देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक स्तर पर सशक्त करके उन्हें नई पहचान देने के लिए सरकार एक शानदार योजना का संचालन कर रही है। इसका नाम प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना है। यह योजना खासतौर पर उन लोगों के लिए बनाई गई है जो पीढ़ियों से अपने हुनर के बल पर आजीविका कमाते आए हैं। इनमें बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, दर्जी और अन्य हस्तशिल्प से जुड़े कारीगर और शिल्पकार शामिल हैं। हालांकि, आज के बदलते समय और आधुनिक तकनीक के कारण कई पारंपरिक व्यवसाय पीछे छूटते जा रहे हैं, जिसका बुरा असर इन लोगों की कमाई पर पड़ा है। इसी को देखते हुए भारत सरकार ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को शुरू किया है।