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Direct vs Regular Mutual Fund: डायरेक्ट और रेगुलर म्यूचुअल फंड में क्या अंतर है? यहां दूर करें कंफ्यूजन

Fri, 21 Aug 2026 08:16 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Basic Different Between Direct vs Regular Mutual Fund: आज के समय में बहुत से लोग म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। मगर कई ऐसे लोग भी हैं जो जानकारी के आभाव में इसमें पैसा लगाने से बचते हैं। ऐसे ही लोगों के मन में ये एक बड़ा सवाल ये होता है कि म्यूचुअल फंड का प्लान किसी एजेंट से लेना चाहिए या डायरेक्ट निवेश करना चाहिए। आइए इस लेख में यही समझते हैं।
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मोबाइल में वीओएलटीई क्या है? - फोटो : AI
Direct vs Regular Mutual Fund: म्यूचुअल फंड में निवेश करना अब बहुत आसान हो गया है, लेकिन सही प्लान चुनना आज भी कई लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती है। जब भी लोग किसी स्कीम में पैसा लगाते हैं, तो उनके सामने 'डायरेक्ट' और 'रेगुलर' म्यूचुअल फंड नाम के दो विकल्प मिलते हैं। अगर को निवेशक नया तो उन्हें इन दोनों शब्दो को लेकर काफी कंफ्यूजन रहता है।

इन दोनों के बीच का अंतर सिर्फ नाम का नहीं होता, बल्कि आपके मिलने वाले रिटर्न और मुनाफे का भी होता है। अगर आप अपने पैसे से ज्यादा से ज्यादा कमाई करना चाहते हैं, तो इन दोनों प्लान्स के फर्क को समझना बेहद जरूरी है।
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कमीशन और बिचौलियों का अंतर - फोटो : अमर उजाला
कमीशन और बिचौलियों का अंतर
  • रेगुलर प्लान में आप किसी ब्रोकर, एजेंट या डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं, जहां फंड कंपनी एजेंट को कमीशन देती है।
  • डायरेक्ट प्लान में आप बिना किसी बिचौलिए या एजेंट के सीधे म्यूचुअल फंड कंपनी या उसकी वेबसाइट/एप के माध्यम से निवेश करते हैं।
  • रेगुलर प्लान में ब्रोकर को दिए जाने वाले कमीशन का खर्च अंततः निवेशक की जेब से ही काटा जाता है, जबकि डायरेक्ट में ऐसा कोई कमीशन नहीं होता।
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एक्सपेंस रेशियो और मैनेजमेंट फीस - फोटो : अमर उजाला
एक्सपेंस रेशियो और मैनेजमेंट फीस
  • किसी भी म्यूचुअल फंड स्कीम को चलाने और मैनेज करने के लिए फंड हाउस जो सालाना फीस वसूलता है, उसे 'एक्सपेंस रेशियो' कहते हैं।
  • रेगुलर म्यूचुअल फंड का एक्सपेंस रेशियो डायरेक्ट फंड की तुलना में ज्यादा होता है क्योंकि इसमें डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन भी शामिल होता है।
  • डायरेक्ट प्लान में कोई एजेंट न होने के कारण इसका एक्सपेंस रेशियो काफी कम होता है, जिससे निवेशक के पैसे की बचत होती है।

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रिटर्न और NAV में अंतर - फोटो : AdobeStock
रिटर्न और NAV में अंतर
  • कम एक्सपेंस रेशियो होने की वजह से डायरेक्ट म्यूचुअल फंड का रिटर्न रेगुलर प्लान के मुकाबले हमेशा 0.5% से 1.5% तक अधिक होता है।
  • डायरेक्ट प्लान की एनएवी (नेट एसेट वैल्यू) रेगुलर प्लान की एनएवी से थोड़ी ज्यादा होती है।
  • लंबे समय यानी 10 से 15 साल की अवधि में यह छोटा सा 1% का अंतर कम्पाउंडिंग की ताकत से लाखों रुपये का बड़ा मुनाफा बन जाता है।
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आपके लिए कौन-सा प्लान बेहतर है - फोटो : AdobeStock
आपके लिए कौन-सा प्लान बेहतर है
  • अगर आपको म्यूचुअल फंड बाजार की अच्छी समझ है और आप खुद रिसर्च करके फंड चुन सकते हैं, तो आप 'डायरेक्ट प्लान' ले सकते हैं।
  • वहीं अगर आप बिल्कुल नए निवेशक हैं और आपको मार्केट की समझ नहीं है, तो किसी एक्सपर्ट या वित्तीय सलाहकार की मदद से 'रेगुलर प्लान' लेना बेहतर हो सकता है।
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