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सेकेंड-हैंड कार खरीदने से पहले कैसे पता करें कि गाड़ी चोरी की है या नहीं? यहां जानें तरीके

Wed, 02 Sep 2026 07:02 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Second Hand Car Buying Guide India: कई बार ऐसा होता है कि लोग जब सेकेंड हैंड गाड़ी खरीदते हैं तो उनके साथ फ्रॉड हो जाता है। ज्यादातर मामलों में खरीदने वाला बेचने वाले की बातों पर भरोसा करके खरीद लेता है और बाद में पता चलता है कि गाड़ी चोरी की थी। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं कि कैसे चेक करें कि गाड़ी चोरी है या नहीं।
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सेकेंड हैंड कार खरीदने के नियम - फोटो : AI
How To Check Stolen Used Car: आज के समय में नई गाड़ियों के मुकाबले लोग सेकंड-हैंड या पुरानी कार खरीदना ज्यादा पसंद करते हैं, क्योंकि यह बजट में आसानी से मिल जाती हैं। लेकिन पुरानी गाड़ी खरीदते समय सबसे बड़ा और गंभीर जोखिम यह होता है कि कहीं वह गाड़ी चोरी की तो नहीं है या उस पर कोई आपराधिक मामला तो दर्ज नहीं है। कई बार धोखेबाज लोग चोरी की गाड़ियों के नकली कागजात तैयार करके सीधे-साधे खरीदारों को बेच देते हैं, जिससे बाद में असली मालिक या पुलिस के आने पर खरीदार बड़ी कानूनी मुसीबत में फंस सकता है। 

इसलिए कभी भी गाड़ी का सौदा करने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल करना बेहद जरूरी है। आइए इस लेख में जानते हैं कि आप कैसे पता लगा सकते हैं कि कार चोरी की है या नहीं।
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वाहन एप के जरिए ऑनलाइन जांच - फोटो : Adobe Stock
वाहन एप के जरिए ऑनलाइन जांच
  • किसी भी पुरानी कार को खरीदने से पहले सरकार के आधिकारिक 'एमपरिवहन' एप या वेबसाइट का इस्तेमाल जरूर करें। 
  • गाड़ी का नंबर दर्ज करके आप आरसी पर मालिक का असली नाम, गाड़ी का फिटनेस, बीमा और उसकी ब्लैकलिस्टेड स्थिति की पूरी जानकारी आसानी से देख सकते हैं।
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आरसी और चेसिस नंबर का मिलान - फोटो : FREEPIK
आरसी और चेसिस नंबर का मिलान
  • गाड़ी के कागजात में दिए गए चेसिस नंबर और इंजन नंबर का मिलान सीधे कार के अंदर बोनट और दरवाजे पर छपे असली नंबर से जरूर करें। 
  • अगर दस्तावेजों के नंबर और गाड़ी के मेटैलिक पार्ट्स पर खुदे नंबर मेल नहीं खाते हैं, तो समझ जाइए कि मामला संदिग्ध या चोरी का हो सकता है।

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मूल मालिक से दस्तावेजों की पुष्टि - फोटो : Freepik
मूल मालिक से दस्तावेजों की पुष्टि
  • गाड़ी खरीदने से पहले विक्रेता के पहचान पत्र और आरसी पर दिए गए मालिक के नाम की अच्छी तरह से जांच करें।
  • अगर बेचने वाला शख्स आरसी का असली मालिक नहीं है और किसी और के नाम पर कागजात हैं, तो बिना नो-ऑब्जेक्टिव सर्टिफिकेट और ट्रांसफर प्रूफ के गाड़ी बिल्कुल न खरीदें।
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इश्योरेंस और सर्विस रिकॉर्ड की पूरी पड़ताल - फोटो : Freepik
इश्योरेंस और सर्विस रिकॉर्ड की पूरी पड़ताल
  • पुरानी गाड़ी के पिछले साल के बीमा कागजात और सर्विस हिस्ट्री की बारीकी से जांच करें।
  • अगर विक्रेता आपको पिछले रिकॉर्ड, इंश्योरेंस क्लेम या सर्विस बुक दिखाने से कतराता है, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि गाड़ी के कागजात में कोई गंभीर कानूनी झोल या चोरी का मामला छिपा हुआ है।
  • इसलिए कभी भी गाड़ी खरीदते समय ऊपर बताई बातों का हमेशा ध्यान रखें।
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