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Year Ender 2019: पूनिया से लेकर दुती और मैरी तक, इन 10 खिलाड़ियों ने दुनिया में लहराया तिरंगा

Tue, 31 Dec 2019 12:40 PM IST
Rajeev Rai स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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भारतीय खिलाड़ी - फोटो : अमर उजाला
साल 2019 में क्रिकेट से अलग भारतीय खिलाड़ियों ने दूसरे खेलों में अपने प्रदर्शन से सभी को चौंकाया और विश्व पटल पर अपनी और देश की छाप छोड़ी। ऐसे में आईए जानते हैं उन खिलाड़ियों और उनके खेल के बारे में जिन्होंने अपने विश्वस्तरीय प्रदर्शन से नया कीर्तिमान स्थापित किया और चर्चा में रहे।
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गुरप्रीत सिंह संधू - फोटो : ट्विटर
गुरप्रीत की छलांग
फीफा वर्ल्ड कप क्वालीफ़ायर में एशियन चैंपियन क़तर की टीम के खिलाफ भारतीय फुटबॉल टीम ने गोल राहत ड्रा खेलकर सभी को चौंकाया। सितम्बर में दोहा में खेले गए मैच में भारतीय टीम अपने स्टार खिलाड़ी और कप्तान सुनील छेत्री के बगैर उतरी। लेकिन मैच में गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू के नेतृत्व ने उतरी टीम ने जबरदस्त प्रदर्शन किया और मैच को ड्रा पर खत्म किया। मैच में क़तर के 27 शॉट्स पर गुरप्रीत ने गोलकीपिंग करते हुए 11 बार गोल होने से बचाया।
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सात्विक साईराज रेड्डी और चिराग शेट्टी - फोटो : सोशल मीडिया
जोड़ीदार सात्विक-चिराग 
भारत की स्टार बैडमिंटन पुरुष जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर में सुपर 750 स्तर के इवेंट के अपने पहले फाइनल में पहुंचे और करियर में दूसरी बार शीर्ष 10 विश्व रैंकिंग में शामिल हुए। फ्रेंच ओपन के फाइनल में पहुंचने के वक्त दोनों की जोड़ी युगल वर्ग में 11 वें स्थान पर काबिज थी जिसके बाद दोनों को रैंकिंग में दो स्थान का फायदा मिला और दोनों नौवें स्थान पर पहुंच गए। 

भारत की यह शीर्ष युगल जोड़ी साल की शुरुआत में थाईलैंड ओपन का खिताब  जीतने के साथ ही BWF सुपर सीरीज़ 500 का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय जोड़ी बनीं।

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रोजर फेडरर और सुमित नागल - फोटो : सोशल मीडिया
फेडरर के खिलाफ नागल का एतिहासिक मुकाबला:
भारत के युवा टेनिस खिलाड़ी सुमित नागल ने इस साल यूएस ओपन के मुख्य ड्रा में जगह बनाकर इतिहास रच दिया। वे ग्रैंड स्लैम के ड्रा के लिए क्वालीफाई करने वाले भारत के सबसे युवा खिलाड़ी बनें। 25 वर्षीय नागल अपने पहले मुकाबले में 20 बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन रोजर फेडरर के खिलाफ उतरे। इतना ही नहीं उन्होंने पहला सेट जीतने के बाद फेडरर के साथ रोमांचक मुकाबला खेला। हालांकि वे मैच हार गए लेकिन इस प्रक्रिया में वह पिछले 20 वर्षों में किसी ग्रैंड स्लैम के मुख्य ड्रॉ में सेट जीतने वाले केवल चौथे भारतीय बने।
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दुती चंद - फोटो : ट्विटर
दुती की सुनहरी दौड़
भारत की स्टार धाविका दुती ने जुलाई में 30वें समर यूनिवर्सिटी गेम्स में 100 मीटर कॉम्पिटिशन का गोल्ड मेडल ही नहीं जीता बल्कि वो इस खेल में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी भी बन गईं। 

वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स को ओलंपिक के बाद दुनिया का सबसे बड़ा टूर्नामेंट माना जाता है जहां तक़रीबन 150 देशों के खिलाड़ी भाग लेते हैं। खेल के अलावा दुती का पारिवारिक जीवन भी विवादों में रहा। उन्होंने पहली बार अपने समलैंगिक होने और एक लड़की के साथ रिश्ते में होने की बात सार्वजनिक तौर पर स्वीकार की थी। इसके बाद उनके परिवार ने उनका साथ छोड़ दिया था और उन्हें धमकी भी दी थी।
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दीपक पूनिया - फोटो : ट्विटर
वर्ल्ड चैंपियन दीपक पूनिया:
20 वर्षीय पहलवान दीपक पूनिया ने पहलवानी में अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दमदार प्रदर्शन किया। 14 अगस्त को दीपक ने जूनियर विश्व चैंपियनशिप में 18 साल में पहली बार भारत को गोल्ड मेडल दिलवाया। वे रुसी खिलाड़ी को हराकर चैंपियन बने। इतना ही नहीं विश्व चैंपियनशिप में 86किग्रा भारवर्ग के फ्रीस्टाइल कुश्ती में वे चोट की वजह से फाइनल मुकाबला नहीं खेल पाए लेकिन रजत पदक अपने नाम कर गए।
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मैरी कॉम - फोटो : सोशल मीडिया
गोल्ड से चूकीं चैंपियन 'मैरी'
छह बार की बॉक्सिंग चैंपियन दिग्गज मैरी कॉम एक और गोल्ड जीतने से चूक गई। अगस्त में हुए विश्व महिला मुक्केबाजी चैंपियनशिप सेमीफाइनल में उन्हें तुर्की की बुसेनाज काकरोग्लू से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्हें पहली बार कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा। हालांकि हार के बावजूद, 36 वर्षीय मैरी ने एक और उपलब्धि हासिल कर ली। विश्व चैंपियनशिप में पहली बार 51 किग्रा वर्ग में भाग ले रहीं मैरी ने कांस्य पदक जीत लिया। 

मैरी ने विश्व चैंपियनशिप के छह खिताब के अलावा, एक ओलंपिक कांस्य पदक (2012), पांच एशियाई खिताब, एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक और कई अन्य अंतरराष्ट्रीय पदक भी जीते हैं। 

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भारतीय निशानेबाज - फोटो : social media
ओलंपिक में भारत के 15 निशानची
भारत ने निशानेबाजी में अपनी छवि के अनुरूप प्रदर्शन करते हुए नया रिकॉर्ड बनाया। भारतीय निशानेबाजों ने टोक्यो ओलंपिक में भारत को कुल 15 कोटा दिलवाए। 

अंगद वीर सिंह बाजवा और मैराज अहमद खान की स्कीट में 1-2 की शानदार बढ़त और उसके बाद युवा ऐश्वर्या प्रताप सिंह तोमर के 14 वें एशियाई चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतने के बाद भारत को निशानेबाजी में अब तक का सबसे अधिक 15 ओलंपिक कोटा हासिल हुआ। इससे पहले भारत को 2016 रियो ओलंपिक में 12 और 2012 लंदन ओलंपिक में 11 कोटे मिले थे। 

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जी साथियान - फोटो : pti
विश्व चैंपियनशिप में अकेला साथियान
टेबल टेनिस के विश्व चैंपियनशिप में भारत के गुणासेकरण साथियान इकलौते भारतीय थे जिसने चुनौती पेश की और विरोधियों को कड़ी टक्कर दी। हालांकि वे क्वार्टरफाइनल में प्रवेश नहीं कर पाए लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन की बदौलत वे अपनी छाप छोड़ने में सफल रहे।

वे जर्मनी की बुंदेसलिगा डिवीज़न की प्रतिष्ठित लीग से जुड़े और यह उपलब्धी हासिल करने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बने। वे पहली बार टॉप-25 की रैंकिंग में पहुंचे और इस स्थान पर पहुंचने वाले पहले भारतीय बने। सितम्बर में उन्हें आईटीटीएफ ने एशियन टेबल टेनिस चैंपियनशिप के टॉप स्टार से नवाजा।

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इंडियन वॉलीबॉल - फोटो : social media
वॉलीबॉल टीम का फाइनल का सफर 
भारतीय पुरुष वॉलीबॉल टीम पहली बार एशिया अंडर-23 के फाइनल में जगह बनाने में सफल रही। हालांकि उसे मजबूत चीन के हाथों 3-1 से हार झेलनी पड़ी लेकिन बावजूद इसके टीम ने अपने दमदार प्रदर्शन से सभी को चौंकाया और रजत पदक जीतने में सफल रही। 
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हिमा दास - फोटो : सोशल मीडिया
हिमा दास की विजयी दौड़:
ढिंग एक्सप्रेस के नाम से मशहूर भारत की धाविका हिमा दास के लिए साल उतार-चढ़ाव भरा रहा। हिमा ने एक महीने के अंदर अलग-अलग खेलों में कुल छह गोल्ड मेडल जीतकर खूब सुर्खियां बटोरी लेकिन फिर  अहम मौके पर ओलंपिक में क्वालीफाई करने से चूक गई।  चोट की वजह से भी उन्हें कई बड़े टूर्नामेंट से  दूर रहना पड़ा।  
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