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Health Insurance: अस्पताल में महंगा कमरा लेने से पहले पढ़ लें पॉलिसी के ये नियम, वरना जेब से देना पड़ेगा पैसा

Tue, 23 Jun 2026 02:41 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Room Rent Capping Rules: हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी वाले लोग कई बार हास्पिटल में एडमिट होते समय कुछ नियमों का ध्यान नहीं देते हैं जिसकी वजह से कुछ लोगों को बाद में इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ता है। आइए इस लेख में समझते हैं कि अस्पताल में एडमिट होने से पहले कमरे से जुड़ी किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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हेल्थ इंश्योरेंस रूम रेंट - फोटो : AI
Health Insurance Room Rent: बीमारी की दुखद घड़ी में हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी होना ज्यादातर लोगों के लिए एक वरदान जैसा होता है। बता दें कि अस्पताल में भर्ती होते समय एक छोटी सी लापरवाही आपकी जेब खाली कर सकती है। अक्सर लोग सोचते हैं कि उनके पास बड़ी रकम का बीमा है, तो वे अस्पताल में कोई भी महंगा या लग्जरी कमरा (रेंट रूम) चुन सकते हैं। 

यहीं पर लोग सबसे बड़ी गलती करते हैं। बीमा कंपनियों की पॉलिसी में 'रूम रेंट कैपिंग' यानी कमरे के किराए की एक तय सीमा होती है। अगर आप इस नियम को समझे बिना महंगा कमरा चुनते हैं, तो क्लेम के समय आपको अपनी जेब से भारी रकम चुकानी पड़ सकती है।
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क्या है रूम रेंट कैपिंग का खेल? - फोटो : Adobe stock
क्या है रूम रेंट कैपिंग का खेल?
ज्यादातर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में आमतौर पर कुल सम एश्योर्ड (बीमा राशि) का केवल 1% प्रतिदिन के हिसाब से कमरे के किराए के लिए तय होता है। उदाहरण के लिए, अगर आपकी पॉलिसी 5 लाख रुपये की है, तो आप रोज सिर्फ 5,000 रुपये तक का ही कमरा ले सकते हैं।

अगर आप इससे महंगा कमरा चुनते हैं, तो नियम के मुताबिक अतिरिक्त किराया आपको खुद देना होगा। बता दें कि कुछ पॉलिसी में रुम रेंट के साथ नर्सिंग चार्ज भी जुड़ा होता है, इसलिए अपने पॉलिसी के नियम और शर्तों को अच्छे से पढ़ें और हॉस्पिटल में एडमिट होने से पहले रुम रेंट और नर्सिंग चार्ज के बारे में पूछ लें।
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प्रोपोर्शनेट डिडक्शन से लगता है दोहरा झटका - फोटो : AdobeStock
प्रोपोर्शनेट डिडक्शन से लगता है दोहरा झटका
महंगा कमरा लेने का असर सिर्फ कमरे के किराए तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसे 'प्रोपोर्शनेट डिडक्शन' (आनुपातिक कटौती) कहते हैं। जब आप तय सीमा से महंगा कमरा लेते हैं, तो बीमा कंपनी डॉक्टर की फीस, ऑपरेशन थिएटर का चार्ज, और नर्सिंग चार्ज जैसे अन्य खर्चों में भी उसी अनुपात में कटौती कर देती है। नतीजा यह होता है कि पूरे बिल का एक बड़ा हिस्सा आपको खुद भरना पड़ता है।

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आईसीयू के लिए भी होते हैं अलग नियम - फोटो : Adobe Stock
आईसीयू के लिए भी होते हैं अलग नियम
सामान्य कमरे की तरह ही आईसीयू बेड के किराए के लिए भी सीमा तय होती है। आमतौर पर कंपनियां कुल बीमा राशि का 2% प्रतिदिन आईसीयू के लिए देती हैं। यानी 5 लाख की पॉलिसी पर ₹10,000 प्रतिदिन। गंभीर बीमारी या इमरजेंसी के समय अस्पताल में भर्ती होते समय इस नियम को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए ताकि बाद में क्लेम रिजेक्ट न हो।
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पॉलिसी लेते समय बरतें ये सावधानियां - फोटो : Adobe Stock
पॉलिसी लेते समय बरतें ये सावधानियां
इस मुसीबत से बचने का सबसे आसान तरीका यह है कि पॉलिसी खरीदते समय 'नो रूम रेंट कैपिंग' वाला प्लान चुनें। अगर आपकी पुरानी पॉलिसी में यह लिमिट है, तो अस्पताल में भर्ती होते समय टीटीई या कैशलेस काउंटर पर अपनी पात्रता जरूर जांच लें। हमेशा अपनी लिमिट के दायरे में आने वाला कमरा ही चुनें ताकि आपको पॉलिसी क्लेम करने में कोई परेशानी न हो।
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