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Indian Railways: ट्रेन के पहियों को कितने समय के बाद बदल देता है भारतीय रेलवे? जानिए यहां

Thu, 26 Dec 2024 01:29 PM IST
संकल्प सिंह यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

क्या आपने कभी सोचा है कि भारतीय ट्रेनों के पहियों को कितने समय के बाद बदल दिया जाता है? अगर नहीं, तो आज हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं -
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भारतीय रेलवे - फोटो : AdobeStock

भारतीय रेलवे की गिनती दुनिया के बड़े रेल नेटवर्कों में की जाती है। उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम, देश के लगभग हर प्रमुख स्थान को भारतीय रेलवे एक-दूसरे से जोड़ने का काम करता है। ऐसे में देश की कनेक्टिविटी में भारतीय रेलवे की महत्वपूर्ण भूमिका है। देश में भारतीय रेलवे द्वारा हजारों ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इन ट्रेनों में हर रोज लाखों यात्री सफर करते हैं। इसी वजह से इसे देश की लाइफलाइन भी कहा जाता है। भारतीय रेलवे देश में लाखों लोगों की आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन भी है।

हम में से अधिकतर लोग अक्सर भारतीय ट्रेनों में सफर करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भारतीय ट्रेनों के पहियों को कितने समय के बाद बदल दिया जाता है? अगर नहीं, तो आज हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं -

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भारतीय रेलवे - फोटो : AdobeStock

इन पहलुओं पर किया जाता है गौर

ट्रेन के पहिए कितने समय तक चलेंगे, यह इस बात पर निर्भर करता है कि ट्रेन की आवृत्ति (फ्रिक्वेंसी) कितनी है और वह रोजाना कितने किलोमीटर चलती है। यही नहीं, ट्रेन किस प्रकार की जलवायु से गुजरती है और वह कितना वजन लेकर चलती है, यह भी महत्वपूर्ण है।

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भारतीय रेलवे - फोटो : AdobeStock

पैसेंजर ट्रेनें

भारत में जो पैसेंजर ट्रेनें चलती हैं, उनके पहियों को हर 3 से 4 साल में बदल दिया जाता है। इन ट्रेनों के पहिए लगभग 70 हजार से लेकर 1 लाख मील का सफर तय करते हैं।

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भारतीय रेलवे - फोटो : AdobeStock

मालगाड़ी

वहीं मालगाड़ियों के पहिए 8 से 10 साल तक चलते हैं। इन मालगाड़ियों के पहिए ढाई लाख किलोमीटर तक का सफर तय करते हैं। इसके अलावा, ट्रेन के हर पहिए की जांच प्रत्येक 30 दिनों के अंदर की जाती है। अगर इन पहियों में किसी भी प्रकार की कमी पाई जाती है। 

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भारतीय रेलवे - फोटो : AdobeStock
इस स्थिति में उसको तुरंत ठीक किया जाता है या जरूरत पड़ने पर बदल दिया जाता है। अगर समय पर पहियों की जांच न की जाए, तो इससे ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
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