शुभम जुयाल और सोमन राणा
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क्या है F57 वर्ग, जिसमें सोमन और शुभम ने जीते पदक?
- पैरा एथलेटिक्स में F57 वर्ग उन खिलाड़ियों के लिए होता है, जो निचले अंगों (पैरों) में गंभीर शारीरिक अक्षमता के कारण खड़े होकर नहीं, बल्कि स्पेशल थ्रोइंग चेयर पर बैठकर शॉटपुट, डिस्कस और जैवलिन जैसी फील्ड स्पर्धाओं में हिस्सा लेते हैं।
- इस वर्ग में 'F' का मतलब फील्ड इवेंट (थ्रोइंग स्पर्धाएं) होता है, जबकि '57' यह दर्शाता है कि खिलाड़ी निचले अंगों से प्रभावित हैं, लेकिन उनके हाथ, कंधे और शरीर का ऊपरी हिस्सा (ट्रंक) अच्छी तरह काम करता है। यही वजह है कि वे बैठकर भी काफी ताकत के साथ थ्रो कर पाते हैं।
कौन-कौन खिलाड़ी इस वर्ग में खेलते हैं?
F57 वर्ग में आमतौर पर वे खिलाड़ी शामिल होते हैं, जिनके एक या दोनों पैर कटे हों, पैरों में गंभीर विकृति हो, पोलियो, आंशिक पैरालिसिस या अन्य ऐसी शारीरिक स्थिति हो, जिसकी वजह से खड़े होकर थ्रो करना संभव या सुरक्षित नहीं होता।
कैसे होता है मुकाबला?
- इस स्पर्धा में खिलाड़ी सामान्य शॉटपुट की तरह मैदान में दौड़कर थ्रो नहीं करते। उन्हें एक विशेष धातु की थ्रोइंग चेयर पर बैठाया जाता है, जिसे मैदान में मजबूती से बांध दिया जाता है।
- खिलाड़ी सुरक्षा बेल्ट से बंधे रहते हैं और संतुलन बनाए रखने के लिए एक वर्टिकल होल्डिंग बार पकड़ते हैं।
- इसके बाद वे अपने कंधों, हाथों और शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत तथा ट्रंक रोटेशन का इस्तेमाल करते हुए शॉटपुट को अधिकतम दूरी तक फेंकने की कोशिश करते हैं।
- जिस खिलाड़ी का सर्वश्रेष्ठ वैध थ्रो सबसे लंबा होता है, वही विजेता घोषित किया जाता है।
- यही वह स्पर्धा है, जिसमें कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के सोमन राणा (13.40 मीटर) ने स्वर्ण और शुभम जुयाल (13.28 मीटर) ने रजत पदक जीतकर देश को शानदार डबल सफलता दिलाई।