साल 2014 विश्व कप में क्रोएशिया ने ब्राजील को 3-1 से हराया था
चिली, ब्राजील और वेस्ट जर्मनी जैसी ताकतवर टीमों को हराने के बाद ये कहा जाने लगा था कि यूगोस्लाविया शायद सबसे शानदार युवा टीम है, लेकिन ये बात साबित न हो सकी। चार साल बाद 1991 में बाल्कन युद्ध छिड़ गया जिसने कई उम्मीदों का दम निकाल दिया। सात साल बाद 1998 में फ्रांस में खेले गए विश्व कप में लाल-सफेद चेक जर्सी पहने खिलाड़ियों ने दुनिया को बताया कि क्रोएशिया के ख्वाब कितने बड़े हैं।
मैदान में फ्रांस-बेल्जियम हैं या अफ्रीका?
खूनी जंग खत्म होने के महज तीन साल बाद मिली ये खुशी क्रोएशिया के लिए छाया से निकलकर अपनी जगह बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई। डिनामो जाग्रेब एकेडमी का जिक्र जरूरी है क्योंकि उसी ने लुका मोदरिक, डेजान लोवरन, सिमे विरास्लाजको, मारियो मांदज़ुचिक और मातेओ कोवासिच जैसे खिलाड़ी दिए हैं। लेकिन इस खेल से नाम कमाने वाले क्रोएशिया ने अपने हिस्से का काफी संघर्ष भी किया है।
क्रोएशिया का इतिहास
फुटबॉल के बहाने ये क्रोएशिया के बारे में जानने का भी सही वक्त है। ये देश मध्य और दक्षिण-पूर्व यूरोप के बीचोंबीच बसा है और एड्रियाटिक सागर के करीब। क्रोएशिया की राजधानी का नाम जाग्रेब है और क़रीब 56 हज़ार वर्ग किलोमीटर में फैले इस देश में ज्यादातर लोग रोमन कैथोलिक हैं। क्रोएशियाई यहां छठी सदी में आकर बसे थे और टोमिस्लाव इनके पहले राजा बने थे।
साल 1102 में वो हंगरी के साथ हो लिया और 1527 में ऑटोमन साम्राज्य के फैलते प्रभाव के सामने क्रोएशियाई संसद ने फर्डिनेंड ऑफ हैब्सबर्ग को अपना राजा मान लिया। 19वीं सदी की शुरुआत में इस देश के टुकड़े फ्रांसीसी इलीरियर प्रॉविंस में हो गए जबकि ऑस्ट्रिया-हंगरी ने बोस्निया हर्जेगोविना पर कब्ज़ा कर लिया।
नाजियों का कब्जा
साल 1918 में जब क्रोएशियाई संसद (सबोर) ने आजादी का एलान किया और 'स्टेट ऑफ स्लोवेनस, क्रोएट्स एंड सर्ब' से जुड़ने का फैसला किया है। अप्रैल 1941 में नाजी जर्मनी की अगुवाई में ध्रुवीय शक्तियों ने यूगोस्लाविया पर कब्जा कर लिया तो क्रोएशिया का ज्यादातर हिस्सा नाजी समर्थन वाले क्लाइंट स्टेट में चला गया। इसके बाद विरोध शुरू हुआ जिसके नतीजे में फेडरल स्टेट ऑफ क्रोएशिया बना।
इसके बाद ये सोशलिस्ट फेडरल रिपब्लिक ऑफ यूगोस्लाविया का संस्थापक सदस्य और संघीय घटक बन गया। साल 1918 से 1991 के बीच क्रोएशिया, यूगोस्लाविया का हिस्सा रहा और साल 1991 में क्रोएशिया में लड़ाई स्लोवेनिया में जंग के बाद शुरू हुई। लेकिन पहले सोवियत रूस और फिर यूगोस्लाविया के बिखरने और उस वजह से हालात बिगड़ने की क्रोएशिया ने बड़ी कीमत चुकाई है।
मुश्किलें ही मुश्किलें
बढ़ते तनाव के बीच क्रोएशिया ने 25 जून, 1991 को स्वतंत्रता की घोषणा की। हालांकि इस घोषणापत्र को पूरी तरह अमली जामा पहनाया गया 8 अक्टूबर, 1991 को। इस बीच हालात बिगड़ रहे थे क्योंकि युगोस्लाव पब्लिक आर्मी और सर्ब पैरामिलिट्री समूहों ने क्रोएशिया पर हमला बोल दिया। 1991 के अंत में हालात ऐसे थे कि क्रोएशिया के पास सिर्फ़ अपनी एक-तिहाई जमीन पर कब्जा रह गया था। क्रोएशियाई मूल के लोगों को निशाना बनाया गया। लाखों मारे गए और बेघर हुए।
जनवरी, 1992 में क्रोएशिया को यूरोपीय इकोनॉमिक कम्युनिटी से मान्यता मिल गई और इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने उसे पहचान दे दी। अगस्त 1995 में युद्ध खत्म हुआ तो साफ हो गया कि जीत क्रोएशिया की हुई है। इसके साथ ही बागी इलाकों से दो लाख सर्बियाई खदेड़े गए और वो जगह बोस्निया हेर्जेगोविना से आने वाले क्रोएशियाई शरणार्थियों को बसाने में काम आई।
और फिर रिकवरी का दौर
कब्ज़े वाले बाकी इलाके क्रोएशिया को नवंबर, 1995 में हुए एक समझौते के बाद मिले। लेकिन जंग के बाद भी क्रोएशिया की मुश्किलें खत्म नहीं हुईं क्योंकि उसे दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होने में काफी वक्त लगने वाला था। साल 2000 के बाद का दौर क्रोएशिया में लोकतंत्र के कुछ मज़बूत होने, आर्थिक विकास और ढांचागत सामाजिक सुधार के रूप में आया। साथ ही बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अराजकता जैसी दिक्कतें भी।
लेकिन उसने लंबा सफर भी तय किया है। वो यूरोपीय संघ, संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय परिषद, नेटो, डब्ल्यूटीओ का सदस्य देश है। यूएन पीस कीपिंग फोर्स का सक्रिय सदस्य होने की वजह से वो नेटो की अगुवाई वाले कई मिशन में अपने सैनिक भेजता रहा है। क्रोएशिया की अर्थव्यवस्था की बात करें तो वो सर्विस, इंडस्ट्री और खेती पर आधारित है। पर्यटन भी कमाई का बड़ा जरिया है। दुनिया के शीर्ष 20 पर्यटन स्थलों में इसे शुमार किया जाता है। विकास और संघर्ष के बीच क्रोएशिया दिक्कतों के बीच फुटबॉल को हर बार अपने नए और पुराने जख्मों पर मरहम की तरह इस्तेमाल करता रहा है।