सीमा
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ग्लासगो में जब सीमा का मुकाबला खत्म हुआ, तब उनके खाते में 58.65 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो दर्ज था। इसके बाद उन्होंने लगातार तीन प्रयास फाउल कर दिए। अब उनकी नजरें सिर्फ प्रतिद्वंद्वियों पर थीं। कैमरून की मोनी नोरा अटिम अगर अंतिम प्रयास में 58.65 मीटर से आगे निकल जातीं तो सीमा का पदक छिन जाता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जैसे ही अटिम का अंतिम प्रयास असफल रहा, सीमा के चेहरे पर मुस्कान लौट आई। वर्षों की मेहनत आखिरकार कॉमनवेल्थ गेम्स के कांस्य पदक में बदल चुकी थी।