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Year Ender 2019: अनजान युवा सितारों ने बिखेरी चमक, दुनिया में मनवाया अपना लोहा

Thu, 26 Dec 2019 01:39 PM IST
Rohit Ojha स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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भारत के युवा सितारे - फोटो : सोशल मीडिया
इतिहास के पन्नों में नाम दर्ज करवाने के सपने तो हर खिलाड़ी देखता है पर पूरे उन्हीं के होते हैं जिनमें कुछ कर गुजरने का जुनून होता है। वो कड़ी मेहनत से न सिर्फ अपनी मंजिल पा लेते बल्कि अपनी अलग पहचान भी बनाते हैं। आइए मिलते हैं कुछ ऐसे युवा खिलाड़ियों से जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को ही नहीं देश को भी गौरवान्वित किया।  
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प्रग्गनानंधा

शतरंज के नए बादशाह

तमिलनाडु के डी गुकेश और रमेशबाबू प्रागनानंदा भारतीय शतरंज के नए बादशाह बनकर उभरे हैं। गुकेश साल के शुरुआत में देश के सबसे युवा और दुनिया के दूसरे सबसे युवा ग्रैंड मास्टर बने। उन्होंने 12 साल सात महीने, 17 दिन में यह उपलब्धि हासिल कर प्रागनानंद (12 साल, दस महीने) का पिछले साल जून में बनाया रिकॉर्ड तोड़ा। दुनिया के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर का रिकॉर्ड यूक्रेन के सर्गेई कार्जाकिन (12 साल, 7 महीने) के नाम हैं। वहीं 14 साल के प्रागनानंद ने अक्तूबर में विश्व युवा शतरंज चैंपियनशिप में अंडर-18 वर्ग का खिताब जीता।

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क्रिश्चियन कोलमैन - फोटो : सोशल मीडिया

बोल्ट के वारिस बनने की ओर कोलमैन 

अमेरिका के 23 वर्षीय क्रिश्चियन कोलमैन (9.76 सेकंड) ने 100 मीटर का विश्व खिताब जीतकर दिग्गज फर्राटा धावक उसैन बोल्ट का वारिस बनने की ओर कदम बढ़ाए। वह भले ही 0.18 सेकंड से बोल्ट (9.58 सेकंड) के रिकॉर्ड की बराबरी से चूक गए, लेकिन इस सत्र का सबसे तेज और सर्वकालिक छठा समय निकाल वह रफ्तार के नए सौदागर बन गए हैं। यह उनका पहला विश्व खिताब है। उन्होंने चार गुणा 100 मीटर रिले में भी स्वर्ण जीता। अब सभी निगाह टोक्यो ओलंपिक में उनके प्रदर्शन पर रहेगी।

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तेजय गेल - फोटो : सोशल मीडिया

तेजय की जय 

जमैका के 23 साल के तेजय गेल ने वह किया जिसे उनसे पहले कोई एथलीट नहीं कर पाया। पहली बार विश्व चैंपियनशिप में भाग लेने वाले तेजय ने लांग जंप में 8.69 मीटर की कूद लगाकर देश को एथलेटिक्स की फील्ड स्पर्धा का पहला स्वर्ण दिलाकर भविष्य की उम्मीद जगाई। उनका यह प्रदर्शन पिछले दस वर्षों का सबसे सर्वश्रेष्ठ जबकि इतिहास का दसवां श्रेष्ठ प्रदर्शन रहा।

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प्रवीण कुमार वुशु - फोटो : ट्विटर

वुशू के प्रवीण

हरियाणा के रोहतक के 22 वर्षीय प्रवीण कुमार ने वुशू में विश्व खिताब जीत इस खेल को नई पहचान दिलाई। वह अक्तूबर में फिलीपींस में हुई चैंपियनशिप में 28 साल के इतिहास में विश्व चैंपियन बनने वाले भारत के पहले पुरुष जबकि दूसरे खिलाड़ी बने। उनसे दो साल पहले पूजा कादियान स्वर्ण पदक जीतने वाली देश की पहली खिलाड़ी बनी थीं।

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अमित पंघाल - फोटो : ट्विटर

रिंग के नए किंग अमित

अमित पंघाल (52 किग्रा) भारतीय मुक्केबाजी के नए पोस्टर ब्वाय बन गए हैं। हरियाणा के रोहतक के मयाना गांव के 24 वर्षीय मुक्केबाज ने सितंबर में विश्व चैंपियनशिप में रजत जीत मुक्केबाजी में नया अध्याय लिखा। वह 43 वर्षों के इतिहास में इस प्रतिष्ठित चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने और चांदी जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष मुक्केबाज बने। किसान पिता के बेटे अमित टोक्यो ओलंपिक में स्वर्णिम पंच जड़ तो कोई हैरानी नहीं होगी।

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दीपक पूनिया - फोटो : ट्विटर

चमक बिखेरते दीपक

पहलवान दीपक पुनिया (86 किग्रा) ने जूनियर चैंपियन बनने के डेढ़ माह के भीतर सीनियर विश्व चैंपियनशिप में रजत जीत कुश्ती में नया अध्याय जोड़ा। बीस साल के दीपक ने अगस्त में इस्टोनिया में 18 साल बाद देश को जूनियर विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक दिलाया। इसके बाद सितंबर में कजाखस्तान में अपनी पहली ही सीनियर विश्व चैंपियनशिप में रजत जीत इसे यादगार बना दिया। उन्हें चोट के चलते फाइनल से हटना पड़ा।

यही नहीं उन्होंने टोक्यो ओलंपिक का टिकट भी कटाया। वह फाइनल में पहुंचने वाले देश के सबसे युवा पहलवान बने। अगर वह विजेता बनते तो डेढ़ माह में जूनियर और सीनियर विश्व चैंपियन बनने वाले दुनिया के पहले पहलवान बनते। दीपक को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए यूनाईटेड विश्व कुश्ती (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) ने साल का सर्वश्रेष्ठ जूनियर फ्रीस्टाइल पहलवान चुना है। वह यह पुरस्कार पाने वाले पहे भारतीय हैं। वह 2016 में वर्ल्ड कैडेट का भी खिताब जीत चुके हैं।

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दिव्यांश सिंह पंवार

सोने पर निशाना साधते दिव्यांश 

राजस्थान के 17 साल के निशानेबाज दिव्यांश सिंह पंवार भी युवा मनु भाकर और सौरभ चौधरी के नक्शेकदम पर चल रहे हैं। पहली बार सीनियर विश्व चैंपियनशिप में खेलते हुए दिव्यांश ने चार स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य सहित छह पदक जीतने के साथ ही टोक्यो ओलंपिक को कोटा भी हासिल किया। दस मीटर एयर राइफल में विश्व चैंपियन के साथ ही एक रजत और मिश्रित टीम स्पर्धा में तीन स्वर्ण और एक कांसा जीता। इस माह ही हुई राष्ट्रीय चैंपियनशिप में दिव्यांश ने अपना स्वर्णिम सफर जारी रखा।  

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