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Sachin Yadav के संघर्ष की कहानी: क्रिकेट छोड़ भाला फेंक में आजमाया हाथ; कोहनी में लगी थी चोट, पर नहीं मानी हार

Fri, 19 Sep 2025 10:49 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सचिन ने न सिर्फ अपने आदर्श नीरज चोपड़ा को पछाड़ा बल्कि पेरिस ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम और डाइमंड लीग विजेता जूलियन वेबर को भी पीछे छोड़ दिया।
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सचिन यादव - फोटो : PTI

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के खेकड़ा गांव के 25 वर्षीय भाला फेंक खिलाड़ी सचिन यादव ने अपनी पहली ही विश्व चैंपियनशिप में ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसकी उम्मीद शायद किसी ने नहीं की थी। करीब 100 किलो वजन और छह फुट पांच इंच लंबे सचिन ने न सिर्फ अपने आदर्श नीरज चोपड़ा को पछाड़ा बल्कि पेरिस ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम और डाइमंड लीग विजेता जूलियन वेबर को भी पीछे छोड़ दिया।

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नीरज और सचिन - फोटो : ANI
पहले प्रयास में ही रचा कमाल
टोक्यो में खेले गए इस फाइनल में सचिन ने अपने पहले ही प्रयास में 86.27 मीटर का थ्रो किया, जो उनके पिछले व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ (85.16 मीटर) से बेहतर था। इस प्रदर्शन की बदौलत उन्होंने चौथा स्थान हासिल किया। त्रिनिदाद एवं टोबैगो के केशोर्न वालकॉट (88.16 मीटर) ने स्वर्ण और ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स (87.38 मीटर) ने रजत पर कब्जा जमाया। अमेरिकी खिलाड़ी कर्टिस थॉम्पसन 86.67 मीटर के साथ कांस्य पदक लेकर तीसरे स्थान पर रहे।
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नदीम और सचिन - फोटो : ANI/PTI
नीरज-नदीम भी रह गए पीछे
मौजूदा विश्व चैंपियन और भारत के स्टार नीरज चोपड़ा इस बार अपने रंग में नहीं दिखे और 82.00 मीटर से कम थ्रो के कारण आठवें स्थान पर रहे। पाकिस्तान के अरशद नदीम 82.75 मीटर के थ्रो के साथ दसवें स्थान पर रहे। जूलियन वेबर, जिन्हें गोल्ड का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, 86.11 मीटर के साथ पांचवें स्थान पर रहे।

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सचिन यादव - फोटो : PTI
क्रिकेट से हुई भाला फेंक की शुरुआत
सचिन यादव का भाला फेंक में आना भी दिलचस्प कहानी है। गांव में खेले जा रहे एक दोस्ताना क्रिकेट मैच के दौरान उनके पड़ोसी संदीप यादव ने उन्हें तेज गेंदबाजी करते देखा। उन्होंने सचिन से कहा कि उनके कंधे की गति शानदार है और उन्हें भाला फेंक आजमाना चाहिए। यही वह क्षण था जिसने सचिन की जिंदगी की दिशा बदल दी।
 
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सचिन यादव - फोटो : PTI
कोच नवल सिंह से मिली नई राह
शुरुआत में सचिन के पास कोई प्रोफेशनल कोच नहीं था और संदीप ही उन्हें गाइड कर रहे थे। बाद में संदीप ने उन्हें दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम स्थित राष्ट्रीय भाला फेंक अकादमी में कोच नवल सिंह से मिलवाया। नवल सिंह ने पहले ओलंपियन शिवपाल सिंह और पैरालंपिक गोल्ड मेडलिस्ट सुमित अंतिल जैसे एथलीट तैयार किए हैं।

यह तब की बात है जब यादव लगभग 19 साल के थे। सचिन बताते हैं, 'वो पांच या दस ओवरों का एक मजेदार मैच था जो आमतौर पर गांव के मैदानों पर युवा खेलते हैं। संदीप भाई ने मुझे देखा और कहा कि मेरे कंधे की गति अच्छी है और मैं तेज गेंद फेंक रहा हूं। उन्होंने मुझे भाला फेंकने की सलाह दी। बाद में उन्होंने मुझे नई दिल्ली में (जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के राष्ट्रीय भाला फेंक अकादमी में) जाने-माने भाला फेंक कोच नवल सिंह से प्रशिक्षण लेने की सलाह दी। इस तरह मैंने शुरुआत की।'

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सचिन यादव - फोटो : PTI
चोट और संघर्ष का दौर
2016-2020 के बीच सचिन की दूरी 70 मीटर तक भी नहीं पहुंची थी। जिला और राज्य स्तर पर कुछ प्रतियोगिताओं के बाद सचिन ने पहली बार 2000 में अंतर-विश्वविद्यालय प्रतियोगिता के दौरान एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया और फाइनल में 66.09 मीटर के थ्रो के साथ सातवें स्थान पर रहे।

वह 2021 तक 70 मीटर की दूरी नहीं छू पाए थे। 2021 में उन्हें कोहनी में गंभीर चोट लगी और सर्जरी करानी पड़ी। इलाज के लिए उनके पिता को कर्ज लेना पड़ा। लेकिन सचिन ने हार नहीं मानी। रिहैबिलिटेशन के बाद उनका प्रदर्शन और बेहतर हुआ।
 
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सचिन यादव - फोटो : PTI
80 मीटर क्लब में शामिल होकर दिलाई पहचान
चोट से उबरने के बाद यादव का प्रदर्शन बेहतर हुआ। मई 2023 में रांची में हुए फेडरेशन कप के दौरान सचिन ने 80 मीटर का आंकड़ा पार कर 80.27 मीटर थ्रो किया और तीसरे स्थान पर रहे। इस उपलब्धि ने अधिकारियों और कोचों का ध्यान उनकी ओर खींचा और वे 80 मीटर क्लब में शामिल हो गए।
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सचिन यादव - फोटो : Instagram
विश्व मंच पर पहचान बनाने का सपना पूरा
अब सचिन यादव ने विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में चौथा स्थान हासिल कर भारतीय भाला फेंक में नया सितारा बनने का एलान कर दिया है। उनका यह प्रदर्शन आने वाले 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक से पहले भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ा संकेत है कि देश के पास अब नीरज चोपड़ा के अलावा भी एक दमदार भाला फेंक खिलाड़ी है।
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