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Indian Railways: भारत में जल्द दौड़ेगी हाइड्रोजन ट्रेन? जानिए कैसे यह सामान्य ट्रेनों से है अलग

Sat, 26 Jul 2025 05:30 PM IST
संकल्प सिंह यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इसे भविष्य की ट्रेन कहा जा रहा है। इस ट्रेन की खास बात यह है कि इसको चलाने के लिए डीजल और कोयले की जरूरत नहीं होगी। इस ट्रेन में हाइड्रोजन का उपयोग ईंधन के रूप में किया जाएगा।
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Hydrogen Train - फोटो : AdobeStock
भारतीय रेलवे की गिनती दुनिया के बड़े रेल नेटवर्कों में की जाती है। हर रोज भारतीय ट्रेनों में करोड़ों यात्री सफर करते हैं। ये ट्रेनें देश के लगभग हर प्रमुख स्थानों को एक दूसरे से जोड़ने का काम करती हैं। भारतीय रेलवे तेजी से देश में ट्रेनों के आधुनिकीकरण पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में भारतीय रेलवे पारंपरिक डीजल और इलेक्ट्रिक इंजनों से एक कदम आगे बढ़कर देश में हाइड्रोजन ट्रेन को शुरू करने वाला है। इसे भविष्य की ट्रेन कहा जा रहा है। इस ट्रेन की खास बात यह है कि इसको चलाने के लिए डीजल और कोयले की जरूरत नहीं होगी। इस ट्रेन में हाइड्रोजन का उपयोग ईंधन के रूप में किया जाएगा। ये ट्रेनें पर्यावरण अनुकूल हैं। इनको इस्तेमाल में लाए जाने पर प्रदूषण नहीं होगा।
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Hydrogen Train - फोटो : AdobeStock
हाइड्रोजन ईंधन को बनाने के लिए हाइड्रोजन सेल (बैटरी) में ऑक्सीजन के साथ रिएक्शन करके बिजली और पानी को उत्पन्न किया जाता है। हाइड्रोजन गैस दुनिया में सबसे ज्यादा मिलती है। इसे समुद्री जल से भी अलग किया जा सकता है। इसका उपयोग करने पर कार्बन उत्सर्जन नहीं होता है। 
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Hydrogen Train - फोटो : AdobeStock
चेन्नई के इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में देश के पहले हाइड्रोजन चलित कोच का सफल ट्रायल शुक्रवार को हुआ। देश में चलने वाली पहली हाइड्रोजन ट्रेन की रफ्तार करीब 110 किलोमीटर प्रति घंटे होगी। भारतीय रेलवे ने हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज योजना की शुरुआत की है।  

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Hydrogen Train - फोटो : AdobeStock
इसके अंतर्गत 25 फ्यूल सेल वाली हाइड्रोजन चालित ट्रेनों का पहला बैच तैयार किया जाएगा। इस योजना के लिए कुलल 2800 करोड़ का बजट तैयार किया गया है। हाइड्रोजन ट्रेन का इंजन 1200 हॉर्सपावर का होगा। 
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Hydrogen Train - फोटो : AdobeStock
संभावना व्यक्त की जा रही है कि 75 से 80 करोड़ रुपये की लागत में एक हाइड्रोजन ट्रेन को तैयार किया जा सकेगा। हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें करीब 140 किलोमीटर प्रतिघंटे के रफ्तार पर दौड़ सकती हैं। साल 2016 में जर्मन कंपनी अल्सट्राम ने दुनिया की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को चलाया था।
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