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उधारी का जाल: दूसरों की मदद कर अपना नुकसान तो नहीं कर रहीं हैं आप?

Fri, 19 Jun 2026 04:50 PM IST
प्रकाश चंद जोशी यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जरूरत से ज्यादा आर्थिक मदद बन सकती है आपकी सबसे बड़ी वित्तीय गलती। चलिए जानते हैं क्यों जरूरी है, 'फाइनेंशियल हेल्पिंग बाउंड्री'।
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जरूरत से ज्यादा आर्थिक मदद बन सकती है आपकी सबसे बड़ी वित्तीय गलती। - फोटो : Amar Ujala AI
मोनिका अग्रवाल,

दोस्ती, रिश्तेदारी और अपनापन निभाने के चक्कर में कई लोग अपनी जेब पर इतना बोझ डाल लेते हैं कि खुद की आर्थिक स्थिति डगमगा जाती है। किसी की परेशानी देखकर तुरंत पैसे उधार देना या अपनी बचत निकालकर मदद करना इन्सानियत जरूर है, लेकिन अगर यह आदत बार-बार आपके बजट, मानसिक शांति और भविष्य की योजनाओं को प्रभावित कर रही है, तो समय आ गया है कि आप अपनी 'फाइनेंशियल हेल्पिंग बाउंड्री' तय करें। आखिर दूसरों को सहारा देते-देते खुद को आर्थिक संकट में डालना समझदारी नहीं है।
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जरूरत से ज्यादा आर्थिक मदद बन सकती है आपकी सबसे बड़ी वित्तीय गलती। - फोटो : Adobe Stock
यह उधारी एक तरह का ‘इमोशनल टैक्स’ भी
  • जब कोई करीबी आर्थिक मदद मांगता है, तो अक्सर हमारा भावनात्मक पक्ष हावी हो जाता है। न्यूरो-साइकोलॉजी के अनुसार, ऐसे समय में दिमाग का वह हिस्सा सक्रिय हो जाता है जो दूसरों का दर्द महसूस करता है। परिणामस्वरूप हमें लगता है कि मदद न करना गलत होगा। विशेषज्ञ इसे ‘इमोशनल टैक्स‘ कहते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत फैसला लेने के बजाय खुद को 24 घंटे का समय दें। यह ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ आपको भावनाओं के बजाय वास्तविक आर्थिक स्थिति के आधार पर निर्णय लेने में मदद करेगा।
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जरूरत से ज्यादा आर्थिक मदद बन सकती है आपकी सबसे बड़ी वित्तीय गलती। - फोटो : Adobe Stock
‘पॉकेट गार्जियन’ बनाएं अपनी बचत का रखवाला
  • आज के डिजिटल दौर में कई फिनटेक एप्स आपके खर्च और बजट को ट्रैक करने में मदद करती हैं। आप अपनी आय का एक छोटा हिस्सा ‘इमरजेंसी हेल्प फंड‘ के रूप में अलग रख सकती हैं। उदाहरण के लिए, यदि आपने हर महीने 5,000 रुपये की सीमा तय की है, तो किसी की मदद उसी राशि के भीतर करें। इससे आपकी बचत सुरक्षित रहेगी और जरूरत पड़ने पर आप बिना तनाव के सहायता भी कर सकेंगी।

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जरूरत से ज्यादा आर्थिक मदद बन सकती है आपकी सबसे बड़ी वित्तीय गलती। - फोटो : Adobe Stock
बिना रिश्ते बिगाड़े कैसे कहें ‘न’?
  • कई बार मदद करने की इच्छा होने के बावजूद आर्थिक स्थिति अनुमति नहीं देती। ऐसे में सीधे मना करना असहज लग सकता है। मनोवैज्ञानिक ‘सैंडविच मेथड‘ अपनाने की सलाह देते हैं। इसमें पहले सामने वाले की परेशानी के प्रति सहानुभूति जताई जाती है, फिर अपनी वास्तविक स्थिति बताई जाती है और अंत में कोई वैकल्पिक सुझाव दिया जाता है। उदाहरण के लिए "मुझे तुम्हारी स्थिति का अहसास है, लेकिन इस समय मेरा बजट काफी टाइट है। मैं पूरी रकम नहीं दे पाऊंगी, लेकिन किसी और विकल्प की तलाश में तुम्हारी मदद जरूर कर सकती हूं।"
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जरूरत से ज्यादा आर्थिक मदद बन सकती है आपकी सबसे बड़ी वित्तीय गलती। - फोटो : Adobe Stock
उधार देना पड़े तो अपनाएं स्मार्ट तरीका
  • अगर किसी को पैसा देना जरूरी हो, तो लेन-देन को स्पष्ट और व्यवस्थित रखें। आज कई डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म और वित्तीय टूल्स भुगतान की तारीख और रिमाइंडर सेट करने की सुविधा देते हैं। इससे पैसे लौटाने को लेकर बार-बार याद दिलाने की जरूरत नहीं पड़ती और रिश्तों में भी कड़वाहट आने की संभावना कम हो जाती है।
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जरूरत से ज्यादा आर्थिक मदद बन सकती है आपकी सबसे बड़ी वित्तीय गलती। - फोटो : Adobe Stock
खुद से करें एक जरूरी वादा
  • वित्तीय विशेषज्ञों का एक सरल नियम है- उतना ही पैसा उधार दें, जिसके वापस न मिलने पर आपको आर्थिक या मानसिक नुकसान महसूस न हो। इसे कई सलाहकार ‘फ्री मनी रूल‘ कहते हैं। याद रखें, अपनी बचत, निवेश और भविष्य की सुरक्षा करना स्वार्थ नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। दूसरों की मदद करना अच्छी बात है, लेकिन अपनी आर्थिक स्थिरता की कीमत पर नहीं। मदद करना आपकी अच्छाई है, लेकिन अपनी वित्तीय सीमाएं तय करना आपकी समझदारी।
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