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वसीयत बनवाने की सही कानूनी प्रक्रिया क्या है, क्या सिर्फ सफेद कागज पर लिखी बातों को वसीयत मान सकते हैं?

Sun, 20 Sep 2026 06:31 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Indian Succession Act Will Rules: अक्सर लोगों के मन में वसीयत को लेकर कई तरह के सवाल रहते हैं, बहुत से लोग ये सोचते हैं कि सिर्फ सफेद कागज पर लिखी बातों को कानूनी रूप से मान्य माना जा सकते हैं, जो की पूरा सच नहीं है। आइए इसी के बारे में समझते हैं।
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वसीयत बनाने की कानूनी प्रक्रिया - फोटो : AI
Legal Process Of Making Will India: अपनी जीवनभर की कमाई और संपत्ति को अपनों के बीच सही तरीके से बांटने के लिए वसीयत बनाना सबसे सुरक्षित और कानूनी रास्ता है। मगर कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि वसीयत बनवाने की सही प्रक्रिया क्या है और क्या इसे सादे सफेद कागज पर लिखा जा सकता है? 

भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के तहत सादे कागज पर लिखी गई वसीयत भी पूरी तरह से कानूनी रूप से वैध मानी जाती है। वसीयत के लिए किसी खास स्टाम्प पेपर की अनिवार्यता नहीं होती है, बशर्ते उसमें दी गई शर्तें और प्रक्रिया कानून के मुताबिक हों। आइए इस लेख में आसान भाषा में समझते हैं वसीयत से जुड़े मुख्य नियम।
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सादे कागज पर बनी वसीयत भी है पूरी तरह वैध - फोटो : Adobe Stock
सादे कागज पर बनी वसीयत भी है पूरी तरह वैध
  • कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से सादे सफेद कागज पर हाथ से लिखकर या टाइप कराकर वसीयत तैयार कर सकता है।
  • इसके लिए न तो महंगे स्टाम्प पेपर की जरूरत होती है और न ही किसी विशेष कानूनी भाषा की।
  • बस उसमें संपत्ति का स्पष्ट विवरण और किसे कितना हिस्सा दिया जा रहा है, इसका साफ-साफ उल्लेख होना चाहिए।
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दो गवाहों के हस्ताक्षर होना सबसे अनिवार्य नियम - फोटो : Adobe Stock
दो गवाहों के हस्ताक्षर होना सबसे अनिवार्य नियम
  • वसीयत को कानूनी रूप से सही बनाने के लिए दो गवाहों की मौजूदगी और उनके हस्ताक्षर बेहद जरूरी हैं।
  • वसीयत बनाने वाले व्यक्ति को दोनों गवाहों के सामने हस्ताक्षर करने होते हैं और फिर दोनों गवाह भी उस पर अपने दस्तखत करते हैं।
  • ध्यान रखें कि गवाह ऐसे होने चाहिए जो वसीयत में संपत्ति के हिस्सेदार या लाभार्थी न हों।

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क्या वसीयत का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है? - फोटो : Adobe Stock
क्या वसीयत का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है?
  • कानून के मुताबिक वसीयत का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य नहीं है, लेकिन इसे रजिस्ट्रार दफ्तर में पंजीकृत कराना सबसे सुरक्षित माना जाता है।
  • रजिस्टर्ड वसीयत से भविष्य में परिजनों के बीच कोर्ट-कचहरी या किसी भी तरह के विवाद की आशंका लगभग खत्म हो जाती है, क्योंकि इसका सरकारी रिकॉर्ड दर्ज हो जाता है।
  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर भविष्य में कोई उत्तराधिकारी वसीयत को फर्जी बताकर अदालत में चुनौती देता है, तो अपंजीकृत वसीयत के मुकाबले रजिस्टर्ड वसीयत की प्रामाणिकता को साबित करना काफी आसान होता है।
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मानसिक रूप से स्वस्थ होना है सबसे महत्वपूर्ण - फोटो : Adobe Stock
मानसिक रूप से स्वस्थ होना है सबसे महत्वपूर्ण
  • वसीयत बनाने वाला व्यक्ति अपनी पूरी होश-हवास और मानसिक रूप से स्वस्थ स्थिति में होना चाहिए।
  • उस पर किसी का दबाव या धोखा नहीं होना चाहिए। वसीयत में व्यक्ति कभी भी अपनी जिंदगी में बदलाव कर सकता है।
  • सबसे आखिरी में बनाई गई वसीयत ही कानूनन मान्य और अंतिम मानी जाती है।
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