अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन से जुड़े कई विवाद सामने निकलकर आते रहते हैं। इसके अलावा समय समय पर ऐसे मामले भी सामने आते रहते हैं, जिनमें दबंगों द्वारा छोटे किसानों की जमीनों को हड़प लिया जाता है। ऐसे में इन घटनाओं को कम करने के लिए सरकार एक बेहद ही खास सिस्टम पर काम कर रही है। राजस्व परिषद की एक नई पहल के अंतर्गत अब जमीनों को रियल टाइम में अपडेट किया जा सकेगा। ऐसे में अब इसको हर 6 सालों में अपडेट करने की जरूरत नहीं होगी। इसको लेकर एक खास सॉफ्टवेयर को तैयार किया जा रहा है। नेशनल इंफोर्मेटिक्स द्वारा राजस्व परिषद के लिए एक बेहद ही खास सॉफ्टवेयर को बनाया जा रहा है। इस सॉफ्टवेयर की मदद से खतौनी को तुरंत अपडेट किया जा सकेगा। ऐसे में इससे जमीनों के मालिकाना हक को लेकर होने वाली धोखाधड़ी कम हो जाएगी। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से -
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गौरतलब बात है कि अभी इसको पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के लिए गाजीपुर सदर, सीतापुर की महोली, बाराबंकी का सिरौली, गौसपुर, लखनऊ में मोहनलालगंज और शामली के सदर तहशील को शामिल किया गया है।
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देश में कई लोग ऐसे हैं, जो खतौनी के बारे में नहीं जानते हैं। अगर आप भी इसके बारे में नहीं जानते हैं। ऐसे में आपको बता दें कि खतौनी एक प्रकार का भूमि अभिलेख होता है।
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इसे आप कानूनी दस्तावेज के रूप में भी मान सकते हैं। खतौनी में जमीन से जुड़ी जरूरी डिटेल्स शामिल होती है। व्यक्ति की मृत्यु होने पर या जमीन को बेचने पर इसको, उसके वारिश या खरीदार को स्थानांतरण किया जाता है।
जमीन से जुड़ी महत्वपूर्ण डिटेल्स खतौनी के 7 से लेकर 12वें कॉलम में फिल किए जाते हैं। इसको पुराने सॉफ्टवेयर में ढूंढना काफी मुश्किल काम था। ऐसे में विकसित किए जा रहे नए सॉफ्टवेयर के आने से किसानों को काफी फायदा होगा।