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क्या विदेश में रहने वाला व्यक्ति भारत में किसी को दे सकता है पावर ऑफ ऑटर्नी? जानें कानूनी नियम

Tue, 20 Oct 2026 05:56 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कई बार ऐसा होता है कि कुछ भारतीय लोग विदेश में रहते हैं और अपनी प्रॉपर्टी को वहीं से बेचना चाहते हैं। बता दें कि इसके लिए उन्हें पावर ऑफ टर्नी नियम का इस्तेमाल करना होता जिससे वो आसानी से ये काम वहां बैठे बैठे कर सकते हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं।
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एनआरआई पावर ऑफ टर्नी नियम - फोटो : AI
NRI Power Of Attorney Rules India: नौकरी, व्यापार या पढ़ाई के सिलसिले में विदेश में रहने वाले कई भारतीयों के सामने अक्सर यह समस्या आती है कि वे भारत में अपनी संपत्ति की देखरेख, बैंक खाते के काम या अन्य कानूनी मामलों को कैसे संभालें। ऐसे में मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कोई एनआरआई विदेश में रहकर भी भारत में अपने किसी भरोसेमंद रिश्तेदार या परिचित को पावर ऑफ अटॉर्नी यानी मुख्तारनामा दे सकता है। 

कानून के अनुसार, विदेश में रहने वाला व्यक्ति बिल्कुल ऐसा कर सकता है, लेकिन इसके लिए कुछ विशेष कानूनी प्रक्रियाओं और नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। आइए इस लेख में समझते हैं कि विदेश से पावर ऑफ अटॉर्नी बनवाने की सही कानूनी प्रक्रिया क्या है।
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विदेश में पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कराने की प्रक्रिया - फोटो : Adobe Stock
विदेश में पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कराने की प्रक्रिया
  • विदेश में रहने वाले व्यक्ति को सबसे पहले स्थानीय कानूनों के अनुसार पावर ऑफ अटॉर्नी का दस्तावेज तैयार करवाना होता है।
  • इसमें उस व्यक्ति का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए जिसे भारत में अधिकार दिया जा रहा है और उन सभी कामों की सूची लिखनी होती है जिनके लिए यह अधिकार दिया गया है।
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भारतीय दूतावास या महावाणिज्य दूतावास से अटेस्टेशन - फोटो : Adobe Stock
भारतीय दूतावास या महावाणिज्य दूतावास से अटेस्टेशन
  • विदेश में तैयार किए गए इस दस्तावेज को कानूनी रूप से वैध बनाने के लिए संबंधित देश में स्थित भारतीय दूतावास या कंसोलट कार्यालय ले जाना पड़ता है।
  • वहां अधिकारी के सामने हस्ताक्षर करके इस दस्तावेज का सत्यापन यानी अटेस्टेशन कराना सबसे महत्वपूर्ण कदम होता है।

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भारत पहुंचने पर मजिस्ट्रेट या सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट की मुहर - फोटो : Adobe Stock
भारत पहुंचने पर मजिस्ट्रेट या सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट की मुहर
  • दूतावास से अटेस्ट होकर भारत पहुंचने पर इस पावर ऑफ अटॉर्नी को 3 महीने के भीतर अपने जिले के मजिस्ट्रेट से पुनः सत्यापित कराना अनिवार्य होता है।
  • इस प्रक्रिया और मुहर के बिना यह दस्तावेज भारत में कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य नहीं माना जाता है।
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स्टाम्प ड्यूटी और सब-रजिस्टार कार्यालय में रजिस्ट्रेशन - फोटो : Adobe Stock
स्टाम्प ड्यूटी और सब-रजिस्टार कार्यालय में रजिस्ट्रेशन
  • कानूनी रूप से पूरी तरह मजबूत बनाने के लिए इस दस्तावेज पर राज्य के नियमों के अनुसार उचित स्टाम्प ड्यूटी चुकानी पड़ती है।
  • इसके बाद इसे स्थानीय सब-रजिस्टार कार्यालय में रजिस्टर्ड कराना अनिवार्य होता है, तभी भारत में यह पूरी तरह से वैध माना जाता है।
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