फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जानना जरूरी: क्या पिता की प्रॉपर्टी पर होता है शादीशुदा बेटियों का हक, जानिए क्या कहता है कानून

Thu, 04 May 2023 11:24 AM IST
संकल्प सिंह यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
Can daughter claim father's property after marriage - फोटो : Istock
Can daughter claim father's property after marriage: हमारी सामाजिक व्यवस्था में लंबे समय से पिता की जायदाद पर पहला हक बेटों का रहा है। यह परंपरा लंबे समय से चलती आ रही है। हालांकि, 1947 में आजादी के बाद भारत में कई संवैधानिक बदलाव हुए। उसके बाद से देश में महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक स्तर पर सशक्त करने के लिए कई बदलावों को अंजाम दिया जा रहा है। हालांकि, आजादी मिले अब 75 साल से भी अधिक हो गए हैं। उसके बाद भी समाज में कई पुरानी परंपरा आज भी विद्यमान है। आज भी सामाजिक स्तर पर पिता की प्रॉपर्टी पर पहला हक पुत्र को दिया जाता है। बेटी की शादी होने के बाद वह अपने ससुराल चली जाती है। वहीं पिता की प्रॉपर्टी का मालिकाना हक बेटे पर चला जाता है। ऐसे में सवाल है कि क्या पिता की प्रॉपर्टी पर शादीशुदा बेटी अपना मालिकाना हक जता सकती है? आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से - 
विज्ञापन

2 of 5
How To Check Property Records Details - फोटो : Istock
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 2005 के नियम के अंतर्गत बेटा और बेटी दोनों को पिता की प्रॉपर्टी पर सामान अधिकार है। अगर बेटी शादीशुदा है या नहीं दोनों ही स्थिति में उसको पिता की प्रॉपर्टी पर बराबर अधिकार दिया जाता है।

MF SIP: 100 रुपये की बचत करके बन सकते हैं करोड़पति, जानिए क्या है बचत और निवेश का यह शानदार गणित
विज्ञापन

3 of 5
These Banks Offering Cheapest Home Loan - फोटो : Istock
ऐसे में हमारा जो सवाल था कि क्या पिता की प्रॉपर्टी पर शादीशुदा बेटी अपना मालिकाना हक जता सकती है? ऐसे में इसका उत्तर है हां, पिता की प्रॉपर्टी पर शादीशुदा महिला क्लेम कर सकती है। 

4 of 5
home loan- new - फोटो : i stock
गौर करने वाली बात यह है कि अगर पिता अपने मरने से पहले अपनी प्रॉपर्टी को बेटे के नाम पर कर देता है। इस स्थिति में बेटी अपने पिता की प्रॉपर्टी को क्लेम नहीं कर सकती है।  
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
home loan- new - फोटो : i stock
हिंदू उत्तराधिकार संशोधन अधिनियम 2005 का यह नियम हिंदू धर्म की महिलाओं के साथ-साथ बौद्ध, सिख, जैन, आर्य समाज और ब्रह्म समाज की महिलाओं पर भी लागू होता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें