इन तीनों वैज्ञानिकों ने अपने एक्सपेरिमेंट से एक ऐसे टूल को बना दिया है, जिसकी मदद से अब क्वांटम दुनिया को देखा जा सकता है। इनकी खोजों से इलेक्ट्रॉन और दूसरे प्रारंभिक कणों (Elementry Particle) को देखकर उनके व्यवहार के बारे में अब पता किया जा सकता है।
इसके अलावा इस नई खोज से इलेक्ट्रोन को नियंत्रित कर पाना भी अब संभव होगा। अब सवाल है ऐसा हुआ कैसे? आइए समझते हैं इस बारे में विस्तार से -
एटोमिक दुनिया में इलेक्ट्रोन की रफ्तार काफी तेज होती है। ऐसे में लाइट के माध्यम से उसको ऑब्जर्व करना काफी मुश्किल था। इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए इन तीनों वैज्ञानिकों ने लेजर के माध्यम से टाइम के एटोसेकेंड लेवल पर लाइट को ब्रस्ट किया। प्रकाश का यह स्पंदन समय रेखा के मापदंडों पर इतना सूक्ष्म था कि यह एक सेकेंड के करोड़ों फ्रैक्शन के बराबर था। प्रकाश के इस बेहद ही छोटे स्पंदन से इलेक्ट्रॉन के व्यवहार को नियंत्रित करके उसका अध्ययन किया जा सकता है।
क्वांटम दुनिया रहस्यों से भरी है। इन्हीं में सबसे बड़ी पहेली हाइपर डाइमेंशन की है। इसमें यह पता नहीं चलता है कि आखिर कैसे क्वार्क अचानक गायब होकर किसी और डाइमेंशन में चले जाते हैं। आखिर ग्रैविटोन कैसे काम करता है? इस बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। ऐसे में इन तीन वैज्ञानिकों की खोज से इस क्षेत्र में अब काफी कुछ जाना जा सकेगा। यही नहीं आने वाले समय में मेडिकल डायग्नोस्टिक के क्षेत्र में भी इसका बहुत बड़ा उपयोग होने वाला है।