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Health Insurance: एडमिट होते ही कितने घंटे के भीतर इंश्योरेंस कंपनी को सूचना देना जरूरी? जानें नियम

Mon, 29 Jun 2026 02:00 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Hospitalization Intimation Time Limit: आज के समय हेल्थ इंश्योरेंस का होना बहुत जरूरी है, क्यों इस मंहगाई में तबियत खराब होने पर सारी सेविंग्स खत्म हो जाती है। मगर कई बार हेल्थ इंश्योरेंस होने के बाद भी कुछ गलती की वजह से लोगों का क्लेम रिजेक्ट हो जाता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं।
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हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम नियम - फोटो : AI
Health Insurance Claim Rejection: आज के समय में हेल्थ इंश्योरेंस होना बेहद जरूरी है, ताकि किसी मेडिकल इमरजेंसी के वक्त पैसों की चिंता न हो। लेकिन कई बार लोग पॉलिसी लेने के बाद भी एक छोटी सी लापरवाही के कारण क्लेम पाने से चूक जाते हैं। अस्पताल में मरीज को भर्ती कराते समय परिवार के लोग घबराहट में होते हैं, जिससे वे बीमा कंपनी को सूचित करना भूल जाते हैं। इंश्योरेंस रेगुलेटर और बीमा कंपनियों के कड़े नियमों के मुताबिक, मरीज के अस्पताल में एडमिट होते ही एक तय समय सीमा के भीतर कंपनी को इसकी आधिकारिक सूचना देना जरूरी है।

अगर आप इस समय सीमा को पार कर जाते हैं, तो इंश्योरेंस कंपनी आपके क्लेम को सीधे रिजेक्ट (खारिज) कर सकती है, जिससे आपको अपनी जेब से पूरा बिल भरना पड़ सकता है। आइए इस लेख में इसी से जुड़े नियमों के बारे में विस्तार से समझते हैं।
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इमरजेंसी में भर्ती होने पर 24 घंटे का नियम - फोटो : Adobe stock
इमरजेंसी में भर्ती होने पर 24 घंटे का नियम
अगर मरीज को अचानक किसी दुर्घटना, दिल का दौरा या गंभीर बीमारी के कारण अचानक आपातकालीन स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है, तो आपको मरीज के एडमिट होने के अगले 24 घंटे के भीतर इंश्योरेंस कंपनी या टीपीए को हर हाल में सूचित करना होगा।
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प्लान्ड हॉस्पिटलाइजेशन के लिए 48 घंटे पहले बताएं - फोटो : Adobe Stock
प्लान्ड हॉस्पिटलाइजेशन के लिए 48 घंटे पहले बताएं
अगर बीमारी ऐसी है जिसके इलाज या सर्जरी की तारीख पहले से तय है (जैसे मोतियाबिंद या पथरी का ऑपरेशन), तो इसे प्लान्ड हॉस्पिटलाइजेशन कहा जाता है। इस स्थिति में आपको अस्पताल में भर्ती होने के कम से कम 48 घंटे पहले बीमा कंपनी को सूचित कर प्री-ऑथराइजेशन फॉर्म भरना होता है।

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कैशलेस और रीइंबर्समेंट दोनों क्लेम के लिए जरूरी - फोटो : Adobe Stock
कैशलेस और रीइंबर्समेंट दोनों क्लेम के लिए जरूरी
चाहे आप टीपीए डेस्क के जरिए कैशलेस (बिना पैसे दिए) इलाज करा रहे हों या बाद में बिल पास कराने वाला रीइंबर्समेंट क्लेम चुन रहे हों, दोनों ही सूरतों में तय समय सीमा में सूचना देना जरूरी है। देरी होने पर कंपनी इलाज के शुरुआती खर्चों का क्लेम देने से पूरी तरह मना कर सकती है।
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सूचना देने का सबसे आसान तरीका - फोटो : Adobe Stock
सूचना देने का सबसे आसान तरीका
इंश्योरेंस कंपनी को सूचित करने के लिए आप उनके ऑफिशियल टोल-फ्री कस्टमर केयर नंबर पर कॉल कर सकते हैं, कंपनी के मोबाइल एप पर जाकर 'इंटिमेट क्लेम' विकल्प चुन सकते हैं, या अस्पताल के इंश्योरेंस डेस्क पर मौजूद अधिकारी से तुरंत क्लेम इंटिमेशन फॉर्म भरने के लिए कह सकते हैं।
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