जर्मनी के स्टार फुटबॉलर और विश्व कप में सर्वकालिक सर्वाधिक गोल करने वाले 38 वर्षीय फुटबॉलर मिरोस्लाव क्लोस ने मंगलवार को संन्यास लेने की घोषणा की। पिछले सत्र में इटली के फुटबाल क्लब लाजियो के साथ अनुबंध समाप्त होने के बाद वह किसी अन्य क्लब से नहीं जुड़ पाए थे। लेकिन अब संन्यास के बाद वह राष्ट्रीय टीम के कोचिंग स्टाफ से जुड़ेंगे।पोलैंड में जन्मे क्लोस ने दो साल पहले ब्राजील में आयोजित विश्वकप में के सेमीफाइनल में ब्राजील के खिलाफ जर्मनी की 7-1 से जीत के दौरान विश्व कप में रिकॉर्ड 16वां गोल किया था। इसके बाद जर्मनी विश्वचैंपियन भी बना।
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विश्वकप में सबसे ज्यादा गोल करने वाले स्टार फुटबॉलर ने लिया संन्यास
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क्लोस
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क्लोस ने जर्मनी की ओर से 137 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और 71 गोल करने में सफल रहे। क्लोस ने लगातार चार विश्वकप (2002, 2006, 2010 और 2014) में जर्मनी का प्रतिनिधित्व किया। इन तीनों विश्वकप में जर्मनी चारों बार सेमीफाइनल तक पहुंची। जिसमें 2002 और 2014 में फाइनल तक पहुंची। साल 2002 में क्लोस ने अपने पहले विश्वकप में पांच गोल किए थे। जापान-कोरिया में आयोजित विश्वकप में जर्मनी उपविजेता रहा था। इसके बाद साल 2006 में उन्हें जर्मनी में आयोजित विश्वकप में सर्वाधिक 5 गोल करने के कारण गोल्डन बूट का पुरस्कार हासिल हुआ था। लेकिन वह अपनी टीम को विश्वविजेता नहीं बना सके। 2010 में दक्षिण अफ्रीका में क्लोस ने 4 और 2014 में 2 गोल किए। इस तरह वह रोनाल्डो के 15 गोलों से आगे निकल गए।
विश्वकप में सबसे ज्यादा गोल करने वाले स्टार फुटबॉलर ने लिया संन्यास
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संन्यास के बाद क्लोस की योजना जर्मनी के कोचिंग स्टाफ से जुड़ने की है। इसके लिए जर्मनी के मुख्य कोच जोकिम लोउ ने उनके सामने प्रस्ताव रखा था। जर्मन फुटबॉल संघ (डीएफबी) के बयान के अनुसार क्लोस अपना कोचिंग करियर शुरू करने से पहले अभ्यास कार्यक्रम से जुड़ेंगे।क्लोस ने कहा, मैं फिर से जर्मन फुटबॉल के साथ जुड़ने को लेकर खुश हूं। मैंने ब्राजील में खिताब जीतकर अपने बचपन का सपना पूरा किया। राष्ट्रीय टीम के साथ मैंने अपना सबसे बड़ा लक्ष्य हासिल किया। ऐसा लक्ष्य जो हमने एक टीम के रूप में तय किया था। इसके साथ ही मैंने व्यक्तिगत उपलब्धि भी हासिल की।
क्लोस ने आगे कहा कि जो लोग मुझे जानते हैं उन्हें अच्छी तरह से पता है कि मैं बहुत महत्वकांक्षी हूं, लेकिन मैं स्ट्राइकर हूं और स्ट्राइकर का काम गोल करना होता है। इसलिए मैंने कभी रिकॉर्ड की चिंता नहीं की और हमेशा टीम को अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की।