फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Office Tips: नेट, ग्रॉस या बेसिक सैलरी, इंटरव्यू के समय एचआर से किस पर बात करनी चाहिए?

Sat, 04 Apr 2026 02:36 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Net vs Gross Salary Explained: अक्सर लोग जब इंटरव्यू देने जाते हैं, तो उनके दिमाग में सैलरी से जुड़ी कई तरह के सवाल होते हैं। इसलिए आइए इस लेख में जानते हैं कि सैलरी नेगोशिएशन के समय किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए।
विज्ञापन
1 of 5
इंटरव्यू में सैलरी नेगोशिएशन का सही तरीका - फोटो : Amar Ujala
Net VS Gross Salary Explained: जब भी हम नई नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाते हैं, तो मन में सबसे बड़ा सवाल 'सैलरी' को लेकर होता है। अक्सर लोग पुरानी कंपनी छोड़कर नई जगह जाने की तैयारी तो कर लेते हैं, लेकिन 'सैलरी नेगोशिएशन' के समय उलझ जाते हैं। बहुत से लोगों को नेट, ग्रॉस और बेसिक सैलरी के बीच का अंतर समझ नहीं आता, जिससे वे सही तरीके से अपनी बात नहीं रख पाते। 

ज्यादातर लोगों का पूरा फोकस सिर्फ इस बात पर होता है कि महीने के आखिर में उनके बैंक खाते में कितनी रकम यानी 'इन-हैंड सैलरी' कितनी आएगी। मगर क्या सिर्फ इन-हैंड सैलरी पर बात करना सही है?

आज के नए कॉर्पोरेट माहौल में यह समझना बहुत जरूरी है कि आपके सैलरी का अलग-अलग हिस्सा आपके भविष्य की बचत और टैक्स पर क्या असर डालते हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में सरल भाषा में समझते हैं।
विज्ञापन

2 of 5
सीटीसी और ग्रॉस सैलरी का अंतर - फोटो : freepik
सीटीसी और ग्रॉस सैलरी का गणित
  • सीटीसी (कॉस्ट टू कंपनी)- यह वह कुल पैसा है जो कंपनी आप पर सालभर में खर्च करेगी, इसमें आपका बीमा और पीएफ भी शामिल होता है।
  • ग्रॉस सैलरी - सीटीसी में से कुछ सालाना बोनस और ग्रेच्युटी हटाने के बाद जो रकम बचती है, उसे ग्रॉस सैलरी कहते हैं।
  • ध्यान रखें कि ग्रॉस सैलरी वह पैसा है जिसमें से अभी आपका इनकम टैक्स कटना बाकी होता है।
विज्ञापन

3 of 5
नेट सैलरी को समझें - फोटो : AdobeStock
नेट सैलरी यानी आपके हाथ में आने वाला पैसा
  • ज्यादातर कर्मचारी इसी 'इन-हैंड' रकम को सबसे ज्यादा अहमियत देते हैं, जो सही भी है।
  • ग्रॉस सैलरी में से पीएफ (PF) और टैक्स कटने के बाद जो पैसा आपके अकाउंट में आता है, वही नेट सैलरी है।
  • इंटरव्यू के अंत में एचआर से साफ पूछें कि "सभी कटौतियों के बाद मेरे हाथ में असल में कितना पैसा आएगा?"
  • कई बार भारी-भरकम सीटीसी दिखने के बावजूद, अधिक टैक्स कटने के कारण इन-हैंड सैलरी उम्मीद से कम हो सकती है।

4 of 5
इंटरव्यू में बात करने का सही तरीका - फोटो : freepik
बेसिक सैलरी का गणित समझें
  • बेसिक सैलरी को कभी नजरअंदाज न करें क्योंकि यह आपके रिटायरमेंट के लिए सबसे जरूरी है।
  • आपकी कंपनी आपके पीएफ खाते में कितना पैसा जमा करेगी, यह पूरी तरह आपकी बेसिक सैलरी पर निर्भर करता है।
  • भविष्य में मिलने वाली ग्रेच्युटी और कंपनी का सालाना बोनस भी हमेशा बेसिक पे के आधार पर ही तय होता है।
  • कोशिश करें कि आपकी बेसिक सैलरी कुल वेतन का कम से कम 50% हो, ताकि आपकी लंबी अवधि की बचत मजबूत रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
इंटरव्यू में बात करने का ये है सही तरीका - फोटो : freepik
इंटरव्यू में बात करने का सही तरीका
  • सैलरी की बात करते समय इन बातों का ध्यान रखें ताकि आपको किसी तरह का नुकसान न हो।
  • हमेशा अपनी उम्मीदें 'एनुअल सीटीसी' (सालाना पैकेज) के तौर पर बताएं, क्योंकि कंपनियां इसी भाषा में बात करती हैं।
  • फाइनल हां कहने से पहले सैलरी का पूरा 'ब्रेकअप' मांगें और देखें कि फिक्स सैलरी और वेरिएबल बोनस कितना है।
  • सीटीसी तय होने के बाद अपनी 'इन हैंड सैलरी' को दोबारा कंफर्म करें ताकि बाद में कोई पछतावा न हो।

अस्वीकरण: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और करियर सलाह के लिए है। हर कंपनी का सैलरी स्ट्रक्चर अलग हो सकता है। सटीक वित्तीय सलाह के लिए अपने एचआर विभाग या किसी टैक्स एक्सपर्ट से संपर्क करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें