भारत की दिग्गज वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने एक बार फिर देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने बर्मिंघम में चल रहे राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। मीराबाई पिछली बार गोल्ड कोस्ट में स्वर्ण जीती थीं। वहीं, 2020 टोक्यों ओलंपिक में उन्होंने देश को रजत पदक दिलाया था। मणिपुर में पैदा हुईं मीराबाई बचपन में तीरंदाज बनना चाहती थीं, लेकिन वेटलिफ्टिंग में आ गईं। इसके पीछे की कहानी काफी रोचक है।
विज्ञापन
2 of 7
मीराबाई चानू
- फोटो : सोशल मीडिया
8 अगस्त 1994 को मणिपुर के नोंगपेक काकचिंग गांव में मीराबाई का जन्म हुआ था। उनका बचपन संघर्षों में बीता। वह पहाड़ से जलावन के लिए लकड़ियां चुनकर लाती थीं। बचपन से भारी सामान उठाने वाली मीराबाई को शायद यह नहीं पता था कि वह आगे चलकर भारी सामान उठाकर ही देश को पदक दिलाएंगी।
विज्ञापन
3 of 7
मीराबाई चानू और सचिन तेंदुलकर
- फोटो : twitter@mirabai_chanu
बचपन में मीराबाई तीरंदाज बनने के सपने देखती थीं। सातवीं कक्षा तक वह इसी में अपना करियर बनाना चाहती थीं, लेकिन आठवीं में सबकुछ बदल गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आठवीं की किताब में उन्हें भारत की मशहूर वेटलिफ्टर कुंजरानी देवी के बारे में पढ़ने का मौका मिला। कुंजरानी विश्व चैंपियनशिप में सात रजत और एशियाई खेलों में दो कांस्य पदक जीती थीं।
4 of 7
मीराबाई चानू
- फोटो : सोशल मीडिया
शुरू में मीराबाई को लगा कि वजन ही तो उठाना है, लेकिन बाद में उन्हें यह एहसास हुआ कि वेटलिफ्टिंग काफी मुश्किल खेल है। उन्होंने इसमें देश को पदक दिलाने के लिए कड़ी मेहनत की। इसके लिए उन्हें कई जगह परेशानियों का भी सामना करना पड़ा।
विज्ञापन
5 of 7
मीराबाई चानू
- फोटो : सोशल मीडिया
मीराबाई को अपने देश की मिट्टी और चावल से काफी लगाव है। वह जब भी विदेशी दौरे पर जाती हैं तो मिट्टी और चावल अपने साथ लेकर जाती हैं। वह देश से बाहर भी गांव का ही चावल खाती हैं।
विज्ञापन
6 of 7
मीराबाई चानू
- फोटो : PTI
उनकी एक और रोचक कहानी यह है कि मीराबाई को वेटलिफ्टर बनाने में ट्रक डाइवर्स का काफी योगदान है। उनके पास अपने गांव से 25 किमी दूर इंफाल में स्थित खेल अकादमी तक जाने के पैसे नहीं थे। रोजाना उनके लिए अभ्यास कठिन था। वह प्रतिदिन नदी की रेत को इंफाल तक ले जाने वाले ट्रक डाइवर्स से मदद मांगती थीं।
मीराबाई चानू और ट्रक ड्राइवर्स
- फोटो : सोशल मीडिया
हाल ही में मीराबाई ने 150 ट्रक ड्राइवर्स और उनके सहायकों को सम्मानित किया है। उन्होंने सबको एक शर्ट और एक मणिपुरी दुपट्टा दिया था। मीराबाई उस समय कहा था कि अगर ये ड्राइवर्स नहीं होते तो उनका वेटलिफ्टर बनने का सपना अधूरा रह जाता।