ISI Mark Significance: बहुत से लोग हेलमेट को सालों-साल तक इस्तेमाल करते हैं, आपको बता दें कि किसी भी हेलमेट को इस्तेमाल करने की एक समय सीमा होती है। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं।
Helmet Material Degradation: सड़क सुरक्षा के लिए हेलमेट सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके हेलमेट की भी एक 'एक्सपायरी डेट' होती है? अक्सर लोग एक ही हेलमेट को सालों-साल इस्तेमाल करते रहते हैं, यह सोचकर कि जब तक वह टूटा नहीं है, वह सुरक्षित है।
हकीकत में, हेलमेट बनाने में इस्तेमाल होने वाले मैटेरियल जैसे ईपीएस फोम और बाहरी शेल समय के साथ धूप, पसीने और प्रदूषण के कारण अपनी मजबूती खोने लगते हैं। एक पुराना हेलमेट दुर्घटना के समय आपके सिर को वह सुरक्षा नहीं दे पाता जिसकी आपको जरूरत होती है, इसलिए इसकी समय सीमा जानना बेहद जरूरी है। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं।
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कब बदल लेना चाहिए अपना हेलमेट?
- फोटो : Adobe Stock
हेलमेट की लाइफ और एक्सपायरी के नियम
आमतौर पर एक अच्छे हेलमेट की उम्र उसके निर्माण की तारीख से 3 से 5 साल तक मानी जाती है।
हेलमेट के अंदर लगा सुरक्षात्मक पैड और फोम समय के साथ सख्त हो जाता है और झटके सोखने की क्षमता खो देता है।
लगातार धूप में रहने और पसीने की नमी से हेलमेट का भीतरी हिस्सा कमजोर होने लगता है।
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कब बदल लेना चाहिए अपना हेलमेट?
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कब बदल देना चाहिए अपना हेलमेट?
अगर आपका हेलमेट एक बार भी ऊंचाई से गिरा है या दुर्घटना का शिकार हुआ है, तो उसे तुरंत बदल दें।
अगर हेलमेट पहनते समय वह सिर पर ढीला महसूस हो या उसकी स्ट्रैप (पट्टा) खराब हो गई हो।
बाहरी शेल पर छोटी सी भी दरार सुरक्षा के लिहाज से बहुत खतरनाक साबित हो सकती है।
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ISI मार्क और सुरक्षा मानक
हमेशा वही हेलमेट खरीदें जिस पर असली ISI मार्क हो, क्योंकि यह भारतीय सुरक्षा मानकों पर खरा उतरता है।
सस्ते और बिना मानक वाले हेलमेट केवल चालान से बचा सकते हैं, जान से नहीं।
हेलमेट खरीदते समय उसके अंदर लगी स्टिकर पर निर्माण की तारीख जरूर चेक करें।