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Kangra Toy Train: शुरु हो गई भारत की सबसे लंबी दूरी वाली टॉय ट्रेन, जानें इसका किराया और अन्य डिटेल्स

Tue, 09 Jun 2026 11:20 AM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Indias Longest Toy Train: हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों के बीच से जाने वाली कांगड़ा घाटी टॉय ट्रेन को एक बार फिर शुरु कर दिया गया है। सरकार ने इसकी आधिकारिक सूचना जारी कर दी है। आइए इस लेख में इस ट्रेन का किराया समेत अन्य डिटेल्स जानते हैं।
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कांगड़ा घाटी टॉय ट्रेन - फोटो : AI
Kangra Valley Toy Train: हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों का दीदार कराने वाली ऐतिहासिक कांगड़ा घाटी टॉय ट्रेन एक बार फिर शुरु कर दिया गया है। इस धरोहर का सफर साल 1929 में शुरू हुआ था, जो समय-समय पर कुछ कारणों से रोकना पड़ता है। यह ट्रेन पंजाब के पठानकोट से रवाना होकर हिमाचल के जोगिंदरनगर तक का सफर तय करती है। लगभग 164 किलोमीटर लंबा यह ट्रैक भारत का सबसे लंबा नैरो-गेज रेलवे रूट है, जिसे इसकी बेमिसाल खूबसूरती के कारण यूनेस्को की अस्थायी धरोहर सूची में भी शामिल किया गया है।

सफर के दौरान यह ट्रेन बर्फ से ढकी धौलाधार पर्वत शृखलाओं और हरे-भरे खेतों के बीच से गुजरती है, जो किसी का भी मन मोह लेती है। हालांकि, प्राकृतिक आपदाओं और पुलों की मरम्मत (जैसे चक्की ब्रिज) के चलते वर्तमान में पूरी लाइन पर सेवा आंशिक रूप से प्रभावित है, लेकिन घाटी के कुछ हिस्सों में यह ट्रेन आज भी सुचारू रूप से चल रही है।
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कांगड़ा घाटी टॉय ट्रेन - फोटो : hpkangra.nic.in
164 किलोमीटर लंबा सफर
  • यह टॉय ट्रेन पंजाब के पठानकोट से शुरू होकर हिमाचल प्रदेश के जोगिंद्रनगर तक जाती है। 
  • ब्रिटिश काल में साल 1929 में शुरू हुआ यह रूट हिमाचल के मशहूर मंदिरों (जैसे ज्वालामुखी), पालमपुर के चाय के बागानों और दर्जनों गांवों को आपस में जोड़ता है।
  • शिमला रूट की तरह इसमें बहुत ज्यादा सुरंगें नहीं हैं, बल्कि यह ट्रेन खुले मैदानों, नदियों, झरनों और सरसों के खेतों के बीच से गुजरती है।
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कांगड़ा घाटी टॉय ट्रेन - फोटो : hpkangra.nic.in
कम भीड़ और शांति का अहसास
  • शिमला की टॉय ट्रेन में हमेशा पर्यटकों की भारी भीड़ रहती है, लेकिन कांगड़ा घाटी रूट पर सैलानी बेहद कम होते हैं। 
  • अगर आप शांति से पहाड़ों की खूबसूरती को निहारना चाहते हैं, तो यह सफर आपके लिए सबसे बेस्ट है।
  • सफर के दौरान खिड़की से धौलाधार की बर्फ से ढकी पहाड़ियों का जो नजारा दिखता है, वह कमाल का होता है। इस रूट पर ट्रेन छोटे-बड़े कुल 900 से ज्यादा पुलों को पार करती है।

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कांगड़ा घाटी टॉय ट्रेन - फोटो : hpkangra.nic.in
कितने की है टिकट?
  • इस ऐतिहासिक रेल मार्ग पर पठानकोट से जोगिंदरनगर तक की पूरी यात्रा तय करने में ट्रेन को लगभग 10 घंटे का समय लगता है। 
  • इस सफर के दौरान कुल 33 स्टॉप आते हैं, जिनमें मुख्य रूप से जसूर (नूरपुर रोड), ज्वालामुखी रोड, कांगड़ा, नगरोटा, पालमपुर और बैजनाथ पपरोला जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल हैं। 
  • अगर टिकट और बुकिंग की बात करें, तो स्थानीय ग्रामीणों की सुविधा के लिए रेलवे ने इसका किराया बेहद कम और सब्सिडाइज्ड रखा है, जो मात्र ₹10 से ₹30 तक होता है। 
  • ध्यान रखने वाली बात यह है कि इस नियमित सेवा के लिए कोई ऑनलाइन बुकिंग उपलब्ध नहीं है, यात्रियों को सफर के लिए टिकट सीधे रेलवे स्टेशन के काउंटर से ही खरीदने पड़ते हैं।
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बाकी टॉय ट्रेनों से कैसे अलग है? 
बाकी टॉय ट्रेनों से कैसे अलग है? 
  • भारत में दार्जिलिंग, शिमला और माथेरान की टॉय ट्रेनें काफी मशहूर हैं। वहीं तमिलनाडु की नीलगिरि ट्रेन दांतों वाली पटरी पर चलती है।
  • इन सबके मुकाबले कांगड़ा की ट्रेन ज्यादा लंबी दूरी तय करती है और यह भारत की बची-कुची संकरी पटरी लाइनों में से एक है।
  • रेल मंत्रालय इस रूट को बड़ी पटरी में बदलने के लिए सर्वे करा रहा है, लेकिन फिलहाल यह टॉय ट्रेन अपने पुराने अंदाज में वापस लौट आई है।
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