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Lovlina Borgohain: स्वर्ण पदक से चूकीं, पर इतिहास रच गईं लवलीना बोरगोहेन; बनीं भारतीय मुक्केबाजी की नई मिसाल

Sun, 02 Aug 2026 02:17 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो

सार

भारतीय स्टार मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 75 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह मैरी कॉम और विजेंदर सिंह के बाद हर बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में पदक जीतने वाली भारत की तीसरी मुक्केबाज बन गई हैं।
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लवलीना बोरगोहेन - फोटो : IANS

भारत की स्टार मुक्केबाज और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया। महिलाओं के 75 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने के साथ वह मैरी कॉम और विजेंदर सिंह के बाद हर बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में पदक जीतने वाली भारत की तीसरी मुक्केबाज बन गई हैं।

यह लवलीना का कॉमनवेल्थ गेम्स में पहला पदक है। इससे पहले वह दो बार इन खेलों में हिस्सा ले चुकी थीं, लेकिन पोडियम तक नहीं पहुंच सकी थीं। ग्लासगो में उन्होंने इस इंतजार को खत्म कर अपने करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ ली।

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लवलीना बोरगोहेन - फोटो : IANS
फाइनल में ऑस्ट्रेलियाई मुक्केबाज से मिली हार
फाइनल मुकाबले में लवलीना का सामना ऑस्ट्रेलिया की एम्मा-सू ग्रीनट्री से हुआ। दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली, लेकिन जजों ने 4-1 के विभाजित फैसले से ऑस्ट्रेलियाई मुक्केबाज के पक्ष में निर्णय दिया। मुकाबले के दौरान लवलीना ने कई सटीक पंच लगाए और अंत तक संघर्ष किया, लेकिन ग्रीनट्री की आक्रामक रणनीति और बेहतर रिंग कंट्रोल को निर्णायकों ने अधिक अंक दिए।
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लवलीना बोरगोहेन - फोटो : IANS
हर बड़े मंच पर पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय मुक्केबाज
इस रजत पदक के साथ लवलीना का नाम भारतीय मुक्केबाजी के दिग्गजों की सूची में और मजबूत हो गया है। उनके खाते में अब ओलंपिक कांस्य, विश्व चैंपियनशिप में एक स्वर्ण और दो कांस्य, एशियाई खेलों का रजत और कॉमनवेल्थ गेम्स का रजत शामिल हो गया है। उन्होंने 69 किग्रा और 75 किग्रा दोनों भार वर्गों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार सफलता हासिल की है।
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लवलीना बोरगोहेन - फोटो : @India_AllSports
भारत के ऐतिहासिक मुक्केबाजी अभियान में अहम योगदान
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों ने अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। भारत ने मुक्केबाजी में सात स्वर्ण और तीन रजत समेत कुल 10 पदक जीतकर नया इतिहास रचा। लवलीना का रजत पदक इस ऐतिहासिक अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। हालांकि वह स्वर्ण पदक से चूक गईं, लेकिन उनका यह प्रदर्शन एक बार फिर साबित करता है कि वह लगातार बड़े मंचों पर भारत के लिए पदक जीतने वाली सबसे भरोसेमंद मुक्केबाजों में शामिल हैं।
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