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Indian Railways: क्या आप भी करंट और तत्काल टिकट को एक ही समझते हैं? यहां दूर कर लें कंफ्यूजन

Mon, 20 Jul 2026 08:05 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Indian Railways Booking Rules: भारतीय रेल में कुछ रुट पर कंफर्म टिकट लेना अपने आप में काफी चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में बहुत से लोगों करंट में या तत्काल में टिकट लेना पड़ता है। मगर कुछ लोगों को करंट और तत्काल को एक ही समझ लेते हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं।
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करंट टिकट और तत्काल में अंतर - फोटो : AI
Current Ticket vs Tatkal Ticket: भारतीय रेलवे से यात्रा करते समय अचानक या इमरजेंसी में सफर करने की जरूरत किसी को भी पड़ सकती है। जब सामान्य रिजर्वेशन की सभी सीटें फुल हो जाती हैं, तो यात्रियों के सामने दो मुख्य विकल्प आते हैं- तत्काल टिकट और करंट टिकट। हालांकि, एक आम इंसान अक्सर इन दोनों के बीच के बड़े अंतर को नहीं समझ पाता और असमंजस में रहता है कि कौन सा टिकट कब और कैसे बुक करना चाहिए। 

आपको बता दें कि ये दोनों टिकट पूरी तरह अलग नियमों और अलग समय पर मिलते हैं। आइए इस लेख में समझते हैं कि करंट और तत्काल टिकट में क्या अंतर है, ताकि अगली बार सफर करते समय आपको कोई परेशानी न हो।
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बुकिंग का समय और टाइमिंग में है बड़ा अंतर - फोटो : Adobe Stock
बुकिंग का समय और टाइमिंग में है बड़ा अंतर
तत्काल टिकट यात्रा की तारीख से ठीक एक दिन पहले बुक किया जाता है, जिसके तहत एसी क्लास की बुकिंग सुबह 10 बजे और नॉन-एसी की सुबह 11 बजे शुरू होती है। इसके विपरीत, करंट टिकट ट्रेन छूटने के महज कुछ घंटे पहले मिलता है। जब ट्रेन का पहला रिजर्वेशन चार्ट तैयार हो जाता है (आमतौर पर ट्रेन खुलने से 4 घंटे पहले), तब बची हुई खाली सीटों को करंट टिकट के रूप में बेचा जाता है।
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टिकट की कीमत और एक्स्ट्रा चार्ज का खेल - फोटो : Adobe Stock
टिकट की कीमत और एक्स्ट्रा चार्ज का खेल
तत्काल टिकट बुक करते समय आपको सामान्य किराए के ऊपर 100 रुपये से लेकर 500 रुपये तक का अतिरिक्त तत्काल शुल्क देना पड़ता है, जिससे यह टिकट काफी महंगा हो जाता है। वहीं, करंट टिकट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगता। कई बार तो ट्रेन छूटने के समय चार्ट बनने के बाद करंट टिकट पर सामान्य किराए से भी 10 से 20 फीसदी की छूट मिल जाती है।

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सीट कन्फर्म होने की गारंटी और वेटिंग का नियम - फोटो : Adobe Stock
सीट कन्फर्म होने की गारंटी और वेटिंग का नियम
तत्काल में आपको कन्फर्म सीट के साथ-साथ वेटिंग टिकट भी मिल सकता है, जो बाद में चार्ट बनने पर कन्फर्म हो सकता है। मगर करंट टिकट के मामले में ऐसा नहीं होता, यह टिकट आपको तभी मिलेगा जब ट्रेन में कोई बर्थ खाली बची होगी। यानी करंट टिकट हमेशा 100% कन्फर्म ही मिलता है, इसमें वेटिंग टिकट जारी करने का कोई नियम नहीं है।
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कैंसिलेशन और रिफंड से जुड़े जरूरी नियम - फोटो : AdobeStock
कैंसिलेशन और रिफंड से जुड़े जरूरी नियम
अगर आप अपना कन्फर्म तत्काल टिकट कैंसिल करवाते हैं, तो रेलवे के नियमों के अनुसार आपको एक भी रुपया वापस नहीं मिलेगा, यानी पूरा पैसा डूब जाता है। दूसरी तरफ, करंट टिकट को अगर आप ट्रेन छूटने से पहले कैंसिल करते हैं, तो रेलवे के सामान्य कैंसिलेशन नियमों के तहत क्लैरिकल चार्ज काटकर बाकी की रकम आपके बैंक खाते में वापस रिफंड कर दी जाती है।
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