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रिक्शाचालक की बेटी स्वप्ना का इंतजार नहीं हो रहा खत्म, सरकार की मंजूरी के बावजूद इस चीज को तरसी

Sat, 29 Sep 2018 05:45 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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स्वप्ना बर्मन
एशियन गेम्स 2018 की गोल्ड मेडलिस्ट स्वप्ना बर्मन ने खुलासा किया है कि आगामी स्पर्धाओं में हिस्सा लेने के लिए उन्हें अब भी पर्याप्त जूतों की जोड़ी का इंतजार है। यह खुलासा तब सामने आया है जब स्वप्ना महिलाओं की हेप्टाथलॉन स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं थीं।
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स्वप्ना बर्मन
बर्मन के दोनों पैरों में कुल 12 उंगलियां हैं। एशियन गेम्स तक वह पांच उंगलियों के लिए बने जूतों को पहनकर उतरी, जिसकी वजह से उन्हें काफी दर्द हुआ। बर्मन आर्थिक रूप से सक्षम नहीं थीं कि वह अपने लिए विशेष जूतों का इंतजाम कर सकें। इस महीने की शुरुआत में साई महानिदेशक नीलम कपूर ने पीटीआई से कहा कि उन्होंने एडिडास के सामने बर्मन का मामला रखा। कंपनी भी उनके लिए विशेष जूते बनाने को तैयार हो गई। हालांकि, बर्मन अब भी विशेष जूतों के लिए तरस रही हैं।
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स्वप्ना बर्मन
एएनआई से बातचीत में बर्मन ने कहा, 'जूते अभी तक नहीं बने। राज्य और केंद्रीय सरकार ने जूते बनाने का भरोसा दिलाया था। हालांकि, मुझे किसी भी प्रकार के जूते प्रयोग करने के लिए नहीं मिले। मुझे इसके लिए जर्मनी भी जाना पड़ सकता है।' अपने अगले लक्ष्य के बारे में बात करते हुए स्वप्ना ने स्पष्ट किया कि उनका पूरा ध्यान 2020 टोक्यो ओलंपिक्स पर टिका है। उन्होंने कहा, 'मेरा अगला प्रमुख लक्ष्य 2020 टोक्यो ओलंपिक्स है। इससे पहले एशियन चैंपियनशिप भी होगी, लेकिन उसमें समय है। देखते हैं कि क्या होता है।'

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स्वप्ना बर्मन
जहां बर्मन की नजरें ओलंपिक्स पर टिकी हैं, वहीं उनके कोच सुभास सरकार का मानना है कि 21 वर्षीया का असली लक्ष्य नहीं होना चाहिए बल्कि उन्हें अपने एशियाई खेल स्वर्ण पदक की रक्षा करने को ध्यान में रखते हुए ट्रेनिंग करना चाहिए। सरकार ने कहा, 'हमारा लक्ष्य दूसरा एशियाई खेल गोल्ड जीतने पर है जो पहले कभी नहीं हुआ। जहां तक ओलंपिक की बात है तो क्वालिफिकेशन मार्क 6200 अंक हैं। स्वप्ना को पहले यह हासिल करने की जरूरत है।'
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स्वप्ना बर्मन
स्वप्ना बर्मन अर्जुन अवॉर्ड जीतने से चूकी, जिससे वह निराश जरूर हैं, लेकिन उन्होंने साथ ही कहा कि यह अवॉर्ड उन्हें मिला जो इसके असली हकदार थे। बकौल बर्मन, 'मैं झूठी बन जाऊंगी अगर यह कहूं कि अर्जुन अवॉर्ड नहीं मिलने पर निराश नहीं हूं। हालांकि, जिन्हें यह अवॉर्ड मिला, वह मुझसे ज्यादा इसे पाने के हकदार हैं। मैं इसे अगले साल भी हासिल कर सकती हूं।'
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