कोरोना महामारी की चुनौतियों के बावजूद टोक्यो पैरालंपिक का आयोजन सफल रहा। जापान के सम्राट नारुहितो के भाई क्राउन प्रिंस अकिशिनो की उपस्थिति में पैरालंपिक खेलों का समापन रंगारंग कार्यक्रम के साथ हुआ। भारत इस पैरालंपिक में 19 पदकों (पांच गोल्ड, आठ सिल्वर और छह ब्रॉन्ज) के साथ 24वें स्थान पर रहा। पैरालंपिक इतिहास में भारत का यह सबसे शानदार प्रदर्शन है। पैरा खेलों के महाकुंभ में भाग लेने के लिए इस बार भारत की तरफ से सबसे बड़ा दल (54) टोक्यो पहुंचा था, जिन्होंने कुल नौ स्पोर्ट्स इवेंट्स में हिस्सा लिया था। सभी खिलाड़ियों ने अपना बेस्ट दिया लेकिन कुछ पदक तक पहुंचने से चूक गए लेकिन कुछ ने बाजी मारी और देश को गौरवान्वित किया। समापन समारोह में सक्षम और दिव्यांग दोनों तरह के कलाकार शामिल थे। इन कलाकारों के बीच शानदार सामंजस्य देखने को मिला। आयोजकों ने इसके विषय को 'पैरालंपिक से प्रेरित दुनिया, जहां भिन्नता भी चमक बिखरती है' के रूप में वर्णित किया। पैरालंपिक खेलों में रिकार्ड 4000 से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया और रिकॉर्ड संख्या में देशों ने पदक जीते। कोरोना महामारी के कारण जापान को इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ा। स्टेडियम में दर्शक नहीं थे। विदेशों से आने वाले प्रशंसकों पर प्रतिबंध के कारण देश को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। बावजूद इसके खेलों का सफल आयोजन हुआ। बता दें कि जापान को 2013 में इन खेलों की मेजबानी का अधिकार मिला था।