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Money Management: सैलरी मिलते ही कर लें ये एक काम, महीने के आखिरी दिनों में नहीं मांगनी पड़ेगी किसी से उधारी

Mon, 24 Aug 2026 09:51 AM IST
दीक्षा पाठक यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला

सार

 Money Management: सैलरी आते ही उसे 50%, 20%, 20% और 10% के चार हिस्सों में बांटने से जरूरी खर्च, बचत, मनोरंजन और इमरजेंसी जरूरतों के लिए पैसा पहले से तय किया जा सकता है।
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महीने के आखिर में खाली हो जाता है अकाउंट? - फोटो : AI
हर महीने सैलरी आने के बाद कुछ दिनों तक लगता है कि इस बार तो पैसे आराम से चल जाएंगे। लेकिन जैसे-जैसे महीने के दिन बीतते हैं, खर्च बढ़ता जाता है और आखिर में अकाउंट बैलेंस देखकर अगली सैलरी का इंतजार शुरू हो जाता है। अगर आपके साथ भी अक्सर ऐसा होता है तो सैलरी को एक साथ खर्च करने के बजाय शुरुआत में ही चार हिस्सों में बांटना मददगार हो सकता है। इस तरीके से जरूरी खर्च के साथ बचत, निवेश और अपनी पसंद की चीजों के लिए भी पैसा तय किया जा सकता है। मान लीजिए किसी व्यक्ति की इन-हैंड सैलरी 50 हजार रुपये है। इसे इस तरह बांटा जा सकता है।
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महीने के आखिर में खाली हो जाता है अकाउंट? - फोटो : Money Spent
25 हजार रुपये जरूरी खर्चों के लिए
सैलरी का करीब 50 फीसदी यानी 25 हजार रुपये उन खर्चों के लिए रखें, जिन्हें टाला नहीं जा सकता। इसमें घर का किराया या होम लोन की EMI, बिजली-पानी का बिल, राशन, आने-जाने का खर्च, मोबाइल-इंटरनेट और दूसरे जरूरी खर्च शामिल हो सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति अलग होती है। ऐसे में किराया या EMI ज्यादा होने पर इस हिस्से को बढ़ाया भी जा सकता है।
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महीने के आखिर में खाली हो जाता है अकाउंट? - फोटो : AdobeStock
10 हजार रुपये पहले ही बचाएं
अगले 20 फीसदी यानी 10 हजार रुपये को बचत और निवेश के लिए अलग कर दें। यह रकम SIP, RD, FD या किसी दूसरे खर्चों के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। यहां सबसे जरूरी बात यह है कि महीने के अंत में बचने वाले पैसे का इंतजार न करें। सैलरी आते ही 10 हजार रुपये अलग खाते में ट्रांसफर करने से बचत की आदत मजबूत हो सकती है।

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महीने के आखिर में खाली हो जाता है अकाउंट? - फोटो : AdobeStock
10 हजार रुपये खुद पर खर्च करें
बजट बनाने का मतलब यह नहीं कि हर पसंद की चीज पर रोक लगा दी जाए। इसलिए 20 फीसदी यानी 10 हजार रुपये अपने व्यक्तिगत और मनोरंजन से जुड़े खर्चों के लिए रखे जा सकते हैं। इससे शॉपिंग, बाहर खाना, मूवी, घूमना या ऑनलाइन ऑर्डर जैसे खर्च बजट के अंदर रहेंगे।
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महीने के आखिर में खाली हो जाता है अकाउंट? - फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी
5 हजार रुपये इमरजेंसी के लिए
बाकी 10 फीसदी यानी 5 हजार रुपये अचानक आने वाले खर्चों के लिए अलग रखें। डॉक्टर की फीस, दवा, बाइक की मरम्मत, घर का जरूरी सामान या अचानक होने वाला यात्रा खर्च इसमें शामिल हो सकता है। अगर किसी महीने यह रकम इस्तेमाल नहीं होती है तो इसे आगे के लिए बचाया जा सकता है। धीरे-धीरे यही पैसा इमरजेंसी फंड का आधार बन सकता है।

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