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साक्षी ने ओलंपिक में कुश्ती को बनाया भारत का दूसरा सबसे सफल खेल

Thu, 18 Aug 2016 03:14 PM IST
सुरेंद्र कुमार वर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
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साक्षी मलिक - फोटो : PTI
साक्षी मलिक की ऐतिहासिक सफलता ने एक और कीर्तिमान रचते हुए ओलंपिक खेलों में हॉकी के बाद भारत का सबसे सफल खेल कुश्ती को बना दिया है।
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साक्षी ने ओलंपिक में कुश्ती को बनाया भारत का दूसरा सबसे सफल खेल

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- फोटो : PTI
रियो में 31वां ओलंपिक खेल जब अपने मुकाम की ओर जा रहा था और लगातार प्रयास के बाद भारत के पदक नहीं जीतने से भारतीय खेमे में जबर्दस्त निराशा का माहौल था ऐसे में रक्षा बंधन के दिन साक्षी ने कमाल कर दिया और कुश्ती में कांस्य पदक हासिल कर इतिहास रचते हुए पदक तालिका में देश का नाम भी शामिल करा दिया। 
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साक्षी ने ओलंपिक में कुश्ती को बनाया भारत का दूसरा सबसे सफल खेल

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साक्षी मलिक - फोटो : getty
उन्होंने महिलाओं की फ्रीस्टाइल कुश्ती के 58 किलोग्राम भारवर्ग में भारत के लिए पदक जीता। रियो ओलंपिक में भारत का यह पहला पदक है।

साक्षी ने ओलंपिक में कुश्ती को बनाया भारत का दूसरा सबसे सफल खेल

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साक्षी मलिक - फोटो : getty
साक्षी ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतने वाली देश की पहली महिला पहलवान बन गई हैं। साथ ही उनके इस खेल ने भारत का पारंपरिक खेल कहे जाने वाले कुश्ती को देश का दूसरा सबसे सफल खेल बना दिया।
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साक्षी ने ओलंपिक में कुश्ती को बनाया भारत का दूसरा सबसे सफल खेल

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साक्षी मलिक - फोटो : getty
कुश्ती में भारत का यह पांचवां पदक है। जबकि हॉकी में भारत ने कुल 11 पदक जीते हैं जिसमें वर्ल्ड रिकॉर्ड 8 गोल्ड मेडल भी शामिल है। कुश्ती से भारत के खाते में एक रजत पदक के अलावा 4 कांस्य पदक आए हैं अब तक। हॉकी और कुश्ती के बाद ओलंपिक में भारत का तीसरा सबसे सफल खेल निशानेबाजी है जिसमें उसे एक स्वर्ण, 2 रजत के अलावा एक कांस्य पदक मिला है।
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हॉकी - फोटो : getty
ओलंपिक में भारत का सबसे सफल खेल हॉकी रहा है क्योंकि इस खेल में उसका दबदबा कई दशकों तक कायम रहा। भारतीय हॉकी टीम ने इस खेल में लगातार 6 स्वर्ण पदक (1928 से 1956 तक) जीते हैं। इस बार रियो में भारतीय हॉकी ने 36 सालों बाद नॉकआउट दौर में जगह बनाई थी। उसने आखिरी बार 1980 में मास्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था।
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साक्षी मलिक - फोटो : getty
हॉकी के बाद ओलंपिक खेलों में सबसे ज्यादा 5 पदक कुश्ती से ही आए हैं। इस खेल में भारत को पहला पदक आज से 64 साल पहले मिला था जब केदार जाधव ने 1952 हेलेंसिकी ओलंपिक में कुश्ती में भारत के लिए कांस्य के रूप में पहला व्यक्तिगत पदक जीता था।

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योेगेश्वर दत्त - फोटो : getty
इसके बाद सुशील कुमार ने 2008 बीजिंग में कांस्य और 2012 में लंदन में रजत पदक जीता था। तो लंदन में ही योगेश्वर दत्त ने कांस्य पदक जीतकर भारत की खुशियों को दुगना कर दिया था। अब महिला कुश्ती में साक्षी कांस्य पदक जीतकर जीवंत इतिहास की साक्षी बन गई हैं। इस बार भी योगेश्वर दत्त मुकाबले में उतरेंगे। अगर वह भी पदक जीतते हैं तो कुश्ती से पदकों की संख्या 6 हो जाएगी। 
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साइना नेहवाल - फोटो : facebook
ओलंपिक में भारत के लिए साक्षी से पहले कभी किसी महिला पहलवान ने पदक नहीं जीता था। साक्षी से पहले भारत की ओर से ओलंपिक में सिर्फ तीन महिला खिलाड़ी कर्णम मल्लेश्वरी (2000, सिडनी), एमसी मैरीकॉम (2012 लंदन) और साइना नेहवाल (2012 लंदन) ही पदक जीत सकी हैं।
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