फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rule Change: डिजिटल पेमेंट करने वाले सावधान! आज से नियमों में बड़ा बदलाव, यहां जानें सबकुछ

Wed, 01 Apr 2026 07:13 AM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

New Digital Payment Rules: डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते खतरों को देखते हुए RBI ने डिजिटल पेमेंट के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं, जो आज यानी 1 अप्रैल से प्रभावी होंगे। नए नियमों के अनुसार, अब हर ट्रांजैक्शन के लिए ओटीपी के साथ-साथ पिन, पासवर्ड या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा।
विज्ञापन
1 of 5
आज से बदलेंगे पेमेंट से जुड़े ये नियम - फोटो : Amar Ujala
RBI Guidelines For Online Payments: डिजिटल इंडिया के इस दौर में ऑनलाइन पेमेंट हमारी जीवनशैली का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है, लेकिन बढ़ते साइबर फ्रॉड और वित्तीय धोखाधड़ी को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा फैसला लिया है। आज यानी 1 अप्रैल 2026 से डिजिटल ट्रांजेक्शन के लिए 'टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन' (2-Factor Authentication) के नियम और भी सख्त होने जा रहे हैं। 

अब तक के नियमों के मुताबिक किसी भी ट्रांजेक्शन के लिए सिर्फ ओटीपी की जरूरत पड़ती थी। मगर अब आज से किसी भी ट्राजेक्शन के लिए आपको ओटीपी के साथ-साथ पिन, पासवर्ड, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन या फेस आईडी का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है। यह नियम हर छोटे से बड़े ट्रांजैक्शन पर लागू होगा। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
विज्ञापन

2 of 5
क्या होता है टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन? - फोटो : Adobe Stock
समझें क्या होता है टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA)?
  • सरल शब्दों में समझें तो टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन आपकी डिजिटल तिजोरी पर लगे दो अलग-अलग लॉक की तरह होता है।
  • पहले स्तर पर इसमें वह जानकारी आती है जो सिर्फ आपको पता है, जैसे कि आपका सीक्रेट पिन या पासवर्ड।
  • दूसरे स्तर पर इसमें वह चीज आती है जो आपकी पहचान है, जैसे फिंगरप्रिंट, फेस आईडी या आपके मोबाइल पर आने वाला ओटीपी।
  • अगर किसी को आपका पासवर्ड पता चल जाए, तब भी वह बिना आपके बायोमेट्रिक या फोन के आपका अकाउंट एक्सेस नहीं कर पाएगा।
विज्ञापन

3 of 5
क्या यूपीआई ट्राजेक्शन में ओटीपी लगेगा? - फोटो : Adobe Stock
क्या यूपीआई ट्राजेक्शन में भी लगेगा ओटीपी?

इस नियम के आने के बाद बहुत से लोगों के मन में सवाल है कि क्या अब यूपीआई ट्राजेक्शन में भी ओटीपी की जरूरत होगी। इसका जवाब है नहीं। दरअसल, यूपीआई ट्राजेक्शन पहसे ही टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन पर काम करता है। आपने देखा होगा कि यूपीआई में सिम बाइंडिंग और पिन के जरिए यह सुरक्षा पहले से मौजूद है, लेकिन अब अन्य डिजिटल वॉलेट और पेमेंट गेटवे पर भी इसे सख्ती से लागू किया जाएगा ताकि आपका पैसा हर हाल में सुरक्षित रहे।

4 of 5
साइबर क्राइम - फोटो : Adobe Stock
क्यों पड़ी इन सख्त नियमों की जरूरत?
  • साइबर अपराधियों के बढ़ते जाल को तोड़ने के लिए ये बदलाव किए गए हैं।
  • केवल ओटीपी आधारित सिस्टम में हैकर्स सिम क्लोनिंग के जरिए आपका पैसा निकाल लेते थे, जिसे अब बायोमेट्रिक लेयर रोक देगी।
  • अगर आपका फोन चोरी हो जाता है, तब भी चोर बिना आपकी फेस आईडी या फिंगरप्रिंट के कोई पेमेंट नहीं कर पाएगा।
  • छोटे-बड़े हर ट्रांजेक्शन पर दोहरी जांच होने से डिजिटल बैंकिंग पर आम आदमी का भरोसा और अधिक मजबूत होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
साइबर क्राइम - फोटो : Freepik
डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी पहल

आज के समय में तकनीक जितनी एडवांस हुई है, खतरे भी उतने ही बढ़े हैं, इसलिए आरबीआई का यह कदम आपके वित्तीय भविष्य के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगा। हालांकि शुरुआत में दो बार वेरिफिकेशन करना थोड़ा समय लेने वाला लग सकता है, लेकिन यह आपके अकाउंट को 'हैक-प्रूफ' बनाने की दिशा में सबसे बड़ा सुधार है। जागरूक नागरिक बनें और कभी भी अपना पिन या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें। 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें