हनुमान जी की माता का नाम अंजनी और पिता का नाम केसरी था। लेकिन क्या आपको पता है कि माता अंजनी पूर्व जन्म में एक अप्सरा थीं। जिसका नाम पुंजिकस्थली था, एक बार ऋषि दुर्वासा स्वर्ग में इन्द्र की सभा में आए हुए थे। पुंजिकस्थली बार-बार आ जा रही थी, क्रोधित होकर ऋषि ने उन्हें श्राप दिया कि वानरी बन जाए। क्षमा मांगने पर ऋषि दुर्वासा ने वरदान दिया कि वह अपनी इच्छा के अनुसार रूप धारण कर सकती हैं। इसी श्राप के कारण उन्होंने वानर जाति में जन्म लिया था।