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हनुमान जी से जुड़ी ये खास बातें नहीं जानते होंगे आप जानकर हो जाएंगे हैरान

Wed, 03 Jun 2020 07:51 AM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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हनुमान जी - फोटो : Pixabay
हनुमान जी की माता का नाम अंजनी और पिता का नाम केसरी था। लेकिन क्या आपको पता है कि माता अंजनी पूर्व जन्म में एक अप्सरा थीं। जिसका नाम पुंजिकस्थली था, एक बार ऋषि दुर्वासा स्वर्ग में इन्द्र की सभा में आए हुए थे। पुंजिकस्थली बार-बार आ जा रही थी, क्रोधित होकर ऋषि ने उन्हें श्राप दिया कि वानरी बन जाए। क्षमा मांगने पर ऋषि दुर्वासा ने वरदान दिया कि वह अपनी इच्छा के अनुसार रूप धारण कर सकती हैं।  इसी श्राप के कारण उन्होंने वानर जाति में जन्म लिया था।
 
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हनुमान जी - फोटो : अमर उजाला
भगवान हनुमान स्वंय रूद्र के अवतार हैं। एक बार ऋषि भारद्वाज अपने आसन पर बैठे हुए थे कि अचानक एक हाथी उनके ऊपर झपट पड़ा केसरी जी उस समय घूमते हुए प्रभास तीर्थ के निकट ही थे।  उन्होंने अपने बल से हाथी के दांत उखाड़ दिए तभी ऋषियों ने प्रसन्न होकर उनसे वरदान मांगने को कहा मेरा पुत्र पवन के समान पराक्रमी और रूद्र के समान तेज वाला हो। इसी वरदान की वजह से स्वंय भगवान रूद्र के अवतार और पवन पुत्र कहलाए।
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हनुमान जी - फोटो : Social media
इस कलयुग के समय में हनुमान जी एक ऐसे देवता हैं जो धरती पर सशरीर उपस्थित हैं। हनुमान जी को धर्म की रक्षा करने के लिए अमर होने का वरदान प्राप्त है। इस कारण आज भी हनुमान जी जीवित हैं, और हनुमान जी अपने भक्तों और धर्म की रक्षा कर रहें हैं। हनुमान जी कलयुग के अंत तक धरतीलोक पर रहेंगे। कलयुग के समय में भगवान राम और हनुमान की भक्ति करने वालों को प्रभु हर कष्ट से दूर रखते हैं।

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हनुमान मंदिर - फोटो : अमर उजाला
जब श्री राम जी युद्ध जीत कर लंका से वापस आए तो आभार प्रकट करने के लिए सुग्रीव, विभीषण, अंगद सभी को उपहार भेंट किए तभी हनुमान जी ने प्रभु से वरदान मांगा कि जब तक आपकी कथा प्रचलित रहे तब तक मेरे शरीर में प्राण रहें प्रभु श्री राम ने वरदान दिया कि जब तक मेरी कथा रहेगी तब तक तुम्हारे शरीर में प्राण रहेंगे। इसलिए जहां पर भी भगवान श्री राम के भजन कीर्तन होते हैं हनुमान जी वहां गुप्त रूप से उपस्थित होते हैं।
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हनुमान जी
हनुमान जी ब्रहमचारी थे परंतु कहा जाता है कि उनका एक पुत्र था, जिसका नाम मकरध्वज था। वह भी अपने पिता कि तरह पराक्रमी और बलशाली थे। हनुमान जी ने उसे पाताल लोक का अधिपति नियुक्त करके धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
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