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EV Insurance: इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इंश्योरेंस क्यों महंगा होता है? जानें इससे जुड़े सभी जरूरी सवालों के जवाब

Sun, 19 Jul 2026 01:22 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Electric Vehicle Premium India: अक्सर बाजारों में ये देखने को मिलता है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों का बीमा बहुत महंगा होता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं कि ऐसा क्यों होता है, और इसके पीछे का क्या कारण है?
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इलेक्ट्रिक वाहन बीमा नियम - फोटो : AI
Why EV Insurance Expensive?: आजकल सड़कों पर इलेक्ट्रिक गाड़ियां काफी तेजी से बढ़ती हुई दिख रही हैं, क्योंकि इन्हें चलाने का खर्च पेट्रोल-डीजल के मुकाबले बेहद कम आता है। पर्यावरण के लिए बेहतर होने के कारण लोग इन्हें खूब पसंद भी कर रहे हैं। मगर जब बात इन गाड़ियों का बीमा करवाने की आती है, तो बहुत से लोग हैरान रह जाते हैं।

दरअसल, पेट्रोल या डीजल कारों की तुलना में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इंश्योरेंस प्रीमियम करीब 20 से 40% तक ज्यादा महंगा होता है। एक आम इंसान के लिए इस भारी-भरकम खर्च की वजह समझना बेहद जरूरी है। आइए इस लेख में इसी बारे में जानते हैं कि आखिर ईवी का बीमा इतना महंगा क्यों होता है और इसके पीछे क्या नियम हैं।
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ev charging - फोटो : Adobe Stock
सबसे बड़ी वजह है इसकी महंगी बैटरी
किसी भी इलेक्ट्रिक कार की कुल कीमत का लगभग 40 से 60% हिस्सा सिर्फ उसकी लिथियम-आयन बैटरी का होता है। अगर किसी छोटी सी दुर्घटना या बाढ़ के पानी की वजह से गाड़ी की बैटरी खराब हो जाती है, तो उसे ठीक करना नामुमकिन होता है और पूरी बैटरी बदलनी पड़ती है। चूंकि नया बैटरी पैक एक से पांच लाख रुपये से ज्यादा का आता है, इसलिए बीमा कंपनियां इस भारी नुकसान के जोखिम को देखते हुए पहले से ही प्रीमियम का दाम बढ़ा कर रखती हैं।
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EV Charging Stations - फोटो : Freepik
एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और महंगे पुर्जे
सामान्य कारों के मुकाबले इलेक्ट्रिक गाड़ियों में बहुत ज्यादा आधुनिक तकनीक, कंप्यूटर चिप्स और एडवांस्ड सेंसर्स (जैसे ADAS कैमरे) लगे होते हैं, जो अक्सर गाड़ी के बंपर या आगे वाले हिस्से में फिट रहते हैं। एक मामूली टक्कर में भी ये कीमती सेंसर्स पूरी तरह टूट जाते हैं और इन्हें दोबारा लगाने और सेट करने में बहुत ज्यादा खर्चा आता है। इन महंगे और ज्यादातर बाहर से इंपोर्ट (आयात) होने वाले स्पेयर पार्ट्स की वजह से क्लेम की रकम बहुत बड़ी हो जाती है।

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देशभर में लगेंगे 72,000 चार्जिंग स्टेशन - फोटो : AI
विशेषज्ञ मैकेनिकों और गैरेज की कमी
पेट्रोल-डीजल गाड़ियों को तो आप गली-मोहल्ले के किसी भी आम मैकेनिक के पास ले जाकर ठीक करवा सकते हैं, लेकिन हाई-वोल्टेज सिस्टम वाली इलेक्ट्रिक कार को ठीक करने के लिए खास ट्रेनिंग वाले सर्टिफाइड टेक्नीशियनों की जरूरत होती है। वर्तमान में भारत में ऐसे गिने-चुने गैरेज और आधिकारिक सर्विस सेंटर ही उपलब्ध हैं। इस वजह से गाड़ियों की मरम्मत का लेबर चार्ज बहुत ज्यादा लगता है, जिसे बीमा कंपनियों को ही चुकाना पड़ता है।
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ev charging - फोटो : Adobe Stock
बीमा करवाते समय आम इंसान इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीद रहे हैं, तो सिर्फ बेसिक थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेने की गलती बिल्कुल न करें, क्योंकि वह आपकी खुद की गाड़ी या बैटरी के नुकसान को कवर नहीं करता है। आपको हमेशा एक कॉम्प्रीहेंसिव बीमा पॉलिसी ही चुननी चाहिए। इसके साथ ही, अपनी महंगी बैटरी को सुरक्षित रखने के लिए 'बैटरी प्रोटेक्शन' और 'जीरो डेप्रिसिएशन' कवर जरूर लें, ताकि किसी भी हादसे के समय आपकी जेब से एक भी रुपया खर्च न हो।
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