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तलाक के बाद क्या पुरुषों को भी मिल सकता है गुजारा भत्ता? जानें बेरोजगार पुरुषों से जुड़ा ये कानूनी अधिकार

Tue, 08 Sep 2026 08:10 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Husband Maintenance Rights in Divorce Case: हमारे समाज एक समान्य धारणा है कि तलाक के बाद पत्नी ही पति से गुजारा भत्ता मांग सकती है। मगर बहुत कम लोगों को ये मालूम है कि पति भी कुछ परिस्थितियों में पत्नी से गुजारा भत्ता की मांग कर सकता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में अच्छे से समझते हैं।
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पति को गुजारा भत्ता नियम - फोटो : AI
Alimony For Men India Rule: अक्सर यह माना जाता है कि तलाक के बाद सिर्फ महिलाओं को ही पति से गुजारा भत्ता यानी एलिमनी मिलता है। हालांकि, भारतीय कानून के तहत लैंगिक समानता को ध्यान में रखते हुए विशेष परिस्थितियों में बेरोजगार पुरुषों को भी तलाक के दौरान या उसके बाद पत्नी से भरण-पोषण पाने का अधिकार दिया गया है।

अगर पति कमाने में पूरी तरह असमर्थ है और पत्नी आर्थिक रूप से सक्षम है, तो अदालत पति के पक्ष में गुजारा भत्ता तय कर सकती है। आइए इस लेख में समझते हैं कि इससे जुड़े कानूनी नियम क्या कहते हैं।
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इंटरिम मेंटेनेंस और धारा 24 का नियम - फोटो : FreePik
इंटरिम मेंटेनेंस और धारा 24 का नियम
  • हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 की धारा 24 के तहत अगर केस चलने के दौरान पति के पास आय का कोई जरिया नहीं है और पत्नी अच्छी कमाई कर रही है, तो पति कोर्ट से अंतरिम (अस्थायी) गुजारा भत्ता मांग सकता है। 
  • इसके तहत मुकदमे का खर्च और रोजाना की जरूरतों के लिए कोर्ट आर्थिक मदद दिला सकता है।
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स्थायी एलिमनी और धारा 25 की व्यवस्था - फोटो : AdobeStock
स्थायी एलिमनी और धारा 25 की व्यवस्था
  • धारा 25 के तहत तलाक की प्रक्रिया पूरी होने के समय या उसके बाद स्थायी रूप से भरण-पोषण का प्रावधान है। 
  • अगर पति कानूनी रूप से यह साबित कर देता है कि वह खुद का खर्चा उठाने में पूरी तरह असमर्थ है और पत्नी की आय अच्छी है, तो अदालत पत्नी को पति के लिए स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश दे सकती है।

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तलाक (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : फ्रीपिक
विकलांगता या बीमारी की स्थिति में मिल सकता है राहत
  • अदालतें हर बेरोजगार पुरुष को यह राहत नहीं देती हैं। अगर पति शारीरिक या मानसिक रूप से अस्वस्थ, विकलांग या गंभीर बीमारी के कारण काम करने में लाचार है, तभी पत्नी से गुजारा भत्ता मिलता है।
  • अगर पति पूरी तरह स्वस्थ और शिक्षित होकर भी जानबूझकर काम नहीं कर रहा है, तो कोर्ट उसकी याचिका खारिज कर देती है।
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पत्नी की वित्तीय स्थिति होना जरूरी - फोटो : AdobeStock
पत्नी की वित्तीय स्थिति होना जरूरी
  • पति को गुजारा भत्ता तभी मिल सकता है जब पत्नी खुद आर्थिक रूप से सक्षम हो और उसकी अच्छी कमाई हो रही हो।
  • अगर पत्नी खुद बेरोजगार है या उसकी आमदनी बहुत कम है, तो पति को एलिमनी मिलने का सवाल ही नहीं उठता।
  • कानून का मकसद केवल बेसहारा जीवनसाथी को वित्तीय सहारा देना है, न कि आलस को बढ़ावा देना।
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