सुरक्षित और जिम्मेदारी से वाहन चलाने वाले लोगों के लिए भविष्य में कार बीमा सस्ता हो सकता है। नई तकनीक आधारित बीमा व्यवस्था में ड्राइविंग की आदतों के आधार पर प्रीमियम तय किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
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Telematics Based Car Insurance
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इस डिजिटल और एआई के दौर में वाहन बीमा क्षेत्र तेजी से तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। आने वाला जो भविष्य है उसमें कार बीमा का प्रीमियम केवल वाहन की कीमत, मॉडल या इंजन क्षमता के आधार पर तय नहीं होगा, बल्कि चालक गाड़ी को किस तरह से ड्राइव करता है उसका भी ध्यान रखा जाएगा। आने वाले समय में नई डिजिटल तकनीकों के इस्तेमाल से बीमा कंपनियां जोखिम का अधिक सटीक ढंग से आकलन कर सकेंगी। सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ यह व्यवस्था बीमा क्षेत्र में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने का भी काम करेगी।
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टेलीमैटिक्स आधारित बीमा मॉडल में वाहन की ड्राइविंग से जुड़ी कुछ जानकारियों का विश्लेषण किया जाता है। इनमें वाहन की गति, ब्रेक लगाने का तरीका, यात्रा की अवधि, सड़क पर व्यवहार और ड्राइविंग की निरंतरता जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं। इन आंकड़ों के आधार पर बीमा कंपनियां चालक के जोखिम स्तर को समझने का काम करती हैं।
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बेहतर ड्राइविंग रिकॉर्ड रखने वाले ग्राहकों को कम प्रीमियम या विशेष लाभ मिलने की संभावना अधिक होती है। बीमा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था का उद्देश्य केवल प्रीमियम तय करना नहीं है, बल्कि सुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा देने का काम भी करना है। इस तरह की व्यवस्था में चालक जानते हैं कि उनका ड्राइविंग व्यवहार भविष्य के बीमा खर्च को प्रभावित कर सकता है। इस कारण वे यातायात से जुड़े नियमों का सही पालन कर सकते हैं।
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हालांकि, ध्यान देने वाली बात है कि इसमें डाटा सुरक्षा और गोपनीयता महत्वपूर्ण विषय बन सकते हैं। इस कारण इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग निर्धारित नियमों और पारदर्शी प्रक्रियाओं के तहत ही किया जाए।
अगर इस मॉडल को व्यापक स्तर पर अपनाया जाता है, तो भारत में मोटर बीमा की कार्यप्रणाली में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सुरक्षित ड्राइविंग करने वाले लोगों को इससे आर्थिक प्रोत्साहन तो मिलेगा साथ ही साथ बीमा कंपनियां भी जोखिम का अधिक सटीक मूल्यांकन कर सकेंगी। इससे ग्राहकों और कंपनी दोनों को लाभ मिल सकता है।