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गोल्ड मेडल जीतते ही कोच पति के गले लग भावुक हुई हिना सिद्धू, ऐसी है दोनों की लव स्टोरी

Tue, 10 Apr 2018 07:33 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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भारत के लिहाज से कॉमनवेल्थ गेम्स में मंगलवार का दिन बेहद लकी रहा। स्टार शूटर हीना सिद्धू ने देश की शुरुआत सोने पर निशाना लगाकर की। 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में ऑस्ट्रेलिया की एलेना गैलियाबोविच ने सिल्वर और मलेशिया की आलिया सजाना अजाहारी ने ब्रॉन्ज जीता। गोल्ड पर निशाना लगाते ही हिना के कोच पति रौनक पंडित ने उन्हें गोद में उठा लिया। दिलचस्प है कि रौनक कोच के साथ-साथ हीना के पति भी है।

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शूटिंग रेंज में हीना ने जैसे ही गोल्ड मेडल जीता, पीछे मुड़ीं और अपने पति रौनक पंडित के गले लग गईं। रौनक ने भी उन्हें खुशी में गोद में उठा लिया। इन यादगार लम्हों के बाद हिंदुस्तान टाईम्स से विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि किस तरह इस सपने को पूरा करने के लिए हीना की ट्रेनिंग पूरी हुई। बकौल रौनक, 'मैंने स्पेशल प्लान बनाया, जहां शूटिंग रेंज के आसपास खूब शोरगुल, हवा की तेज स्थिति पैदाकर प्रैक्टिस करवाई ताकि वो खराब से खराब हालातों से भी उबरने की आदि हो जाए। आगे स्लाइड में जानिए कैसे हुई दोनों की मुलाकात....
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हीना और रौनक के बीच जान-पहचान 2012 लंदन ओलंपिक से पहले हुई थी। हीना को जब पता चला कि वो लंदन ओलंपिक में हिस्सा लेने वाली हैं, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था, लेकिन उनके पास तैयारी के लिए महज चार महीने का समय बचा था। हिना ने जब तैयारी शुरू की तो शूटिंग रेंज में रौनक भी हुआ करते थे, यहां से दोनों की जान-पहचान शुरू हुई। रौनक अपना खेल भूलकर हीना को ओलंपिक के लिए तैयार करने में जुट गए।

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जल्द ही दोनों को एहसास हो गया कि वो एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते, बाद में दोनों ने शादी करने का फैसला ले ही लिया। अब दोनों अपनी जिंदगी की हर हार-जीत साथ में ही सेलिब्रेट करते हैं।
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वैसे हीना का शूटिंग को करियर के रूप में चुनना भी कम दिलचस्प नहीं है। अगस्त 1989 में पंजाब के लुधियाना में पैदा हुई हीना सिद्धू के भाई करनवीर सिंह जूनियर स्तर पर शूटिंग मुकाबलों में हिस्सा ले चुके हैं। हीना के पिता राजदीप सिंह सिद्धू, एक्साइज एंड टैक्सेशन महकमे में उच्चाधिकारी रहे हैं। हीना सिद्धू बीडीएस कर चुकी हैं और वह न्यूरोलॉजिस्ट बनना चाहती थी, लेकिन शूटिंग का शौक था।
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साल 2006 में हीना मेडिकल में दाखिले के लिए जी तोड़ तैयारी कर रही थीं। घर में चाचा का बंदूकों की मरम्मत का बिजनेस था तो शौक-शौक में पिस्टल चलाना सीखा। पढ़ाई से थोड़ा ब्रेक मिल जाता था, लेकिन निशानेबाजी का शौक जल्द ही फुल टाइम मिशन में बदल गया। हीना सिद्धू साल 2008 से इंटरनेशनल लेवल पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वर्ष 2009 में उन्होंने बीजिंग में आयोजित इंटरनेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर जीता।
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साल 2010 में गुआंगझू (चीन) में एशियन गेम्स में 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड मेडल जीता। 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में इसी इवेंट में महिला व्यक्तिगत वर्ग में गोल्ड मेडल जीता। वह 2012 लंदन और 2016 रियो डी जेनेरियो ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

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2012 में शूटिंग कोच रौनक पंडित से शादी की थी। उनके ससुर अशोक पंडित शूटिंग द्रोणाचार्य अवार्डी हैं। हीना सिद्धू ने बीडीएस तक पढ़ाई की है। कॉलेज के दिनों से ही मेडल जीतने का सिलसिला शुरू हो गया था। 19 साल की उम्र में हीना ने हंगेरियन ओपन जीता था। साल 2013 की विश्व शूटिंग प्रतियोगिता में 10 मीटर एयर पिस्टल टूर्नामेंट में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर हिना स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।

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अपने फाइनल मुकाबले में हीना ने कुल 38 अंकों के फाइनल स्कोर के साथ गोल्ड मेडल पर कब्जा किया, जबकि ऑस्ट्रेलियाई शूटर एलिना गलिआबोविच 35 अंकों के स्थान सिल्वर मेडलिस्ट रहीं। वहीं, तीसरे स्थान पर रही मलेशिया के आलिया सजान को 26 अंकों के साथ ब्रॉन्ड मेडल से ही संतोष करना पड़ा। इसके अलावा फाइनल इवेंट के इस मुकाबले में भारत की ही एक अन्य महिला शूटर अनु सिंह 15 प्वाइंट के साथ छठे स्थान पर रही।
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में यह हीना का दूसरा मेडल था। इसके पहले उन्होंने 10 मीटर शूटिंग प्रतिस्पर्धा में सिल्वर मेडल पर निशाना दागा था। हीना के 234.0 स्कोर थे जबकि ऑस्ट्रेलिया की एलिना गलिआबोविच ने 214.9 के स्कोर के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता था। हिना, गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय शूटर मनु भाकर से करीब 7 अंक पीछे रहीं। उन्होंने स्टेज वन में 46.1 और 95.5 अंक हासिल किए, जबकि स्टेज 2 एलिमिनेशन राउंड में 234 का स्कोर किया था।
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