मोनिका अग्रवाल,
दोस्ती, रिश्तेदारी और अपनापन निभाने के चक्कर में कई लोग अपनी जेब पर इतना बोझ डाल लेते हैं कि खुद की आर्थिक स्थिति डगमगा जाती है। किसी की परेशानी देखकर तुरंत पैसे उधार देना या अपनी बचत निकालकर मदद करना इन्सानियत जरूर है, लेकिन अगर यह आदत बार-बार आपके बजट, मानसिक शांति और भविष्य की योजनाओं को प्रभावित कर रही है, तो समय आ गया है कि आप अपनी 'फाइनेंशियल हेल्पिंग बाउंड्री' तय करें। आखिर दूसरों को सहारा देते-देते खुद को आर्थिक संकट में डालना समझदारी नहीं है।