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मेडिकल क्लेम: हेल्थ इंश्योरेंस में क्या है कैशलेस और रीइंबर्समेंट क्लेम? जानें दोनों में क्या है बड़ा अंतर

Mon, 07 Sep 2026 05:27 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम के समय लोगों के सामने सबसे पहले दो विकल्प आता है, पहला कैशलेस क्लेम और दूसरा रीइंबर्समेंट क्लेम। अक्सर लोग इन दोनों को लेकर काफी कंफ्यूज रहते हैं। इसलिए आइए इस लेख में इन दोनों के अंतर को समझते हैं।
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हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम - फोटो : AI
Health Insurance Claim Process: बीमारी या आपातकालीन स्थिति में हेल्थ इंश्योरेंस होना बड़े वित्तीय संकट से बचाता है। जब लोग असप्ताल में भर्ती होने जाते हैं तो उनके सामने क्लेम के लिए दो तरीके देखने को मिलते हैं, एक कैशलेस और दूसरा रीइंबर्समेंट। अक्सर लोग इन दोनों के बीच के अंतर को लेकर असमंजस में रहते हैं, जिससे ऐन मौके पर परेशानी का सामना करना पड़ता है। 

कैशलेस क्लेम में मरीज को अपनी जेब से भुगतान नहीं करना पड़ता, जबकि रीइंबर्समेंट में पहले खुद बिल भरना होता है। आइए इस लेख में समझते हैं कि कैशलेस और रीइंबर्समेंट क्लेम में क्या मुख्य अंतर हैं और कौन सा तरीका ज्यादा सुविधाजनक है।
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अस्पताल का चुनाव और नेटवर्क का अंतर - फोटो : Freepik.com
अस्पताल का चुनाव और नेटवर्क का अंतर
  • कैशलेस क्लेम वो सुविधा होती है जिसमें मरीज के इलाज का पूरा पैसा सीधे बीमा कंपनी ही भूगतान करती है। 
  • बीमा कंपनी के नेटवर्क अस्पताल होते हैं, वहां आसानी से कैशलेस क्लेम की सुविधा होती है।
  • रीइंबर्समेंट क्लेम की बात करें तो इसमें पहले मरीज अस्पताल में एडमिट होता है, और अपनी इलाज करता है, और उसका भुगतान खुद करता है।
  • इसके बाद वो भुगतान हुआ पैसा बीमा कंपनी को दिखाता है, जिसके बाद सभी दस्तावेज चेक करने बीमा कंपनी मरीज के खाते पैसे भेजती है।
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भुगतान की प्रक्रिया - फोटो : AdobeStock
भुगतान की प्रक्रिया
  • अब जैसा हमने देखा कि कैशलेस क्लेम में बीमा कंपनी सीधे अस्पताल के बिल का भुगतान कर देती है, इसलिए इसमें मरीज को पैसे नहीं देने पड़ते।
  • रीइंबर्समेंट क्लेम में मरीज को इलाज का पूरा खर्च पहले खुद उठाना पड़ता है, जो बाद में बीमा कंपनी रिफंड करती है।
  • यही वजह है कि लोग उन्हीं अस्पताल को चुनते हैं जिसमें हेल्थ इंशयोरेंस का नेटवर्क अस्पताल हो।

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कागजी कार्रवाई और समय की बचत - फोटो : Adobe Stock
कागजी कार्रवाई और समय की बचत
  • कैशलेस प्रक्रिया में ये समझना जरूरी है कि हर अस्पताल में एक टीपीए होता है, जो डेस्क बीमा कंपनी से मंजूरी लेकर कागजी काम संभालता है।
  • रीइंबर्समेंट में डिस्चार्ज के बाद सभी ओरिजिनल बिल, पर्चे और रिपोर्ट बीमा कंपनी में जमा कराने पड़ते हैं।
  • रीइंबर्समेंट में पैसे बैंक खाते में आने में 15 से 30 दिनों का समय लग सकता है।
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सही विकल्प का चुनाव कैसे करें? - फोटो : Adobe Stock
सही विकल्प का चुनाव कैसे करें?
  • अगर अस्पताल भर्ती होना पहले से तय है, तो नेटवर्क अस्पताल में कैशलेस क्लेम ही चुनें, इससे आपका काम काफी आसान हो जाएगा।
  • पास में नेटवर्क अस्पताल न होने पर आप किसी भी अस्पताल में इलाज कराएं और बाद में बीमा कंपनी में रीइंबर्समेंट फाइल करें।
  • रीइंबर्समेंट क्लेम के लिए अस्पताल की हर रसीद और डॉक्टर का पर्चा सुरक्षित रखना अनिवार्य होता है।
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