानून है।

इस कानून से बचने और प्रक्रिया को आसान बनाए रखने के लिए 11 महीने का एग्रीमेंट बनाया जाता है। आइए आसान और सरल भाषा में समझते हैं कि इसके पीछे का कानूनी कारण क्या है और दोनों पक्षों के पास क्या-क्या अधिकार होते हैं।
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house rent agreement - फोटो : Amar Ujala
स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस की बचत
  • भारतीय पंजीकरण अधिनियम की धारा 17 के तहत, यदि कोई रेंट एग्रीमेंट 12 महीने या उससे अधिक अवधि का होता है, तो उसका सरकारी सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में पंजीकरण कराना अनिवार्य हो जाता है।
  • पंजीकरण कराने पर भारी स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस देनी पड़ती है। 11 महीने का एग्रीमेंट बनाकर मकान मालिक और किरायेदार इस अतिरिक्त खर्च और सरकारी कागजी कार्रवाई से बच जाते हैं।
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कोर्ट-कचहरी और विवादों से बचने का तरीका - फोटो : Amar Ujala
कोर्ट-कचहरी और विवादों से बचने का तरीका
  • 11 महीने का अनुबंध खत्म होने पर दोनों पक्षों के पास एग्रीमेंट को आसानी से रिन्यू करने या खत्म करने का विकल्प होता है।
  • अगर समझौता 12 महीने से अधिक का रजिस्टर्ड होता है, तो किरायेदार को बेदखल करने के नियम बहुत सख्त हो जाते हैं।
  • 11 महीने की अवधि होने से मकान मालिक को यह डर नहीं रहता कि किरायेदार उसकी संपत्ति पर अवैध कब्जा कर लेगा।

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किरायेदार के कानूनी अधिकार और सुरक्षा - फोटो : Amar Ujala
किरायेदार के कानूनी अधिकार और सुरक्षा
  • रेंट एग्रीमेंट सिर्फ मकान मालिक के लिए ही नहीं, बल्कि किरायेदार के लिए भी सुरक्षा कवच है।
  • मकान मालिक बिना पूर्व नोटिस दिए किरायेदार को अचानक घर से नहीं निकाल सकता।
  • इसके अलावा, एग्रीमेंट में तय की गई राशि से अधिक किराया मांगना या बिना सहमति के सिक्योरिटी डिपॉजिट रोकना मकान मालिक के लिए गैर-कानूनी होता है।
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मकान मालिक के पास मौजूद महत्वपूर्ण अधिकार - फोटो : Adobe Stock
मकान मालिक के पास मौजूद महत्वपूर्ण अधिकार
  • मकान मालिक को अपनी संपत्ति की देखभाल का पूरा अधिकार होता है।
  • अगर किरायेदार समय पर किराया न दे, संपत्ति को नुकसान पहुंचाए या अवैध गतिविधियों में लिप्त हो, तो मकान मालिक नोटिस देकर एग्रीमेंट कैंसिल कर सकता है।
  • इसके अलावा, मकान मालिक एग्रीमेंट खत्म होने पर अपने घर का निरीक्षण करने और तय नियमों के तहत किराया बढ़ाने का हक रखता है।
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