हिन्दू धर्म में पूजा-पाठ करने के विशेष महत्व होता है। जब कोई खास आयोजन होता है तो पूजा के बाद हवन करने का नियम होता है। इसके पीछे आमतौर पर धार्मिक कारण माना जाता है जबकि इसका एक बड़ा वैज्ञानिक कारण भी है। यज्ञ के समय जलाई जाने वाली सामग्री रोग उपचार के काम भी आती है।
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सामान्य तौर पर जलाई गई आग के अपने परिणाम होते हैं, लेकिन हवन में जलाई गई आग से व्यक्ति कई रोगों से भी मुक्ति हो जाता है और यह उसके लिए रक्षा कवच का काम करती है।
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शोध के अनुसार हवन से क्षय, श्वास और फेफड़े की कुछ बीमारियों को ठीक करने में खासी कामयाबी हासिल की है। हवन से वनौषधियों के प्रयोग के प्रभाव का उल्लेख करते हुए प्रो.रदरशेड ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में एक नई विधा जुड़ सकती है जिसे ′यज्ञोपैथी′ नाम दिया जा सकता है।
पृथ्वी और उसके गर्भ से जन्म लेनी वाली वनस्पतियों के तत्व को सूक्ष्मरूप में ग्रहण करती हुई वायु या गंध शरीर की संभावित कमी की पूर्ति और विकारों का शमन करती है। उनके अनुसार यज्ञ प्रक्रिया साधक-याजक के चारों ओर का प्रभाव क्षेत्र का मंडल बदल देती है।
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