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ऑफर लेटर में सिर्फ CTC देखकर न हों खुश! जानिए बेसिक सैलरी और ग्रॉस सैलरी के बीच का असली अंतर

Wed, 21 Oct 2026 02:33 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Basic Salary Meaning Explained: अक्सर जब लोग नई नौकरी के लिए अप्लाई करते हैं, और जब ऑफर लेटर आता है तो उसे देखकर काफी खुश होते हैं। मगर ऑफर लेटर पर आमतौर पर सिर्फ सीटीसी ही दर्ज होता है। ऐसे में बहुत से लोग सीटीसी और इन हैंड सैलरी के बीच का अंतर नहीं समझ पाते हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से समझते हैं।
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सीटीसी और टेक होम सैलरी - फोटो : AI
CTC vs In Hand Salary: जब भी किसी नई नौकरी का ऑफर लेटर मिलता है, तो उसमें लिखी बड़ी सीटीसी देखकर हर कोई खुश हो जाता है। लेकिन महीने के अंत में जब खाते में वास्तविक वेतन यानी इन-हैंड सैलरी आती है, तो वह सीटीसी से काफी कम होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लोग अक्सर सीटीसी, बेसिक सैलरी और ग्रॉस सैलरी के बीच के अंतर को सही से नहीं समझते हैं।

सीटीसी कंपनी द्वारा आपके ऊपर खर्च की जाने वाली कुल सालाना राशि होती है, जिसमें पीएफ, ग्रेच्युटी और अन्य भत्ते शामिल होते हैं। वहीं ग्रॉस सैलरी और इन-हैंड सैलरी पूरी तरह अलग होती हैं। आइए इस लेख में समझते हैं कि आपकी सैलरी का यह पूरा गणित वास्तव में कैसे काम करता है।
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क्या होती है सीटीसी और इसमें क्या-क्या शामिल होता है? - फोटो : AdobeStock
क्या होती है सीटीसी और इसमें क्या-क्या शामिल होता है?
  • सीटीसी का मतलब 'कॉस्ट टू कंपनी' होता है, जो कंपनी आपके ऊपर सालाना खर्च करती है। 
  • इसमें आपकी मिलने वाली सैलरी के अलावा पीएफ, ग्रेच्युटी, मेडिकल इंश्योरेंस और कंपनी द्वारा दी जाने वाली अन्य सुविधाएं भी जुड़ी होती हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
बेसिक सैलरी का क्या है महत्व?
  • बेसिक सैलरी आपकी कुल तनख्वाह का सबसे मुख्य और स्थिर हिस्सा होती है। यह आमतौर पर आपकी सीटीसी का 40 से 50 प्रतिशत होती है। 
  • आपके पीएफ, ग्रेच्युटी और बोनस का हिसाब इसी बेसिक सैलरी के आधार पर तय किया जाता है।

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ग्रॉस सैलरी और बेसिक में क्या अंतर है? - फोटो : AdobeStock
ग्रॉस सैलरी और बेसिक में क्या अंतर है?
  • जब आपकी बेसिक सैलरी में मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता (LTA) और अन्य विशेष भत्तों को जोड़ दिया जाता है, तो वह ग्रॉस सैलरी बनती है।
  • इसमें से किसी तरह की पीएफ या टैक्स की कटौती नहीं की जाती है।
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खाते में आने वाली इन-हैंड सैलरी कैसे बनती है? - फोटो : AdobeStock
खाते में आने वाली इन-हैंड सैलरी कैसे बनती है?
  • आपकी ग्रॉस सैलरी में से जब पीएफ, प्रोफेशनल टैक्स और टीडीएस जैसी जरूरी कटौतियां कर ली जाती हैं, तो बचा हुआ पैसा आपके बैंक खाते में आता है। 
  • इसी को टेक-होम या इन-हैंड सैलरी कहते हैं, और सरल करके समझें तो जितना पैसा आपके खाते में सैलरी के तौर पर क्रेडिट होता है उसे इन हैंड सैलरी कहते हैं।
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