रियो ओलंपिक के शुरुआत से पहले यह दावा किया गया था कि भारत के खाते में इस बार रिकॉर्डतोड़ 10 से ज्यादा पदक आएंगे, लेकिन खेलों के महाकुंभ खत्म होने के बाद सिर्फ दो पदक ही आए। ये दो पदक भी तब आए जब यह महाकुंभ अपने समापन की ओर चल निकला था। शुरुआती 12 दिनों तक पदक के इंतजार को खत्म करते हुए साक्षी मलिक ने देश को पहला पदक दिलाया तो अगले ही दिन पीवी सिंधू ने रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। भारत भले ही ज्यादा पदक नहीं जीत सका लेकिन कई खिलाड़ियों ने एक बार शानदार खेल दिखाकर पदक की उम्मीद तो जता ही दी थी।
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तो भारत के ये 7 एथलीट भी साक्षी और सिंधू की तरह रियो में चमकते!
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Rio 2016
- फोटो : Getty
भले ही भारत के खाते में सिर्फ 2 पदक आए और भविष्य में इन्हीं 2 पदकों को ही याद किया जाएगा, लेकिन कुछ खिलाड़ियों के जोरदार प्रदर्शन को कमतर आंका नहीं जा सकता। अगर किस्मत साथ देती तो भारत में नाम करीब 10 पदक तो होते ही। आइए जानते हैं कि भारत की ओर से उन 7 प्रदर्शन को जिन्होंने एक समय पदक की उम्मीद जगा दी थी, लेकिन किस्मत उनके साथ दगा कर गई।
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सानिया मिर्जा
- फोटो : getty
शुरुआत सानिया मिर्जा से। भारत को टेनिस से 2 पदक की आस थी, लेकिन लिएंडर पेस और रोहन बोपन्ना की पुरुष युगल जोड़ी पहले ही दौर में हार गई, लेकिन मिश्रित युगल में बोपन्ना सानिया के साथ सेमीफाइनल में पहुंचे, लेकिन पहले अमेरिकी जोड़ी से हार के बाद कांस्य के लिए हुए मुकाबले में भारतीय जोड़ी को चेक गणराज्य की जोड़ी से सीधे सेटों में हार मिली। सानिया-बोपन्ना की जोड़ी को पदक के लिए 2 मौके मिले लेकिन पदक उनके करीब नहीं आ सकी।
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दीपा करमाकर
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दीपा करमारकर जिन्होंने जिमनास्ट में करिश्नाई प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक की आस जगा दी थी, लेकिन फाइनल मुकाबले में वह 0.15 अंक से पदक से चूक गईं। वह आर्टिस्टिक जिम्नास्ट स्पर्धा के फाइनल में 15.066 अंक लेकर चौथे स्थान पर रहीं। स्वर्ण पदक अमेरिका की सिमोन वाइल्स को मिला। दीपा ओलंपिक इतिहास में महिला जिम्नास्ट के किसी स्पर्धा के फाइनल में पहुंचने वाली पहली महिला बनी थीं।
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जीतू राय
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जीतू राय इस बार निशानेबाजी में भारत की ओर से सबसे बड़ा नाम था और उनसे एक नहीं बल्कि दो पदक की आस थी। 31वें ओलंपिक के पहले दिन 10 मीटर एयर पिस्टल के फाइनल में पहुंच गए थे, लेकिन पदक के लिए हुई निशानेबाजी में उनकी पिस्टल काम न आई और 8वें स्थान पर रहे।
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अभिनव बिंद्रा
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निशानेबाजी में 2008 में बीजिंग ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता रहे अभिनव बिंद्रा के लिए यह आखिरी ओलंपिक था और वह पदक के साथ विदाई लेना चाहते थे। 10 मीटर एयर राइफल में वह पदक के काफी करीब पहुंच गए लेकिन निर्णायक मौके पर उनकी राइफल गिर गई और पदक के निशाने से चूक गए। उन्हें चौथे स्थान पर रहना पड़ा और पदक के करीब पहुंचकर भी पदक नहीं झटक सके।
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विकास कृष्ण
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मुक्केबाजी में विकास कृष्णन यादव पुरुषों की मिडिलवेट वर्ग के क्वार्टर फाइनल में पहुंच गए थे और वह जिस तरह से खेल रहे थे उससे लग रहा था कि देश के लिए वह पदक जरुर जीत लेंगे। सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ ही उनके नाम एक पदक तय हो जाता, लेकिन क्वार्टर में वह कड़े मुकाबले में उज्बेक मुक्केबाज से हार गए।
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ललिता बाबर
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एथलेटिक्स में ललिता बाबर ने 3000 मीटर स्टेपलचेस में हिस्सा लिया और हिट में नेशनल रिकॉर्ड बनाते हुए फाइनल में जगह बनाई, लेकिन पदक के लिए हुए मुकाबले में वह 10वें पायदान पर रह गई। वह ट्रैक एंड फील्ड में 32 साल बाद फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बनी थी।
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बैडमिंटन में कादांबी श्रीकांत उलटफेर करते हुए अंतिम आठ में पहुंच गए थे और सेमीफाइनल के लिए हुए मुकाबले में चीनी खिलाड़ी और 2 बार के ओलंपिक चैंपियन लिन डेन को कड़ी चुनौती दी और अंत तक बराबरी का मुकाबला बनाए रखा। उलटफेर में माहिर श्रीकांत ने अपने खेल से देश के लिए पदक की आस जगा दी थी।