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हेल्थ इंश्योरेंस में रुम रेंट लीमिट क्या है? एडमिट होते समय न करें ये गलती वरना जेब से देना पड़ सकता है बिल

Sun, 06 Sep 2026 07:45 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अक्सर ऐसा होता है कि लोग जब हेल्थ इंश्योरेंस लेते हैं तो उससे जुड़ी कुछ जरूरी चीजें ध्यान से नहीं पढ़ पाते हैं। इसी में एक है रुम रेंट लीमिट। एडमिट होते समय बहुत से लोग रुम रेंट लीमिट का ध्यान नहीं देते हैं, जिससे बाद में उन्हें खुद के जेब से पैसे भरने पड़ते हैं।
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हेल्थ इंश्योरेंस - फोटो : AI
Health Insurance: हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय लोग अक्सर सम इंश्योर्ड, प्रीमियम और अस्पतालों की लिस्ट देखते हैं। मगर बहुत से लोग पॉलिसी में लिखी रूम रेंट लिमिट पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। यह छोटी-सी शर्त अस्पताल में भर्ती होने के समय आपकी जेब पर बड़ा असर डाल सकती है। 

दरअसल, रूम रेंट लिमिट का मतलब है कि बीमा कंपनी अस्पताल के कमरे के किराए के लिए एक तय सीमा तक ही भुगतान करेगी। कुछ पॉलिसियों में यह सीमा नहीं होती, जबकि कुछ में कमरे के किराए पर रोजाना या कमरे की कैटेगरी के हिसाब से सीमा तय होती है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से समझते हैं।
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health insurance new - फोटो : Adobe stock
रूम रेंट लिमिट क्या होती है?
इसका मतलब है कि बीमा कंपनी एक दिन के कमरे के किराए के लिए अधिकतम कितनी रकम देगी। उदाहरण के लिए, पॉलिसी में 5,000 रुपये रोज की सीमा है और आपने इससे महंगा कमरा लिया, तो अतिरिक्त रकम आपको देनी पड़ सकती है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
कमरा महंगा लेने पर सिर्फ किराए का नुकसान नहीं होता
कुछ पॉलिसियों में रूम रेंट लिमिट पार करने पर अस्पताल के कुछ दूसरे खर्चों पर भी प्रोपोर्शनेट डिडक्शन लग सकता है। यानी कमरे की सीमा से ज्यादा खर्च होने पर बीमा कंपनी पूरे अस्पताल बिल का भुगतान नहीं कर सकती।

एक आसान उदाहरण समझिए
मान लीजिए आपकी पॉलिसी में 5,000 रुपये रोज की रूम रेंट लिमिट है, लेकिन आपने 10,000 रुपये रोज का कमरा लिया। अगर आपकी पॉलिसी में प्रोपोर्शनेट डिडक्शन का नियम है, तो कुछ एलिजिबल हॉस्पिटल एक्सपेंस का भुगतान भी उसी अनुपात में कम हो सकता है। हालांकि वास्तविक कटौती पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर करेगी।

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हर हेल्थ इंश्योरेंस में रुम रेंट लीमिट नहीं होती - फोटो : Adobe Stock
हर हेल्थ इंश्योरेंस में रुम रेंट लीमिट नहीं होती
कई पॉलिसियों में कमरे के किराए पर कोई अलग सीमा नहीं होती, जबकि कुछ में रकम या कमरे की कैटेगरी तय होती है। इसलिए पॉलिसी खरीदते समय सिर्फ सम इंश्योर्ड देखकर फैसला न करें। रुम रेंट, आईसीयू चार्जेज, को-पेमेंट और दूसरे सब लीमिट्स भी जरूर देखें।
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अस्पताल में भर्ती होने से पहले क्या करें? - फोटो : Adobe Stock
अस्पताल में भर्ती होने से पहले क्या करें?
भर्ती होने से पहले अपनी पॉलिसी में ईलिजिबल रुम केटैगरी और रुम रेंट लीमिट जरूर चेक करें। अस्पताल के इंश्योरेंस डेस्क से भी पूछें कि चुना गया कमरा आपकी पॉलिसी के तहत कवर है या नहीं। इससे बाद में क्लेम के समय अनचाहा खर्च सामने आने का जोखिम कम हो सकता है।
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