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Digital Will: डिजिटल वसीयत क्या होता है? जानें पारंपरिक वसीयत से कितना अलग है ये ऑनलाइन विल

Mon, 06 Jul 2026 06:17 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Digital Will Meaning India: आज के समय में डिजिटल वसीयत शब्द आपके कई जगह पर सुनने को मिल जाएगा, लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि बहुत से लोग इसका सही मतलब नहीं समझ पाते हैं। बता दें कि डिजिटल वसीयत का महत्व पारंपरिक वसीयत से बहुत अलग है और इन दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है।
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डिजिटल वसीयत क्या है? - फोटो : AI
Difference Between Will And Digital Will: आज के इस आधुनिक डिजिटल दौर में जब हमारा पैसा, बैंक खाते और कीमती यादें सब कुछ ऑनलाइन (डिजिटल) रूप में सिमट चुकी हैं। ऐसे में आज के समय में बहुत से लोगों के दिमाग में 'डिजिटल वसीहत' के बारे में सुनने को मिल रहा है। ऐसे में बहुत से लोग पारंपरिक वसीयत और डिजिटल वसीयत में अंतर नहीं समझ पाते हैं और कंफ्यूज हो जाते हैं। बता दें कि पारंपरिक वसीयत और डिजिटल वसीयत में जमीन और आसमान का अंतर है।

बहुत से लोग डिजिटल वसीयत का मतलब ये समझ लेते हैं कि अब ऑनलाइन भी संपत्तियों का वसीयत बनाया जाता है, मगर ये जानकारी भ्रामक है। असल में  डिजिटल वसीयत का मतलब अपनी ऑनलाइन संपत्तियों और सोशल मीडिया खातों का मालिकाना हक किसी भरोसेमंद व्यक्ति को सौंपना होता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में और विस्तार से समझते हैं कि इन दोनों वसीयत में क्या अंतर है।
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क्या होती है डिजिटल वसीयत और इसके मायने? - फोटो : Adobe Stock
क्या होती है डिजिटल वसीयत और इसके मायने?
डिजिटल वसीयत एक ऐसा कानूनी दस्तावेज होता है, जिसे आप कंप्यूटर या मोबाइल की मदद से ऑनलाइन तैयार करते हैं। इसके जरिए आप यह तय करते हैं कि आपके जाने के बाद आपके डिजिटल एसेट्स (जैसे क्रिप्टो करेंसी, बैंक के ऑनलाइन खाते, म्यूचुअल फंड, ईमेल आईडी, फोटो गैलरी और फेसबुक-यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया अकाउंट्स) का मैनेजमेंट या मालिकाना हक किसे दिया जाए। ध्यान रखें बैंक के खाते में जो पैसे हैं वो उसे ही मिलते हैं, खाताधारक जिसे नॉमिनी बनाता है।
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पारंपरिक वसीयत से यह कितनी अलग है? - फोटो : Adobe Stock
पारंपरिक वसीयत से यह कितनी अलग है?
पुरानी पारंपरिक वसीयत एक मजबूत कानूनी दस्तावेज है जो स्टांप पेपर पर हाथ से या टाइप करके लिखी जाती है, जिसमें मुख्य रूप से मकान, दुकान, सोना या नकद पैसों जैसी भौतिक संपत्तियों का बंटवारा होता है, और इसे रजिस्ट्री कराना होता है। इसके उलट, डिजिटल वसीयत में किसी रजिस्ट्री या गवाह के जरूरत नहीं होती है।

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भारत में डिजिटल वसीयत की कानूनी मान्यता कितनी है? - फोटो : Adobe Stock
भारत में डिजिटल वसीयत की कानूनी मान्यता कितनी है?
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत भारत में पूरी तरह से केवल 'इलेक्ट्रॉनिक या ऑनलाइन' बनाई गई वसीयत को पूरी कानूनी मान्यता नहीं दी गई है। वसीयत को कानूनन पक्का और मजबूत बनाने के लिए आपको ऑनलाइन तैयार किए गए उस ड्राफ्ट का प्रिंट आउट निकालना होगा, फिर उस पर दो गवाहों के सामने अपने दस्तखत (साइन) करने होंगे, तभी कोर्ट उसे वैध मानेगा।
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डिजिटल वसीयत बनाने का तरीका (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Freepik
डिजिटल वसीयत बनाने का तरीका
इसे बनाने के लिए आप किसी विश्वसनीय ऑनलाइन 'विल मेकिंग' पोर्टल की मदद ले सकते हैं या खुद वर्ड फाइल पर लिखकर उसका प्रिंट ले सकते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि इसमें अपने सभी जरूरी डिजिटल खातों के यूजरनेम लिखें, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से पासवर्ड कभी न लिखें। पासवर्ड की जगह आप यह लिख सकते हैं कि आपके जाने के बाद नॉमिनी को पासवर्ड कैसे और किस तिजोरी से मिलेंगे।
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