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Senior Citizen Act: अगर बच्चे माता-पिता को घर से निकाल दें, जो जानें बूढ़ें पेरेंट्स के क्या हैं अधिकार

Fri, 12 Jun 2026 08:37 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Rights Of Elderly Parents :अक्सर ऐसे मामले देखने को मिलता हैं जहां कुछ लोग अपने बूढ़े माता-पिता को घर से बाहर निकाल देते हैं। आइए इस लेख में समझते हैं कि वरिष्ठ बुढ़े माता-पिता के पास क्या-क्या अधिकार होते हैं।
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बूढ़े माता-पिता के अधिकार - फोटो : AI
Parents Maintenance Law India: माता-पिता का साया किसी भी बच्चे के जीवन में सबसे बड़ा सुरक्षा कवच होता है। बचपन से लेकर पैरों पर खड़े होने तक, पेरेंट्स अपनी हर खुशी कुर्बान कर बच्चों का भविष्य संवारते हैं। मगर आज के दौर की एक कड़वी और दर्दनाक सच्चाई यह भी है कि कई बच्चे बड़े होकर अपने ही बूढ़े माता-पिता को बोझ समझने लगते हैं। बुढ़ापे में जब उन्हें सबसे ज्यादा सहारे की जरूरत होती है, तब उन्हें अपने ही घर से बेघर या प्रताड़ित कर दिया जाता है।

यह न सिर्फ सामाजिक और नैतिक रूप से अमानवीय है, बल्कि भारतीय कानून में एक गंभीर अपराध भी है। ऐसे लाचार और बेसहारा बुजुर्गों के सम्मान और सुरक्षा के लिए भारत सरकार ने 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007' बनाया है। यह सशक्त कानून बुजुर्गों को समाज में सिर उठाकर जीने की कानूनी ताकत देता है। आइए इस लेख में समझते हैं कि अगर बच्चे माता-पिता को घर से निकाल दें, तो उनके पास कौन से कानूनी अधिकार होते हैं।
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भरण-पोषण और गुजारा भत्ता पाने का हक - फोटो : AdobeStock
भरण-पोषण और गुजारा भत्ता पाने का हक
  • बुजुर्ग माता-पिता अपने बच्चों या उन रिश्तेदारों से (जिन्हें आगे चलकर उनकी संपत्ति मिलनी है) हर महीने गुजारा भत्ता पाने के लिए दावा कर सकते हैं।
  • ट्रिब्यूनल बुजुर्गों की जरूरतों और बच्चों की कमाई के आधार पर हर महीने अधिकतम ₹10,000 या उससे अधिक (संशोधित नियमों के अनुसार) तक की राशि तय कर सकता है।
  • यह कानून सिर्फ सगे माता-पिता ही नहीं, बल्कि सौतेले और गोद लेने वाले माता-पिता को भी समान अधिकार देता है।
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घर और संपत्ति वापस पाने का अधिकार - फोटो : अमर उजाला
घर और संपत्ति वापस पाने का अधिकार
  • इस कानून के तहत वरिष्ठ नागरिक अपने उन बच्चों या रिश्तेदारों को अपने घर से कानूनी रूप से बेदखल कर सकते हैं, जो उनकी देखभाल नहीं करते।
  • अगर माता-पिता ने इस शर्त पर अपनी संपत्ति बच्चों के नाम की थी कि वे बुढ़ापे में सेवा करेंगे, तो सेवा न करने पर कोर्ट उस रजिस्ट्री या गिफ्ट डीड को अमान्य घोषित कर सकता है।
  • माता-पिता द्वारा खुद खरीदी गई संपत्ति पर बच्चों का कोई कानूनी अधिकार नहीं होता, जब तक माता-पिता न चाहें।
 

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शिकायत दर्ज करने की आसान प्रक्रिया - फोटो : AI
शिकायत दर्ज करने की आसान प्रक्रिया
  • बुजुर्गों को कचहरी के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है, वे हर जिले में मौजूद 'मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल' (एसडीएम कोर्ट) में सीधे लिखित शिकायत दे सकते हैं।
  • ट्रिब्यूनल में शिकायत के लिए किसी महंगे वकील की जरूरत नहीं होती, बुजुर्ग खुद या किसी सामाजिक संस्था (NGO) की मदद से अर्जी दे सकते हैं।
  • कानून के मुताबिक ट्रिब्यूनल को शिकायत मिलने के 90 दिनों के भीतर मामले का निपटारा करना होता है, ताकि बुजुर्गों को तुरंत राहत मिले।
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document new - फोटो : Adobe Stock
नियम तोड़ने पर बच्चों को सजा का प्रावधान
  • अगर बच्चे ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद भी माता-पिता को गुजारा भत्ता नहीं देते या उन्हें लावारिस छोड़ देते हैं, तो उन्हें 3 महीने तक की जेल हो सकती है।
  • हर पुलिस स्टेशन में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक नोडल अधिकारी होता है, जो शिकायत मिलते ही तुरंत कानूनी एक्शन लेता है।
  • अगर ट्रिब्यूनल के फैसले से बुजुर्ग संतुष्ट नहीं हैं, तो वे ऊपरी अदालत में इसके खिलाफ अपील भी दायर कर सकते हैं।
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